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डीजीपी सुलखान सिंह ने कहा आबादी के अनुरूप हो उप्र में अपराध का आकलन


🗒 सोमवार, दिसंबर 04 2017
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

 नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों में उप्र प्रदेश में अपराध दर सर्वाधिक 17.2 प्रतिशत दर्शाए जाने के बाद डीजीपी सुलखान सिंह सोमवार को पूरी तरह से प्रदेश पुलिस के पक्ष में खड़े नजर आए। डीजीपी ने कहा कि उप्र की आबादी सर्वाधिक है। लिहाजा अपराध के मामले में उप्र का आकलन आबादी को देखकर किया जाना चाहिए। एनसीआरबी अपराध दर का आकलन प्रति एक लाख आबादी के हिसाब से करता है। इस हिसाब से उप्र में अपराध की दर कई अन्य राज्यों से कम है।

डीजीपी सुलखान सिंह ने कहा आबादी के अनुरूप हो उप्र में अपराध का आकलन

डीजीपी मुख्यालय में प्रेसवार्ता में सुलखान सिंह ने कहा कि उप्र में आपराधिक मानसिकता के लोग कम हैं। पिछले दिनों प्रदेश पुलिस ने मुहर्रम से लेकर कांवड़ मेला, विभिन्न त्योहारों व निकाय चुनाव के मौके पर कानून-व्यवस्था को बनाए रखने में पुलिस ने सराहनीय काम किया है। डीजीपी ने साफ किया कि वह आंकड़ों के आधार पर अधिकारियों का मूल्यांकन करने के पक्षधर नहीं है। ऐसी स्थिति में पुलिस मुकदमा न लिखकर अपराध के आंकड़ों को कम करने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों प्रदेश में हत्या की घटनाओं की दर में कमी आई है। यह पुलिस के लिए अच्छे संकेत हैं। डीजीपी ने कहा कि उप्र में अपराध दर (128.7) संपूर्ण देश के औसत रेट (233.6) से कम है। पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते आरोपितों के दोष सिद्ध होने की दर भी अखिल भारतीय औसत 46.8 प्रतिशत के मुकाबले उप्र में 59 फीसद है।

डीजीपी ने कहा कि पुलिस संगठन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 में देश में प्रति एक लाख जनसंख्या में स्वीकृत नियतन 156 के सापेक्ष 121 पुलिसकर्मियों की उपलब्धता है। जबकि उप्र में स्वीकृत नियतन के सापेक्ष 78 पुलिसकर्मियों की ही उपलब्धता है। डीजीपी ने कहा कि दूसरी ओर देश में 20 लाख से अधिक आबादी वाले 19 महानगरों में उप्र के गाजियाबाद, कानपुर व लखनऊ शामिल हैं। आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो दिल्ली, जयपुर व अन्य महानगरों की तुलना में भी इन शहरों में क्राइम रेट कम है। 

एनसीआरबी द्वारा प्रकाशित क्राइम इन इंडिया 2016 के अनुसार देश में आइपीसी के तहत 29,75,711 मुकदमे पंजीकृत हुए। इनमें उप्र में 2,82,171 आइपीसी के अपराध हुए। देश में कुल ऐसी पंजीकृत अपराधों में उप्र में पंजीकृत अपराध का प्रतिशत 9.5 है। 

डीजीपी ने कहा कि आने वाले समय में साइबर क्राइम पर नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती है। आंकड़े देखने पर यह ट्रेंड सामने आ रहा है कि जहां आइटी इंडस्ट्री ज्यादा हैं, वहां साइबर अपराध के मामले भी ज्यादा हैं। असोम व मेघालय जैसे राज्यों में साइबर क्राइम के मामले अधिक होने के कारण अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं। उप्र में साइबर क्राइम की चुनौती से निपटने के लिए उपनिरीक्षक व उससे ऊपर के अधिकारियों को लगातार ट्रेनिंग कराई जा रही हैं। सीबीआइ एकेडमी से भी कुछ अधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिलाया गया है। जल्द प्रदेश में साइबर अपराध से निपटने के लिए करीब नौ करोड़ रुपये के और उपकरण खरीदे जाएंगे। 

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