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पायलट बाबा को भी वापस मिली महामंडलेश्वर पदवी अब सिर्फ शालीन कपड़ों में दिखेंगी राधे मां


🗒 सोमवार, दिसंबर 03 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

 संतों की गरिमा के विपरीत अश्लील कपड़े पहनने, भक्तों के बीच जाकर नृत्य करने के चलते विवादों में रहने वाली धर्मगुरु राधे मां को जूना अखाड़ा ने उनके माफीनामे के बाद सख्त हिदायत के साथ वापस लिया है। अब वह शालीन कपड़ों में ही नजर आएंगी और माता की चौकी में पुरुष भक्तों की गोद में नहीं बैठेंगी। ऐसा उन्होंने लिखित माफीनामा देकर वचन भी दिया है।

पायलट बाबा को भी वापस मिली महामंडलेश्वर पदवी अब सिर्फ शालीन कपड़ों में दिखेंगी राधे मां

अगर वह अपने वचन पर खरी नहीं उतरीं तो अखाड़ा न सिर्फ उन्हें पुन: बाहर कर देगा बल्कि दोबारा उन्हें माफी नहीं दी जाएगी। कुछ ऐसी ही हिदायत महामंडलेश्वर पायलट बाबा को दी गई है। बाबा को अखाड़ा के नियम-निर्देशों में रहकर काम करने की हामी भरने पर माफी मिली है। प्रयाग कुंभ से पहले जून अखाड़ा ने अहम निर्णय लेते हुए चर्चित धर्मगुरु राधे मां व पायलट बाबा का निलंबन वापस लेते हुए महामंडलेश्वर पदवी भी वापस दे दी है। पायलट बाबा को जूना अखाड़ा कुंभ में जमीन भी उपलब्ध करा रहा है, जिससे वह शिविर लगा सकें। राधे मां को शाही स्नान में आने की छूट दी गई है। अखाड़ा की ओर से उनके ऊपर कोई रोक नहीं होगी। श्रद्धेय गुरुजी, मैं अखाड़े के नीति, निर्देशों व आदेशों का पूरी निष्ठा से पालन करूंगी। पहले भी ऐसा करती रही हूं। मीडिया में उनके खिलाफ भ्रामक प्रचार करके छवि खराब की गई। तब मुझसे कुछ गलतियां भी हुई थीं, जो आगे नहीं होंगी। मैं स्वयं के पहनावे, व्यवहार, वार्तालाप को शालीन रखूंगी, जिससे अखाड़े की गरिमा को ठेस न पहुंचे। आपसे आग्रह है कि मुझे क्षमा करते हुए अखाड़े में पुन: शामिल करने की कृपा करें।

जूना अखाड़ा के संरक्षक, अध्यक्ष व पंच परमेश्वर। मैं पायलट बाबा, अज्ञानतावश अखाड़ा के नियम विरुद्ध जाकर महामंडलेश्वर परिषद के गठन में शामिल हो गया था। आगे ऐसी भूल नहीं होगी। कृपया मुझे क्षमा करते हुए अखाड़े में सक्रिय होने की अनुमति प्रदान करने की कृपा करें।राधे मां व पायलट बाबा सही मायने में देश-विदेश में सनातन धर्म की ख्याति बढ़ा रहे हैं। हजारों लोग उनकी प्रेरणा से सनातन धर्म अपना रहे हैं। दोनों के ऊपर कोई पुलिस केस नहीं है, उन्हें अपने किए पर पछतावा है। इससे धर्महित में अखाड़े के पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से उन्हें वापस लेकर महामंडलेश्वर की पदवी लौटाने का निर्णय लिया है।राधे मां जूना अखाड़ा के जगद्गुरु पंचानन गिरि की शिष्या हैं। अगस्त 2012 में हरिद्वार स्थित जूना अखाड़ा के माया मंदिर में उन्हें महामंडलेश्वर पदवी अभिषेक करने के साथ दी गई थी। बाद में अश्लील कपड़े पहनने, भक्तों की गोद में बैठने, दहेज उत्पीडऩ जैसे आरोप लगने पर अखाड़े ने उन्हें निलंबित कर दिया था। प्रयाग महाकुंभ 2013 में राधे मां आने की तैयारी में थीं, तभी निलंबित कर उनके प्रयाग आने पर रोक लगा दी गई थी। इससे वह प्रयाग नहीं आ सकीं।

राधे मां उर्फ सुखविंदर का जन्म अप्रैल 1965 में पंजाब के गुरुदासपुर जिला के दोरंगला गांव में एक सिख परिवार में हुआ। इनकी शादी व्यापारी सरदार मोहन सिंह से हुई। सुखविंदर 22 साल की हुईं तभी धार्मिक कार्यों में उनका रुझान बढऩे लगा। वह पंजाब, हिमांचल में कई जगह माता की चौकी लगाकर लोगों की व्यक्तिगत, व्यापारिक व पारिवारिक समस्याओं को दूर करने का दावा करने लगीं।इससे भक्तों ने उन्हें 'राधे मां नाम दिया। उन्होंने मुंबई में अपना ठिकाना बनाया। यहां अनेक व्यापारी उनके भक्त बने। यहां राधे मां चमत्कारी देवी के रूप में प्रचारित हुईं। धीरे-धीरे अमेरिका, कनाडा, जापान, इंग्लैंड जैसे देशों में उनके आश्रम बन गए। अक्टूबर 2012 में एक महिला ने राधे मां पर दहेज उत्पीडऩ व अश्लीलता फैलाने का आरोप लगाया। इसके सबूत मीडिया में पेश किए। टीवी कलाकार डॉली बिंद्रा ने राधे मां व उनके समर्थकों के खिलाफ अश्लीलता फैलाने, यौन उत्पीडऩ जैसे संगीन आरोप लगाए, जिससे वह विवादों में घिर गई थीं।  

राधे मां को गहनों व लाल रंग से काफी लगाव है। वह लाल जोड़े और लाखों के गहनों में दुल्हन की तरह सजती हैं। इनके कार्यक्रम शाही अंदाज में होते हैं। सिर से लेकर पैर तक सोने और हीरे से लदी राधे मां भक्तों को दर्शन देती हैं। इनके भक्त उन्हें मां दुर्गा का अवतार बताकर पूजते हैं।पायलट बाबा चर्चित धर्मगुरुओं में शामिल हैं। विदेशों में इनके भक्त अधिक हैं। 2013 के प्रयाग महाकुंभ से पहले पायलट बाबा जूना अखाड़ा की मंशा के विपरीत 13 अखाड़ों के महामंडलेश्वरों को मिलाकर महामंडलेश्वर परिषद बना रहे थे। इसकी भनक अखाड़े को हुई तो उन्हें निलंबित कर दिया। दस फरवरी 2013 को मौनी अमावस्या के मुख्य शाही स्नान करने से उन्हें रोक दिया गया। वह बाहर न आ सकें, उसके लिए नौ फरवरी की रात उनके शिविर में उन्हें नजरबंद करते हुए बाहर फोर्स लगवा दी गई।

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