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राजधानी लखनऊ मे राज्यकर्मियों व शिक्षकों ने रैली निकाल दी हड़ताल की चेतावनी


🗒 बुधवार, मई 16 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

 डेढ़ साल पहले सपा सरकार में किए गए वादे पूरे न होने और पिछले एक साल में भाजपा सरकार के साथ एक भी बैठक न हो पाने के विरोध में राज्य कर्मचारी और शिक्षक बुधवार को चिलचिलाती धूप में सड़कों पर उतर आए। प्रदेश के सभी जिलों में उन्होंने बाइक रैली निकाल कर हुंकार भरी। राजधानी में राज्य सरकार के सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और सभी जिलों में जिलाधिकारियों के जरिये मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर निर्णयों पर अमल कराने की मांग की।

राजधानी लखनऊ मे राज्यकर्मियों व शिक्षकों ने रैली निकाल दी हड़ताल की चेतावनी

कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वीपी मिश्र व संयोजक सतीश कुमार पांडेय ने बताया कि 18 सूत्री मांगों पर 19 सितंबर, 2016 को तत्कालीन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कई मांगों पर निर्णय लिए गए थे, लेकिन इन निर्णयों को लागू नहीं किया गया। मोर्चा पदाधिकारियों ने कहा कि मांगों के समर्थन में कर्मचारी व शिक्षक सात व आठ जून को दो दिन का कार्य बहिष्कार करेंगे। इस पर भी शासनादेश जारी न किए गए तो अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी जाएगी।

पदाधिकारियों ने कहा कि बीते एक साल में मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव से कई बार आग्रह करने के बावजूद एक भी बैठक नहीं हुई, जिसकी वजह से सभी मांगें लंबित पड़ी हैं।कर्मचारी नेताओं ने कहा कि मांगों पर सुनवाई न होने के कारण प्रत्येक कर्मचारी को प्रतिमाह कम से कम दो हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। लखनऊ में कर्मचारियों की बाइक रैली जवाहर भवन से एनेक्सी होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। रैली में कर्मचारियों के शामिल होने से सरकारी सेवाएं भी प्रभावित हुईं।

कर्मचारियों के मुताबिक इससे अस्पतालों में दवा वितरण, नर्सिंग, ब्लड बैंक व पैथोलॉजी सहित अन्य सेवाएं बाधित रहीं, जबकि निजी चीनी मिलों के सर्वेक्षण सहित वन विभाग, जवाहर भवन, इंदिरा भवन, लोक निर्माण विभाग, विकास भवन, समाज कल्याण, विकास प्राधिकरण व नगर निगम सहित विभिन्न मुख्यालयों पर दिन भर रैली के कारण कार्य बाधित रहा।राज्य कर्मचारियों व शिक्षकों ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, वेतन समिति की संस्तुतियां लागू करने, सातवें वेतनमान का एरियर देने, निगम कर्मचारियों को केंद्र की तरह वेतन व भत्ते देने, उनके एरियर का भुगतान करने, परिवहन निगम में एक जनवरी 2016 से सातवां वेतनमान लागू करने, तदर्थ शिक्षकों को विनियमित कर शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पर 300 दिन का अवकाश नकदीकरण देने, प्राधिकरण कर्मियों को राज्य कर्मचारियों की तरह 10 साल पर पेंशन देने व रिक्त पदों पर भर्ती व पदोन्नति करने सहित अन्य मांगें रखी हैैं।  

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