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सहारनपुर जिला अस्पताल में उपचार नहीं, रेफर का मिलता है फरमान


🗒 शनिवार, मार्च 10 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

सहारनपुर : जिला अस्पताल का हाल बेहाल है। यहां मरीजों को उपचार देने के बजाए रेफर करने पर ज्यादा जोर दिया जाता है, क्योंकि इक्का-दुक्का रोगों को छोड़ बाकी किसी भी रोग के विशेष डाक्टरों की कमी है। 61 चिकित्सकों के सापेक्ष 32 डाक्टर ही हैं। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो जिला अस्पताल में प्रतिदिन 2200 से 2500 तक मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं।

सहारनपुर जिला अस्पताल में उपचार नहीं, रेफर का मिलता है फरमान

जिला अस्पताल में जनरल सर्जन के सात पद हैं, जिनमें चार रिक्त हैं। इसके अलावा हड्डी विभाग में पांच पद के सापेक्ष तीन हड्डी रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। यह सभी डाक्टर रोस्टर के हिसाब से मरीजों का आपरेशन करते हैं। नाक-कान व गले का एक भी चिकित्सक नहीं है। दांत रोग के मरीजों के लिए संविदा पर एक महिला डाक्टर को रखा गया है। अलबत्ता आंखों के लिए यहां पांच डाक्टर तैनात किए गए है, जबकि पद तीन बताए जा रहे हैं।

जिला अस्पताल में एक्स-रे से लेकर अल्ट्रासाउंड सेंटर पर एक ही डॉक्टर तैनात है, जो अपनी सुविधा के अनुसार एक दिन एक्स-रे करता है, तो दूसरे दिन मरीजों का अल्ट्रासाउंड । इतना ही नहीं कलर डापलर (रंगीन एक्स-रे) है जरूर, लेकिन आज तक उसका प्रयोग शुरू नहीं किया जा सका।

स्टाफ नर्स की कमी से भी जूझ रहा है जिला अस्पताल

जिला अस्पताल में आवंटित स्टाफ नर्स के 50 पद व 16 वार्ड ब्वायज के पद भी खाली हैं, जिससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सीएमएस डा. सत्य ¨सह ने बताया कि उनके चार्ज संभालने से पहले जिला अस्पताल में वीआइपी, अधिकारी तथा स्वास्थ्य स्टाफ के नाम पर चार से पांच-पांच लाख रुपये की दवाओं की लोकल पर्चेज हो जाती थी, लेकिन अब इस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। लोकल पर्चेज सिर्फ उन्हीं मरीजों की हो रही है, जो यहां भर्ती हैं या वो जो इतने गरीब हैं और गंभीर रोग से ग्रसित हैं। अब मुश्किल से 30-40 हजार रुपये की दवाओं की लोकल पर्चेज की जा रही है।

अन्य अस्पतालों में डाक्टर तक नहीं

17 आयुर्वेदिक अस्पतालों राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर, राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नकुड़ 25 बेड की क्षमता के हैं। वहीं खजूरी अकबरपुर, कालुवाला पहाड़ीपुर, छुटमलपुर, देवबंद, डिगोली, चंदनकोली, खेड़ामुगल, भूरीबांस, नठौड़ी, महंगी में चार बेड की क्षमता है। वहीं रायपुर, पानसर, जड़ौदापांडा, मीरपुर, सढ़ौली हरिया में सामान्य ओपीडी ही चलती है। इन अस्पतालों में मात्र नौ डाक्टर हैं, जो रोस्टर के हिसाब से सभी अस्पतालों में जाते हैं।

राम भरोसे यूनानी अस्पताल

आयुर्वेदिक अस्पताल तो बेहाल है ही यूनानी अस्पताल की हालत उससे भी बदतर है। यूनानी अस्पताल डाक्टर के बजाय राम भरोसे चल रहे हैं। जिले में कैलाशपुर, चिलकाना, बुड्ढाखेड़ा, संसारपुर, दौराला व अंबेहटापीर में यूनानी अस्पताल हैं, लेकिन यहां एक भी डाक्टर तैनात नहीं हैं।

मैं तो सरकारी अस्पताल में ही करवाता हूं इलाज : एसडीएम नकुड़

आइएएस अमित आसेही इन दिनों एसडीएम नकुड़ की जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। पूछने पर बोले कि हाईकोर्ट ने अब ऐसा आदेश दिया है, लेकिन मैं शुरू से ही सरकारी अस्पताल में ही अपना व परिवार का इलाज करवाता रहा हूं।

सरकारी अस्पताल से बेहतर इलाज कहीं नहीं: एसडीएम रामपुर

एसडीएम रामपुर मनिहारान राकेश गुप्ता ने बताया कि वे शुरू से ही सरकारी अस्पताल में ही अपना व परिवार का उपचार करवाते आए हैं। उनका मानना है कि यदि सरकारी अस्पताल में अफसर इलाज के लिए पहुंचेंगे तो व्यवस्था अपने आप दुरुस्त हो जाएगी।

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