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अब लविप्रा नहीं मानेगा पूर्व उपाध्यक्ष के बेटे की पॉवर ऑफ अटार्नी


🗒 मंगलवार, जून 12 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

एलडीए के पूर्व उपाध्यक्ष और वर्तमान में अपर मुख्य सचिव ललित कुमार वर्मा के बेटे विनायक वर्मा को दो प्लाटों की पॉवर ऑफ अटार्नी के मामले में करारा झटका लगा है। प्राधिकरण ने इन दोनों प्लाटों में संदिग्ध आवंटन को देखते हुए विनायक वर्मा को प्लाटों की पॉवर ऑफ अटार्नी को वैध मानने इन्कार कर दिया है। प्राधिकरण की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि जिनके नाम ये प्लाट हैं, केवल वही इन पर हक जता सकते हैं। वे सामने आएं।

अब लविप्रा नहीं मानेगा पूर्व उपाध्यक्ष के बेटे की पॉवर ऑफ अटार्नी

बाकी किसी की पॉवर ऑफ अटार्नी नहीं मानी जा सकती है। जनवरी में विपुलखंड में चार प्लाटों की क्लोनिंग किये जाने का मामला खुला था। इसके बाद में इनमें से दो प्लाटों पर प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष और वर्तमान में अपर मुख्य सचिव ललित कुमार वर्मा के पुत्र विनायक वर्मा ने दावा ठोका था। ये प्लाट नंबर 3-178 और 3-181 हैं। 3-178 दुर्गा प्रसाद और 3-181 अमिता को आवंटित है। विनायक वर्मा ने दावा किया था कि दोनों भूखंड के आवंटियों ने उनको पॉवर ऑफ अटार्नी दी हुई है। विनायक वर्मा के इस मामले में आने के बाद प्राधिकरण ने प्रकरण की जाच शुरू करवाई थी। जाच फरवरी में एलडीए के विशेष कार्याधिकारी राजीव कुमार को सौंपी गई। इस संबंध में कुछ समय पहले राजीव कुमार ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट उपाध्यक्ष प्रभु एन सिंह को सौंप दी।

इस गोपनीय रिपोर्ट के मुताबिक राजीव कुमार ने इस संबंध में दोनों भूखंड के दर्ज आवंटियों को समय समय पर बुलवाया। कई बार टालमटोल करने के बाद दोनों भूखंड के आवंटियों के तौर पर जो व्यक्ति प्राधिकरण में उपस्थित हुए, उनमें से दोनों की पहचान संदिग्ध मानी गई। कोई खुद को आवंटी बताने के बावजूद पूर्व में किये गये दस्तख्त नहीं कर पा रहा था तो किसी की तस्वीर पहले चस्पा की फोटो से मेल नहीं खाती नजर आ रही थी। किसी का दर्ज पता ही गलत था। जिस पर पत्रचार करने पर पत्र वापस आ रहे थे। यही नहीं कई बार पत्रचार आवंटी से किया गया और उसका जवाब विनायक ने दिया। सारे तथ्यों को ध्यान में रखते हुए राजीव कुमार ने जाच रिपोर्ट उपाध्यक्ष प्रभु एन सिंह को सौंपी। रिपोर्ट में उन्होंने दोनों ही प्रस्तुत हुए कथित आवंटियों को संदिग्ध माना। उनके दस्तावेजों व बयानों में अनेक विरोधाभास थे। इसलिए आवंटन पूरी तरह से संदिग्ध है। क्या कहना है लविप्रा उपाध्यक्ष का?

लविप्रा उपाध्यक्ष प्रभु एन सिंह का कहना है कि राजीव कुमार की इस रिपोर्ट के अनुसार विनायक वर्मा की पॉवर ऑफ अटार्नी वैद्य नहीं है। इन दोनों प्लाटों के दर्ज आवंटियों को हम वैध मानते हैं। इस संबंध में पॉवर अटार्नी को मानना उचित नहीं है।

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