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उत्तर प्रदेश सरकार के लिए सभी सवालों का जवाब बनी कर्जमाफी


🗒 मंगलवार, मार्च 13 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

सत्ता में आने से पहले ही भाजपा ने यह तय कर दिया था कि उसके एजेंडे में अन्नदाता यानी किसान होंगे लेकिन इसके साथ ही यक्ष प्रश्न भी था कि क्या कर्ज माफी का कड़वा घूंट सरकार के गले से उतरेगा। सरकार ने न सिर्फ यह कड़वा घूंट पिया बल्कि कई अन्य योजनाओं से भी गांव-गिरांव तक जमीन मजबूत करने में सफल हुई।

उत्तर प्रदेश सरकार के लिए सभी सवालों का जवाब बनी कर्जमाफी

यह फैसला विपक्ष के सभी सवालों पर जवाबी हथियार के रूप में भी सामने आया। यूपी इन्वेस्टर्स समिट में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में सर्वाधिक निवेश की संभावनाओं ने भी यह संकेत दिए कि किसानों के लिए संभावनाओं के द्वार खुलने वाले हैं।

कैबिनेट की पहली बैठक में ही सरकार ने प्रदेश के सभी लघु-सीमांत किसानों के एक लाख कर्जे माफ करने के साथ ही बजट में अपने संसाधनों से 36 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की। हालांकि इसका दबाव अन्य योजनाओं पर पड़ा लेकिन सरकार ने इसकी परवाह न की। यह फैसला सरकार की मजबूत मनोदशा का परिचायक था। अब तक 36 लाख से अधिक किसानों के 22 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कर्जे माफ किये जा चुके हैं। कर्जमाफी के बाद से तो अन्नदाता पर मेहरबानी का सिलसिला ही चल पड़ा। सरकार बनने के साथ ही पहली चुनौती रिकार्ड उत्पादन के नाते आलू के दामों में मंदी के रूप में आई। सरकार इसके लिए आगे आई। पहली बार प्रदेश में बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर आलू की खरीद हुई। यह योजना बढ़े हुए एमएसपी के साथ इस साल भी लागू है।

अपने पहले साल में सरकार ने किसानों की बुनियादी जरूरतों को समझा। यह सिंचाई और बिजली की उपलब्धता से जुड़ी हुई थीं। सिंचाई में दक्ष विधाओं के उपयोग की अहमियत समझी गई और ड्रिप इरीगेशनपर पहली बार 90 फीसद अनुदान दिया गया। 20 हजार सोलर पंप के लिए भी अनुदान दिया गया। अब सिंचन क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार किसानों को निश्शुल्क इनर्जी इफीशिएंट पंप देने जा रही है। वर्ष 2022 तक प्रदेश के सभी करीब 11 लाख निजी नलकूपों के दस साल पुराने पंपों को बदलने का लक्ष्य रखा गया है। उर्वरकों के संतुलित प्रयोग के जरिये खेतीबाड़ी की लागत घटाने के लिए मृदा परीक्षण पर भी खासा जोर है। बुंदेलखंड में खेत-तालाब योजना के नतीजों से भी सरकार उत्साहित है।

खरीद का एक से अधिक विकल्प, बाजार का प्रतियोगी होना और उपज के प्रसंस्करण के बिना खेतीबाड़ी स्थायी रूप से लाभ का धंधा नहीं बन सकती, इसे मुख्यमंत्री ने समझा और मंडी अधिनियम में सुधार किए गए। निजी क्षेत्र के लिए मंडियां स्थापित करने का रास्ता खोला गया है, जिससे किसानों को बाजार के अन्य विकल्प हासिल होंगे। 

प्रसंस्करण पर फोकस

किसानों की आय बढ़ाने और उपज की ग्रेडिंग, पैकिंग, लोडिंग-अनलोडिंग और ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में रोजगार मुहैया कराने का सबसे प्रभावी जरिया प्रसंस्करण ही है। प्रदेश सरकार का इस पर सर्वाधिक फोकस है। इन्वेस्टर्स समिट नामी-गिरामी कंपनियों ने मेगा फूडपार्क से लेकर अनाज के आधुनिक भंडारण में निवेश की रुचि दिखायी है। इससे किसानों की हालत में बड़ा सुधार आएगा।

आंकड़े चमकदार पर बहुत कुछ होना बाकी

खेतीबाड़ी के क्षेत्र में सरकार के पास चमकदार आंकड़े हैं। गेहूं, धान, गन्ना और आलू के रिकार्ड उत्पादन को कई मंचों पर दोहराया जा चुका है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर इनकी खरीद और भुगतान के आंकड़े भी चमकदार हैं। बावजूद इसके वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है। मसलन 20 जिलों में नये कृषि विज्ञान केंद्र खोले जाने थे लेकिन सरकार एक का भी शिलान्यास नहीं करा सकी। छुट्टïा पशुओं की समस्या का भी स्थायी निस्तारण नहीं किया जा सका।

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