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माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की जांच में अब दस अगस्त तक साक्ष्य मांगे


🗒 गुरुवार, जुलाई 26 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

जिला कारागार में पूर्वांचल के माफिया डॉन प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की मजिस्ट्रीयल जांच में 25 जुलाई तक किसी ने भी एडीएम के समक्ष उपस्थित होकर लिखित या मौखिक साक्ष्य नहीं दिए। इसी के चलते एडीएम ने साक्ष्य देने की तारीख बढ़ाकर दस अगस्त कर दी है।  बागपत जेल में नौ जुलाई को मुन्ना बजरंगी की हुई हत्या की मजिस्ट्रीयल जांच के लिए डीएम ऋषिरेन्द्र कुमार ने एडीएम वित्त व राजस्व लोकपाल सिंह को जांच अधिकारी नामित किया था।

माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की जांच में अब दस अगस्त तक साक्ष्य मांगे

एडीएम ने जेल अधीक्षक से हत्याकांड से संबंधित उपलब्ध अभिलेखों की प्रमाणित प्रति तथा थाना खेकड़ा प्रभारी निरीक्षक से समस्त अभिलेख, एफआइआर तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आदि की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही आम जन से भी उक्त हत्याकांड के संबंध में कोई भी लिखित या मौखिक साक्ष्य उपलब्ध कराने को 25 जुलाई तक का समय दिया था, लेकिन इस अवधि में कोई भी लिखित या मौखिक साक्ष्य उपलब्ध कराने एडीएम के समक्ष नहीं पहुंचा। अब यह तिथि दस अगस्त कर कर दी गई है। 

मुन्ना बजरंगी की हत्या के 17 दिन बीत जाने के बाद भी बागपत पुलिस ने मृतक के परिवार से कोई संपर्क नहीं किया। पुलिस अधिकारियों ने चार दिन पूर्व बजरंगी की पत्नी सीमा ङ्क्षसह को नोटिस भेजने का दावा किया था, लेकिन गुरुवार शाम तक उसके पास कोई नोटिस नहीं पहुंचा।  मुन्ना बजरंगी की नौ जुलाई को जेल में हत्या कर दी गई थी। कुख्यात सुनील राठी ने हत्या करना स्वीकार किया था। सीमा ने सीओ को तहरीर दी थी जिसे विवेचना में शामिल किया गया है। एसपी जय प्रकाश ने 22 जुलाई को सीमा सिंह को बयान के लिए नोटिस भेजने की बात कही  थी,लेकिन गुरुवार शाम तक नोटिस सीमा के घर तक नहीं पहुंचा। मुन्ना बजरंगी के रिश्तेदार एवं वकील  विकास श्रीवास्तव ने बताया कि अभी तक न तो पुलिस का उनके पास कोई नोटिस आया है और न ही पुलिस ने उनसे कोई संपर्क किया है। पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है, इसकी उनको कोई जानकारी नहीं है। उधर एसपी जयप्रकाश का कहना है कि केस की विवेचना चल रही है। जेल के स्टाफ और बंदियों से पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। शायद ही कोई दिन गुजरता हो, जब पुलिस की टीम वहां पर न जाती हो, लेकिन नतीजा शून्य है। पुलिस अभी तक पिस्टल जेल में कैसे पहुंची, इसका भी जवाब नहीं ढूंढ़ पाई है।

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