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सांसद सावित्रीबाई फुले का भाजपा से मोहभंग, पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा


🗒 गुरुवार, दिसंबर 06 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

बीते करीब एक वर्ष से भारतीय जनता पार्टी को कई जगह पर घेरने वाली बहराइच से सांसद सावित्रीबाई फुले का पार्टी से मोहभंग हो गया। भाजपा सांसद सावित्रीबाई फुले ने आज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। वह 2014 में नरेंद्र मोदी की लहर में सांसद चुनी गई थीं। इससे पहले उन्होंने 2012 में बहराइच के बेल्हा से भाजपा के टिकट पर विधानसभा का भी चुनाव लड़ा था।

सांसद सावित्रीबाई फुले का भाजपा से मोहभंग, पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा

बहराइच के नानपारा की निवासी सावित्रीबाई फुले ने आज बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के 63वें महानिर्वाण दिवस पर भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा की दलित नेता सावित्रीबाई फुले बीते काफी समय से पार्टी को घेरने और विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहीं। सांसद सावित्री बाई फुले पिछले डेढ़ वर्षों से अपने विवादित बयानों से पार्टी में हाशिए पर आ गई थी। भाजपा व आएएसएस पर लगाया उपेक्षा का आरोप। सांसद ने भाजपा पर दलित विरोधी का भी आरोप लगाया है। सांसद फुले ने कहा कि भाजपा और उसके संगठन से मेरा कोई लेना देना नही है। जब तक जिंदा रहूंगी भाजपा में वापस नजी आऊंगी।भाजपा सरकार में रहते हुए अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करने वाली सांसद सावित्री बाई फुले ने दो दिन पहले फिर विवादित बयान देकर खलबली मचा दी थी। सावित्री बाई ने भाजपा पर देश के संविधान को बदलने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा देश को मनुस्मृति से चलाना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा दलित, पिछड़ा व मुस्लिम विरोधी है और आरक्षण खत्म करने की साजिश रच रही है।बहराइच के दौरे पर मंगलवार को ही उन्होंने भगवान राम के खिलाफ बेहद अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने इस मौके पर श्रीराम को मनुवादी तो हनुमान जी को मनुवादियों का गुलाम बताया था। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हनुमान जी को दलित बताने के बयान पर तंज कसा था। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि राम मंदिर प्रदेश के तीन फीसदी ब्राह्मणों की कमाई का धंधा है।

यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ के हनुमान जी को दलित बताने वाले बयान पर सावित्रीबाई फुले ने कहा था कि भगवान राम मनुवादी थे तो हनुमान मनुवादियों के गुलाम थे। जिन्होंने भगवान राम का बेड़ा पार कराने का काम किया था। उस समय हनुमान जी का अपमान किया गया। वह अगर दलित थे, तो उन्हें इंसान क्यों नहीं बनाया गया। उन्हें बंदर क्यों बनाया गया। उनके मुंह में कालिख क्यों लगाई गई और उन्हें पूछ क्यों लगाई, यह सब इस वजह से हुआ क्योंकि वे दलित थे। देश के पिछड़े लोग राजा हुआ करते थे। जो रक्षा करने का काम करते थे तो उन्हें राक्षस कहा गया।सांसद फुले ने कहा हनुमान जी को इंसान क्यों नहीं बनाया गया। उन्हें बंदर बनाकर उनका अपमान किया गया। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि वह दलित थे। दलितों और पिछड़ों को वानर और रक्षक कहा जाता था। यह सब भगवान राम ने किया। उन्होंने दावा किया कि हनुमान दलित थे, इसलिए उन्हें अपमानित किया गया था। हम दलितों को इंसान नहीं समझा जाता था। राममंदिर निर्माण के प्रश्न पर कहा कि मंदिर प्रदेश के तीन प्रतिशत ब्राह्मणों के कमाई का धंधा है। मंदिर निर्माण की मांग वही लोग करते हैं, जो मंदिर के मालिक होते हैं। सांसद ने कहा कि बहुजन समाज की आस्था द्वारा जितना मंदिर में चढ़ावा चढ़ाया जाता है, उसके मालिक ब्राह्मण ही होते हैं। धंधे के लिए ही राम मंदिर की बात उठाई जा रही है। उन्होंने कहा कि अब देश न राम मंदिर से चलेगा और न ही भगवान से चलेगा। अब देश संविधान से चलेगा।सवर्ण समाज के लोगों पर तंज कसते हुए सांसद ने कहा कि लोगों को डायवर्ट करने के लिए राम मंदिर की ओर उनके दिमाग को मोड़ा जा रहा है। सांसद ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के बजाय साक्ष्यों के आधार पर तथागत गौतम बुद्ध जी की प्रतिमा स्थापित होनी चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने भगवान राम को शक्तिहीन बताते हुए यहां तक कह डाला कि अगर उनमें शक्ति होती तो अयोध्या में मंदिर बन जाता।सांसद सावित्रीबाई फुले ने कहा कि मंदिर और कुंभ के नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपया खर्च किया जा रहा है। अगर यही पैसे गरीबों में बांट दिया जाए तो शायद गरीबों की गरीबी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि चार वर्ष तक इन लोगों को मंदिर नाम बिल्कुल भी याद नहीं रहा, अब जब पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं तो इन्हें मंदिर की याद आई है और आगामी चुनाव को लेकर के अब फिर एक बार मंदिर का मुद्दा सामने लेकर आ रहे हैं। ताकि लोग मंदिर के नाम पर इन्हें वोट दें। लेकिन अब दलित और पिछड़ा वर्ग किसी भी कीमत पर इनके साथ नहीं आने वाला है। 

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