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उत्तर प्रदेश को मॉडल बनाने की पहल, लखनऊ में तीन मौतें


🗒 शुक्रवार, जून 08 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

 योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) व एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के उपचार में मॉडल विकसित किए गए हैं। पिछले कुछ वर्षों और खास तौर पर बीते एक साल में जेई-एईएस से होने वाली मौतों में पूर्वांचल के जिलों में गिरावट आई है। बीमारी को लेकर बढ़ी जागरूकता ने प्रकोप कम किया है। इस बीच राजधानी लखनऊ में भी बड़ी संख्या में जेई-एईएस मरीजों के होने की पुष्टि हुई है जबकि तीन की मौत होने की खबर है।

उत्तर प्रदेश को मॉडल बनाने की पहल, लखनऊ में तीन मौतें

एकीकृत रोग निवारण कार्यक्रम के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ.विकासेंदु अग्रवाल बताते हैं कि कुछ ही समय में प्रदेश ब्लॉक लेवल पर मिनी पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (पीकू) वाला देश का पहला राज्य हो जाएगा, जबकि टाटा ट्रस्ट के सहयोग से वैन में मोबाइल अस्पताल संचालित कराते हुए गोरखपुर के पिपराइच ब्लॉक और सिद्धार्थनगर के उसका बाजार ब्लॉक को भी जेई-एईएस उपचार के लिए मॉडल के तौर पर विकसित किया जा रहा है। मिनी पीकू में तीन-तीन वेंटीलेटर होंगे, जो स्थानीय स्तर पर ही सक्षम उपचार कर सकेंगे।

डॉ.अग्रवाल ने बताया कि अगले कुछ महीनों में जेई-एईस के उपचार में कुछ और बड़े बदलाव होने वाले हैैं। एक ओर बस्ती व गोरखपुर मंडल के सात जिलों में स्थित पीकू में 10 वेंटीलेंटर की संख्या अगले महीने तक बढ़ाकर 15 कर दी जाएगी, वहीं छह अन्य जिलों में नए पीकू भी शुरू कर दिए जाएंगे। गोंडा, सीतापुर, रायबरेली, आजमगढ़, मऊ व हरदोई में यह केंद्र अगले महीने तक बन कर तैयार हो जाएंगे। इन सभी नए पीकू में पांच-पांच वेंटीलेटर और दो-दो बाल रोग विशेषज्ञ के साथ नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहेगा। पुराने पीकू के विस्तार और नए के संचालन के लिए 22 बाल रोग विशेषज्ञ चाहिए, जिसमें से 21 का बिडिंग के जरिये चयन हो चुका है।

राजधानी में एईएस-जेई का जानलेवा हमला जारी है। एईएस से यहां दो मरीजों की जान जा चुकी है, वहीं जेई से एक मरीज को मौत के मुंह में जा चुका है। सीएमओ कार्यालय की अपडेट रिपोर्ट में कहा गया है कि एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) व जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) का प्रकोप बढ़ रहा है। जनवरी से अब तक शहर में 116 लोगों में एईएस की पुष्टि हो चुकी है। पांच लोगों में जेई कंफर्म है। इसमें से तीन लोगों की इंसेफ्लाइटिस से मौत हो चुकी है। इसमें दो लोग एईएस, जबकि एक व्यक्ति जेई से मरा है। सीएमओ कार्यालय में मरीजों का डेथ ऑडिट ही नहीं किया गया। यहां तक रूटीन रिपोर्टिंग में भी मौतों पर चुप्पी रही। चार जून को एईएस से हुई आशुतोष की मौत का मामला आया। 

अफसरों की हीलाहवाली से बीमारी शहर से लेकर गांव तक फैल गई है। एईएस की चपेट में आकर जान गंवाने वाला शिवम (11) गोसाईगंज का निवासी है। वहीं मलिहाबाद निवासी सुरेंद्र प्रकाश (55) की जेई से मौत हुई है। इसके अलावा चार जून को एईएस से कंचनपुर मटियारी निवासी आशुतोष की मौत हो चुकी है। 

संचारी रोग विभाग के आंकड़ों में जनवरी 2018 से एक जून तक एईएस की चपेट में लखनऊ के 116 मरीज आ चुके हैं। वहीं वर्ष 2017 में जनवरी से एक जून तक इन मरीजों की संख्या सिर्फ छह थी। ऐसे ही वर्ष 2017 में जून तक सिर्फ एक मरीज में जेई की पुष्टि हुई थी। वहीं इस बार राजधानी में पांच लोग चपेट में आ चुके हैं। विशेषज्ञों की मानें अफसरों ने इस बार बीमारी से निपटने के लिए माइक्रो प्लान के तहत फील्ड वर्क नहीं किया। ऐसे में बीमारी बेकाबू हो रही है। प्रवक्ता सीएमओ कार्यालय डॉ. एसके सक्सेना ने बताया कि जनपद में इस वर्ष दो एईएस व जेई से एक मरीज की मौत हुई है। कोई रिपोर्ट छुपाई नहीं जाएगी। केस आने पर तुंरत आंकड़ा अपडेट किया जाएगा। इसको लेकर कंट्रोल रूप के स्टाफ को निर्देश दे दिए गए हैं।

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