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कानपुर मे आठवीं पास शातिर ने किस तरह बैंक की आइटी सेल को धोखा देकर करोड़ों की ठगी की


🗒 शनिवार, दिसंबर 08 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

डिजिटल इमेज क्लीयरेंस सिस्टम का फायदा उठाकर आठवीं कक्षा पास आदित्य शुक्ला ने आरबीआइ से लेकर विभिन्न बैंकों के आइटी सेल व चेक का भौतिक सत्यापन करने वाले तजुर्बेदार बैंक कर्मियों तक को चकमा दे दिया। वह पांच साल में सैकड़ों क्लोन चेक तैयार कर करोड़ों रुपये का चूना खाताधारकों को लगा चुका है।

कानपुर मे आठवीं पास शातिर ने किस तरह बैंक की आइटी सेल को धोखा देकर करोड़ों की ठगी की

एटीएफ की गिरफ्तारी के बाद गिरोह के सरगना आदित्य शुक्ला ने फजलगंज थाने में बताया कि वह पिछले सात साल से चेक क्लोनिंग का काम कर रहा है। विभिन्न बैंकों के चेक क्लोन कर ड्राप बॉक्स में डाल देता था। दस में पांच से छह चेक क्लीयर हो जाती हैं। लखनऊ में एसबीआइ की हजरतगंज शाखा में ही 13 चेक लगाईं, जिसमें छह पास हो गईं। पहले चेक कई हाथों से (बैंक से लेकर क्लीयङ्क्षरग हाउस तक) गुजरने से ज्यादा पकड़ में आ जाती थी, लेकिन जब (एक अगस्त 2013) से डिजिटल इमेज क्लीयरेंस सिस्टम लागू हुआ काम ज्यादा आसान हो गया। बैंक में यदि चेक नहीं पकड़ा गया तो फिर आगे नहीं पकड़ा जाता, क्योंकि बैंक से उसकी डिजिटल कॉपी आगे फारवर्ड कर दी जाती है। जिसमें चेक का नकली व असली तय करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।सरगना आदित्य शुक्ल ने पूछताछ में बताया कि गिरोह के लोग बैंकों व डाकघर से चेकबुक डिलीवर करने वालों के संपर्क में रहते थे। गोपाल बाबू डाकिया से पैसे देकर कई बैंक के चेकबुक हासिल किए। गोविंदनगर स्थित बैंक आफ बड़ौदा कर्मी प्रेम बाजपेई से प्रयोग हुई चेकबुक लेकर खाताधारकों का डाटा तैयार करते थे। जिसके आधार पर अजय यादव से उन खातों में जमा राशि व जारी होने वाली चेकबुक की मौजूदा स्थिति पता करते थे। उसके बाद चेक पर नई चेकबुक के नंबर को प्रिंटकर बैंक के ड्राप बॉक्स में डाल खोले गए फर्जी खातों से क्लीयर करा लेते थे।चेक क्लोनिंग मामले में बैंक कर्मियों व चेकबुक डिलीवर करने वाले डाक कर्मियों व कोरियर ब्वॉय के भी शामिल होने की बात सामने आई है। जिसके बाद से यह लोग एसटीएफ के रडार पर आ गए हैं। गिरोह के सरगना की निशानदेही पर बैंक में काम करने वाले सहयोगी, कर्मी और खाता खुलवाने वाले कुछ संदिग्ध लोगों पर टीम ने नजर रखना शुरू कर दिया है।14.80 लाख रुपये नकद, एक पिस्टल, छह कारतूस, 239 पहचानपत्र, एसबीआइ के 81 व सेंट्रल बैंक के 70 चेक, एसबीआइ की 12 चेकबुक, पीएनबी की 12 चेकबुक, बैंक ऑफ बड़ौदा की नौ चेकबुक, सेंट्रल बैंक की तीन चेकबुक, यूनियन बैंक की दो चेकबुक, ओबीसी की एक, एक्सिस बैंक की दो, आइसीआइसीआइ की एक, इलाहाबाद बैंक की एक, आंध्रा बैंक की एक चेकबुक, विभिन्न बैंकों की 14 मुहरें व चेकों की खाली 37 शीट, दो स्टाम्प पैड, एक प्रिंटर, एक लैपटॉप व एक कार।

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