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कानपुर का हीरा कारोबारी उदय देसाई मुश्किल में बैंक ने कब्जे में लीं संपत्तियां


🗒 रविवार, मार्च 24 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

उत्तर प्रदेश की विख्यात औद्योगिक नगरी कानपुर का एक हीरा कारोबारी बेहद मुश्किल में हैं। कानपुर के हीरा कारोबारी उदय देसाई की कंपनी मैसर्स फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड की मुंबई की संपत्तियों को बैंक ऑफ इंडिया ने कब्जे में ले लिया है। इस कंपनी पर बैंक का 606 करोड़ रुपये से अधिक लोन बकाया है। कर्ज न चुका पाने की स्थिति में दो माह पूर्व इनके खाते एनपीए हो गए थे। एनपीए में कोठारी इंडस्ट्रीज के बाद यह कानपुर में दूसरा बड़ा मामला है।उदय देसाई ने 2003 में बैंक ऑफ इंडिया की बिरहाना रोड शाखा से 400 करोड़ रुपये का व्यवसायिक लोन लिया था। कई वर्ष तक इनके खाते दुरुस्त रहे लेकिन दो वर्ष से किस्तें नियमित तौर पर जमा नहीं हो रही थीं। इस पर इन्हें कई बार चेताया गया। इसके बाद बीच-बीच में किस्तें जमा हुईं लेकिन मई 2018 से कर्ज की रकम बिलकुल भी वापस नहीं आ रही थी। इस पर इनके खातों को एनपीए घोषित कर दिया गया था।

कानपुर का हीरा कारोबारी उदय देसाई मुश्किल में बैंक ने कब्जे में लीं संपत्तियां

एनपीए घोषित करते समय नवंबर 2018 में इन पर 606 करोड़, 17 लाख 29000 रुपये की बकायेदारी थी। खाता एनपीए घोषित करने के बाद नवंबर 2018 में बैंक की ओर से डिमांड नोटिस जारी कर कर्ज अदा करने के लिए 60 दिन की मोहलत दी गई थी लेकिन कंपनी इसमें असफल रही। इस पर बैंक ने 19 मार्च 2019 को कंपनी के मुंबई स्थित ऑफिस और पार्किंग समेत 7057 वर्ग फीट एरिया को कब्जे में ले लिया।बैंक ऑफ इंडिया का 606 करोड़ रुपये से अधिक लोन बकाया होने पर शहर के हीरा कारोबारी उदय देसाई की कंपनी मैसर्स फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड की मुंबई की संपत्तियों को बैंक ने कब्जे में ले लिया है। मुंबई में बांद्रा-कुरले कॉम्प्लेक्स स्थित सी विग बिल्डिंग-1 के सातवें खंड में इसका ऑफिस है। बैंक ने सातवें खंड समेत (यूनिट संख्या 709) बेसमेंट में इस खंड के हिस्से आईं पांच कार पार्किंगों को कब्जे में ले लिया है। बैंक की ओर से यह पूरा एरिया 7057 वर्ग फीट बताया गया है। मैसर्स फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड की शुरुआत 1995 में विकास नगर निवासी उदय देसाई ने की थी। उदय ही कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। यह कंपनी हीरा कारोबार के अलावा मिनरल्स, प्लास्टिक, केमिकल आदि की खरीद-बिक्री भी करती है।फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक उदय देसाई ने कहा कि वैश्विक मंदी के चलते कारोबार में उतार चढ़ाव आया लेकिन हिम्मत से काम करते रहे। कर्ज की अदायगी के लिए मैं निरंतर प्रयास कर रहा हूं, लेकिन बैंक मोहलत देने को तैयार नहीं। सरकार और बैंकों को कारोबारियों की परेशानी को भी समझना होगा।कानपुर की रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी के बाद उदय देसाई की कंपनी के खातों का एनपीए होना दूसरा बड़ा मामला है। इससे पहले विक्रम कोठारी के सात बैंकों के 3600 करोड़ रुपये से लोन खाते एनपीए हो गए थे। इसके बाद में सीबीआई ने इन्हें गिरफ्तार भी किया था। जीवन पर्यंत कारोबार करते हुए कभी ऐसा नहीं होने दिया कि लोन की किस्तें समय पर न दी गई हों। विक्रम कोठारी प्रकरण सामने आने के बाद अगस्त 2018 में बैंकों ने जबरन उनके खातों को एनपीए घोषित कर दिया। 

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