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यूपी में अपराधियों को एनकांउटर का खौफ, लेकिन अब भी बड़े अपराधियों से दूर है पुलिस


🗒 रविवार, फरवरी 18 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

पुलिस से नहीं क्राइम से डर लगता है साहब’। अब यह बात कई जगहों पर सुनने को मिल रही है। दरअसल, इस लाइन को यूपी पुलिस ने ट्वीट किया है। यूपी पुलिस की इस लाइन में अपराधियों का खौफ साफ तौर पर दिखाई भी दे रहा है। पुलिस का यह ट्वीट उस वक्‍त सामने आया है जब शामली जिले के कैराना में जमानत पर जेल से छूटकर आए दो बदमाश भाइयों ने एसपी से मिलकर उन्हें शपथपत्र सौंपते हुए विश्वास दिलाया कि वे दोनों अब अपराध से तौबा कर चुके हैं। यह खबर मीडिया की सुर्खियां बनी। इसके बाद पुलिस का ट्वीट यह बताने के लिए काफी है कि बीते एक वर्ष के दौरान प्रदेश में आई नई सरकार ने जो संगठित अपराध को रोकने के लिए कदम उठाए हैं वह कहीं न कहीं कारगर साबित हो रहे हैं।

यूपी में अपराधियों को एनकांउटर का खौफ, लेकिन अब भी बड़े अपराधियों से दूर है पुलिस

यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ प्रदेश में हो रहे एनकाउंटर पर खुलकर बोलते हुए भी दिखाई देते हैं। उन्‍होंने इस बात को कई बार कई मंचों से दोहराया है कि प्रदेश से या तो अपराधी भाग जाएंगे, नहीं तो खत्‍म हो जाएंगे। उनके इस बयान की एक झलक सरकार द्वारा पेश किए गए एनकाउंटर के आंकड़ों में भी दिखाई देती है। गौरतलब है कि 20 मार्च 2017 से लेकर 31 जनवरी 2018 तक प्रदेश में 1142 एनकाउंटर हुए। इनमें 38 अपराधी मारे गए, जबकि 2744 अपराधी गिरफ्तार हुए। इसके अलावा इन एनकाउंटर में 265 आम लोग भी घायल हुए और 247 पुलिसकर्मी भी थे। सीएम योगी ने एनकाउंटर के ताजा आंकड़े बताते हुए इनकी संख्‍या 1200 बताई है। उन्‍होंने साफ कर दिया है कि प्रदेश में एनकाउंटर बंद नहीं होंगे।

यूपी के नए डीजीपी ओपी सिंह ने जब 23 जनवरी को पदभार संभाला था तो उन्‍होंने भी अपराधियों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। फरवरी 2018 की ही यदि बात करें तो इसके पहले सप्‍ताह में पुलिस ने 15 एनकाउंटर के दौरान 24 अपराधियों को गिरफ्तार किया और इनामी अपराधी को मार गिराया है। यह एनकाउंटर प्रदेश के पंद्रह जिलों में किए गए थे। ये एनकाउंटर बुलंदशहर, शामली, कानपुर, सहारनपुर, लखनऊ, बागपत, मुजफ्फरनगर, गोरखपुर, हापुड़ और मेरठ में हुए थे।

एनकाउंटर का खौफ कहें या फिर सरकार की सख्‍ती इसका असर प्रदेश में दिखाई दे रहा है। कैराना में सामने आई घटना के अलावा गांव मोहम्मदपुर राई में भी इसी तरह की एक घटना सामने आई थी, जहां दो सगे भाईयों ने एसपी डॉ. अजयपाल शर्मा के पास पहुंचकर शपथपत्र दिया, जिसमें भविष्‍य में अपराध नहीं करने का विश्वास दिलाया गया था। इन अपराधियों का कहना था कि वह अब मेहनत मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का पेट पालेंगे।

हालांकि मौजूदा सरकार में हुए एनकाउंटर और उनकी सफलताओं से प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह इत्‍तेफाक नहीं रखते हैं। उनका सीधा कहना है कि जिन एनकाउंटर पर सरकार अपनी पीठ थप-थपा रही है दरअसल उनमें से वो बड़े नाम गायब हैं, जिनका एनकाउंटर बेहद जरूरी है। दैनिक जागरण से बात करते हुए उन्‍होंने कहा कि एक बड़े अपराधी का मारा जाना किसी भी इलाके में अपराध और अपराधियों के मनसूबों पर पानी फेरने में बड़ी भूमिका निभाता है। लेकिन मौजूदा समय में जिन अपराधियों के एनकाउंटर में मारे जाने की बात कर पीठ थपथपाई जा रही है, वह नाकाफी है। उन्‍होंने यह भी माना है कि सरकार की दिशा बिल्‍कुल सही है और इच्‍छाशक्ति भी सामने दिखाई दे रही है। लेकिन अभी काफी काम करने की जरूरत है।

पूर्व डीजीपी का कहना था कि सरकार को चाहिए कि अपने इंटेलिजेंस को सक्रिय करे और बड़े व संगठित अपराध करने वालों का कच्‍चा चिटठा निकाले और उनको खत्‍म करे। रातों रात आम का बाग लगाकर आम खाना हकीकत नहीं बन सकता है। हां इतना जरूर हो सकता है कि रातों रात बाग से खरपतवार को निकाल दिया जाए। लिहाजा सरकार जिन एनकाउंटर की बात करती है वह खरपतवार ही हैं, जिनसे बहुत ज्‍यादा फायदा नहीं होने वाला है। विक्रम सिंह मानते हैं कि पुलिस पर सरकार का कोई दबाव नहीं है, लेकिन बड़े अपराधियों को निशाना बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की जरूरत है। वह यह भी कहते हैं कि 2007 में ददुआ के बाद से किसी बड़े अपराधी का एनकाउंटर नहीं हुआ है। ये बेहद अफसोस की बात है। उन्‍होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में प्रदेश के हर जिले में खनन माफिया, पैसा लेकर लोगों की जान लेने वाले शार्प शूटर, जबरन पैसा उगाही वाले अपराधी मौजूद हैं। ऐसे में एनकाउंटर पर पीठ थपथपाना सही नहीं है।

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