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पूर्व दस्यु सम्राट मलखान सिंह बांदा-चित्रकूट से ताल ठोकने को तैयार


🗒 बुधवार, मार्च 13 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

लोकसभा चुनाव में इस बार धुरंधरों का खेल बिगाडऩे की सियासी गोटें बिछ चुकीं हैं। अखिल भारतीय खंगार क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय संरक्षक एवं चंबल के पूर्व दस्यु सम्राट मलखान सिंह चुनावी रण में ताल ठोकने की तैयारी कर रहे हैं। अपने सजातीय करीब दो लाख वोटर के सहारे राजनीतिक पारी को लेकर वह आशान्वित हैं। वह प्रदेश में अपने 55 लाख सजातीय वोटों के दम पर यूपी की राजनीतिक में गेममचेंजर बनने का ताना-बाना बुन रहे हैं। उन्होंने पत्रकार वार्ता में अपनी चुनावी जिज्ञासा जगजाहिर की थी, फिलहाल टिकट के लिए वह कई दलों के संपर्क में हैं। मलखान बताते हैं कि बांदा-चित्रकूट संसदीय सीट से भाजपा टिकट देती है तो ठीक है, अन्यथा कांग्रेस समेत दूसरे दलों से भी टिकट लेने में कोई परहेज नहीं करेंगे। अपने पुराने जीवन को लेकर मलखान का कहना था कि उन्होंने हमेशा उत्पीडऩ के खिलाफ आवाज उठाई है, आगे भी उत्पीडऩ को बर्दाश्त नहीं करेंगे। खंगार समाज के स्थानीय पदाधिकारी दिवाकर सिंह का कहना है कि उन्होंने भाजपा से लोकसभा में दो सीटें मांगी हैं। इसमें एक बांदा-चित्रकूट और दूसरी सीट सीतापुर जिले की मिश्रिख लोकसभा सीट है। 

पूर्व दस्यु सम्राट मलखान सिंह बांदा-चित्रकूट से ताल ठोकने को तैयार

बहरहाल, मलखान की राजनीतिक पारी कितनी सफल होगी यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन एक बात तय है कि बांदा-चित्रकूट लोकसभा सीट से पूर्व दस्यु मलखान सिंह चुनावी मैदान में ताल ठोकते हैं तो यहां चुनाव काफी रोचक हो जाएगा। इसकी एक वजह यह भी है कि बुंदेलखंड के चुनावों में डकैतों का हस्तक्षेप शुरू से किसी न किसी तरह जरूर रहा है। बीहड़ की तरह ही बुंदेलखंड भी डकैतों की शरणस्थली के रूप में जाना जाता है। ऐसे में मलखान सिंह की आमद यहां के चुनावी माहौल में सरगर्मी बढ़ाएगी। साथ ही बड़े-बड़े धुरंधरों के समीकरण बिगडऩे के भी पूरे आसार हैं। मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने 1980 में गैंग के साथ सरेंडर करने वाले मलखान उस जमाने के सबसे खूंखार डकैत थे। छह फीट लंबे दस्यु सरगना के कंधे पर हमेशा रायफल रहती थी। उन पर 32 पुलिस कर्मियों समेत कुल 185 हत्याओं का आरोप रहा है। सरेंडर के बाद उनको भूदान आंदोलन में रहने-बसने के लिए जमीन दी गई थी। फिलहाल उनका ज्यादातर समय अपने गांव भिंड में मंदिर में पूजापाठ में गुजरता है।

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