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लखनऊ मे निजी अस्पताल ने वसूले 10 लाख, केजीएमयू ने बचाई जान


🗒 बुधवार, फरवरी 28 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

निजी अस्पताल के डॉक्टर महिला की जान से खेल गए। आरोप है कि वृद्धा के अस्वस्थ्य होने पर भी डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर डाला। ऐसे में वृद्धा ओटी से सीधे आइसीयू में पहुंच गई।

लखनऊ मे निजी अस्पताल ने वसूले 10 लाख, केजीएमयू ने बचाई जान

हालत गंभीर होने पर स्वास्थ्य मंत्रालय की सिफारिश पर मरीज को केजीएमयू में शिफ्ट किया गया। करीब 21 दिन तक वेंटीलेटर पर रही महिला को यहां के डॉक्टरों ने मौत के मुंह से निकाल लिया।

चंदर नगर निवासी कांतारानी (68) हार्ट की रोगी थीं। उनकी एंजियो प्लास्टी हुई थी। ढलती उम्र में उनके घुटने जवाब दे गए। ऐसे में बेटी योग्यिता व शिल्पा ने मां कातारानी का घुटना प्रत्यारोपण कराने का फैसला किया। उन्होंने आलमनगर के एक निजी अस्पताल में 21 जनवरी को भर्ती कराया। पहले ऑपरेशन के स्वास्थ्य परीक्षण में वह फिट साबित हुई। ऐसे में 23 जनवरी को बाएं घुटने का प्रत्यारोपण कर दिया गया। इसके बाद उन्हें बुखार, सांस लेने में तकलीफ, खांसी व यूरिन में ब्लड आने लगा। बेटी योग्यिता के मुताबिक ऐसे में 29 जनवरी की सुबह पहले डॉक्टरों ने ऑपरेशन टाल दिया, लेकिन ठीक 10 मिनट बाद आकर डॉक्टर ने ऑपरेशन करने का फैसला किया।

योग्यिता के मुताबिक दूसरे घुटने के ऑपरेशन के लिए मां कांतारानी पूरी तरह फिट नहीं थीं। बावजूद डॉक्टरों ने पैसे के लालच में ऑपरेशन कर डाला। ऐसे में ओटी में हुए ऑपरेशन के बाद मां कांतारानी को सीधे आइसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद चार फरवरी को वेंटीलेटर पर होने की जानकारी दी गई। इस बीच परिजनों को आइसीयू में जाने की इंट्री नहीं दी गई। कांतारानी का क्या इलाज चला, क्या नहीं, इसकी चिकित्सक कोई जानकारी नहीं दे रहे थे। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव से संपर्क कर केजीएमयू में 11 फरवरी को कांतारानी को भर्ती कराया। तब तक करीब 10 लाख रुपये वसूल लिए गए थे। वहीं करीब पौने दो लाख और देने के लिए अस्पताल से कॉल आ रही है।

कांतारानी को ट्रामा सेंटर के पल्मोनरी क्रिटिकल केयर मेडिसिन यूनिट में भर्ती किया गया। यहां डॉ. वेद प्रकाश व डॉ. अजय, डॉ. अभिजीत ने इलाज शुरू किया। जांच में निजी अस्पताल में लापरवाही से हुए सक्शन से महिला के लंग (फेफड़ा) में हेमरेज हो गया था। इससे ट्रैकिया व ब्रांकस में रक्त चला गया था। यहां की टीम ने फिर सक्शन कर जमा रक्त निकाला। वहीं डॉ. वेद के मुताबिक मरीज को वेंटीलेटर एसोसिएटेड निमोनिया (वैप) से रेस्परेटरी, किडनी फेल्योर की चपेट में आ गई थी। वहीं हार्ट भी कम काम कर रहा था। मल्टी आर्गन फेल्योर से 18 फरवरी तक वेंटीलेटर पर इलाज चला। एंटी बायोटिक की हाई डोज चली। संक्रमण में काबू होने पर 24 फरवरी को मरीज डिस्चार्ज किया गया।

कांतारानी की बेटी योग्यिता यूएसए में रहती हैं। उन्होंने कहा कि मुझे भ्रम था कि निजी अस्पताल के डॉक्टर सरकारी चिकित्सकों से अच्छे हैं। पैसा होने की वजह से मैंने निजी अस्पताल में ऑपरेशन का फैसला किया। मगर वहां लूट के साथ-साथ जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कुछ भी पारदर्शी सिस्टम नहीं है। केजीएमयू के आरआइसीयू की सेवाएं काफी बेहतर हैं। यहां अपने मरीज को समय-समय पर देख भी सकते थे। डॉ. वेद ने मेरी मां को नई जिंदगी दे दी।

पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में फेफड़े की आधुनिक जांच शुरू हो गई। गोरखपुर निवासी रेखा जायसवाल की काफी दिन भटकने के बाद भी जांच नहीं हो सकी। उन्हें एम्स से वापस कर दिया गया। ऐसे में केजीएमयू के डॉक्टर ने उनका इंडोब्रांकियाल अल्ट्रासाउंड (ईबस) किया। यह जांच काफी जटिल होती है। इसमें अल्ट्रासाउंड का प्रोब विद कैमरा शरीर के अंदर डाला जाता है।

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