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विनय कटियार को बीजेपी ने कहा ‘राम-राम’, आखिरी सूची में भी नाम नहीं!


🗒 सोमवार, मार्च 12 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

पार्टी के फायर ब्रांड नेता और कभी राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा रहे विनय कटियार को बीजेपी ने ‘राम-राम’ कह दिया है.

विनय कटियार को बीजेपी ने कहा ‘राम-राम’, आखिरी सूची में भी नाम नहीं!

दरअसल राज्यसभा में विनय कटियार का कार्यकाल खत्म हो रहा है और बीजेपी ने उन्हें दोबारा प्रत्याशी नहीं बनाया है. रविवार को अलग-अलग प्रदेशों के लिए जारी आखिरी सूची में विनय कटियार का नाम शामिल नहीं है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि पार्टी ने उन्हें ‘राम-राम’ कह दिया है.
हालांकि विनय कटियार को दोबारा प्रत्याशी नहीं बनाए जाने पर पार्टी की तरफ से कोई प्रातक्रिया सामने नहीं आई है. कहा जा रहा है कि पार्टी उन्हें लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है और कटियार को 2019 में लोकसभा का चुनाव भी लड़ाया जा सकता है.
 लिस्ट में नाम नहीं होने पर मैं कुछ नहीं कह सकता. वैसे तीन बार लोकसभा और दो बार राज्य सभा का सांसद रह चुका हूं. पांच बार सांसद रहा हूं. अब पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी उसे देखेंगे."
वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव लड़ने पर कटियार ने कहा, " अब जो पार्टी का आदेश होगा, उसका पालन होगा. वैसे राजनीति में सिर्फ काम किया जाता है."विनय कटियार फैजाबाद लोकसभा सीट से तीन बार सांसद रह चुके हैं. वे 1991, 1996 और 1999 में लोकसभा के लिए चुने गए थे. वे वर्तमान में राज्यसभा के सांसद हैं और उनका कार्यकाल 23 मार्च को ख़त्म हो रहा है.
राम मंदिर आंदोलन में निभाई थी अह्म भूमिका
बजरंग दल के संस्थापक सदस्य और अध्यक्ष विनय कटियार बाबरी विध्वंस मामले में आरोपी हैं. राम मंदिर आंदोलन में अह्म भूमिका निभाने वाले कटियार पर 1992 में विवादित ढांचे को गिराए जाने से पहले भड़काऊ भाषण देने का भी आरोप है. उस समय कटियार फैजाबाद से बीजेपी के लोकसभा सांसद थे. फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. इस मामले में लालकृष्ण आडवानी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती भी सहआरोपी हैं.
विवादित बयानों से रहा है पुराना नाता
हाल ही में देश के मुसलामानों को लेकर कटियार ने विवादित बयान दिया था. कटियार ने कहा था, “ मुसलमानों को भारत में नहीं रहना चाहिए. उन्होंने जनसंख्या के आधार पर देश का विभाजन किया था. लिहाजा उन्हें भारत में रहने की क्या जरुरत है? उन्हें जमीन दी गई थी.उन्हें बांग्लादेश या पाकिस्तान चले जाना चाहिए."
कटियार अपने विवादित बयानों को लेकर हमेशा सुर्ख़ियों में रहने वाले कटियार कई बार पार्टी को मुश्किल में डाल चुके हैं. इतना ही नहीं, कई बार पार्टी को उनके विवादित बयानों के लिए फजीहत का भी सामना करना पड़ गया.
एबीवीपी से की थी राजनीतिक सफ़र की शुरूआत
विनय कटियार ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1970 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन सचिव के तौर पर की थी. 1980 में वे आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक बने. 1982 में उन्होंने हिंदू जागरण मंच की स्थापना की. 1984 में वे बजरंग दल के संस्थापक सदस्य बने.  राम मंदिर आन्दोलन को धार देने के लिए उन्हें यूपी बीजेपी का अध्यक्ष भी बनाया गया. वे 2002 से 2004 तक यूपी बीजेपी अध्यक्ष रहे. बाद में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव भी नियुक्त किया गया.

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