उत्तर प्रदेश में ईवीएम को लेकर सियासी दलों में तनातनी

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उत्तर प्रदेश में ईवीएम को लेकर सियासी दलों में तनातनी


🗒 मंगलवार, दिसंबर 05 2017
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की बंपर जीत के बाद से ही ईवीएम के मतदान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी सपा-बसपा इस मसले पर हमलावर रही लेकिन, पहली बार सत्ताधारी भाजपा ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। 

उत्तर प्रदेश में ईवीएम को लेकर सियासी दलों में तनातनी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बसपा प्रमुख मायावती को ईवीएम से जीते अलीगढ़ और मेरठ के महापौर को इस्तीफा दिलवाकर चुनाव लडऩे की चुनौती दी है। हांलाकि मायावती भी पलटवार करने में पीछे नहीं रहीं। ईवीएम को लेकर सियासी दलों की तनातनी बढ़ती जा रही है।

भाजपा महापौरों के सम्मान समारोह में रविवार को मुख्यमंत्री ने कहा कि मायावती को अगर ईवीएम पर भरोसा नहीं है तो अपने महापौरों से इस्तीफा दिलवाएं तो बैलेट से चुनाव करवाने के लिए आयोग से सिफारिश कर देंगे। इसके पहले बसपा प्रमुख मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। तब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा था कि सपा-बसपा और कांग्रेस अपनी हार की हताशा को छिपाने के लिए इस तरह का दुष्प्रचार कर रहे हैं। 

भाजपा की यह दलील है कि अगर ईवीएम की विश्वसनीयता नहीं रहती तो अलीगढ़ और मेरठ में बसपा कैसे चुनाव जीतती। इसके अलावा नगर निगमों में भाजपा के सिर्फ 596 पार्षद जीते हैं लेकिन, सपा के 202, बसपा के 147, कांग्रेस के 110 और निर्दल 224 जीते हैं। चारों मिलाकर 683 हुए। इस तरह भाजपा से ज्यादा संख्या तो इन चारों की है। ऐसे में सवाल उठाना गलत है। 

भाजपा के लोग तो यह भी कह रहे हैं कि जहां मतपत्रों से चुनाव हुए वहां सपा के आठ फीसद और जहां ईवीएम से हुआ वहां 16 प्रतिशत उम्मीदवार जीते। इस पर कोई जवाब नहीं है।

बैलेट से हो मतदान तो खुलेगी भाजपा की असलियत : मायावती

योगी आदित्यनाथ की चुनौती के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने कहा भाजपा की जीत में अगर ईवीएम की भूमिका नहीं है तो बसपा की जीती हुई अलीगढ़ और मेरठ समेत सभी 16 सीटों पर बैलेट पेपर से मतदान करा लें। उन्हें अपनी पार्टी की असलियत के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथित विजन का भी पता चल जाएगा। जनता नगर पालिका और नगर पंचायत की ही तरह महापौर की सीटों पर भी भाजपा को बुरी तरह हराएगी। 

योगी की रविवार की प्रतिक्रिया पर बिफरी मायावती ने कहा कि यह चोरी और ऊपर से सीनाजोरी की बदतर मिसाल है। वास्तव में 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इवीएम के माध्यम से चुनावी धांधली करके जीत हासिल की और केंद्र व प्रदेश में बहुमत की सरकार बना ली। इन दोनों ही चुनावों में भाजपा को वैसा जनसमर्थन कतई नहीं था जैसा चुनाव परिणाम दर्शाते हैं। उन्होंने दावे के साथ कहा कि महापौर की 16 में 14 सीटें धांधली करके जीती गई हैं। 

माया ने कहा कि अलीगढ़ और मेरठ में बसपा जीती क्योंकि यहां जबर्दस्त जन उबाल था और ज्यादा गड़बड़ी करने पर चोरी साफ तौर पर पकड़े जाने की आशंका थी। इससे भाजपा की और भी ज्यादा फजीहत हो सकती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि नगर पालिका और नगर पंचायत में आखिर भाजपा क्यों पिछड़ गई। 

उन्होंने सहारनपुर, आगरा और झांसी में सरकारी मशीनरी का जबर्दस्त दुरुपयोग कर बसपा प्रत्याशी को चुनाव हराने का आरोप लगाया।

माया ने कहा कि यह तो राज्य चुनाव आयोग भी मानता है कि कई कारणों से लखनऊ के चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं रहे। इसकी जांच कराई जा रही है।

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