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अब नार्मल डिलीवरी के लिए गर्भवती को मिलेगी लेबर रूम में अपनों को साथ ले जाने की सुविधा


🗒 गुरुवार, जून 21 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

कहा जाता है कि बच्चे को जन्म देने के बाद नारी का दूसरा जन्म होता है। डिलीवरी के समय गर्भवतियों को असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर लेबर रूम में उनके साथ अपने लोग मौजूद रहें तो यह पीड़ा आधी हो जाती है। विदेश की तर्ज पर प्रदेश के महिला अस्पतालों में भी गर्भवतियों को डिलीवरी के समय महिला बर्थ कम्पेनियन को अपने साथ ले जाने की सुविधा मिलेगी। विशेषज्ञों का दावा है कि इस तरह की सुविधा शुरू होने से नार्मल डिलीवरी को भी बढ़ावा मिलेगा। 

अब नार्मल डिलीवरी के लिए गर्भवती को मिलेगी लेबर रूम में अपनों को साथ ले जाने की सुविधा

एनएचएम की ओर से इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी को बढ़ावा देने के लिए बर्थ कम्पेनियन की शुरुआत की जा रही है। इसमें गर्भवतियों को लेबर रूम में सौहाद्र्रपूर्ण व्यवहार देने के लिए उनके साथ एक महिला रिश्तेदार को अंदर जाने की अनुमति दी जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि महिला रिश्तेदार शादीशुदा हो और उसका बच्चा भी हो। वहीं अगर किसी गर्भवती के साथ कोई भी महिला रिश्तेदार न हो तो ऐसी स्थिति में महिला का पति भी लेबर रूम में जा सकता है। 

क्वीन मेरी अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ प्रो.रेखा सचान ने बताया कि बर्थ कम्पेनियन एक पुराना कांसेप्ट है जो अमेरिका में काफी समय से चल रहा है। प्रसव के समय लेबर रूम में किसी महिला अटेंडेंट के रहने से गर्भवतियों को काफी भावनात्मक सहारा मिलता है। रिश्तेदार के साथ एक अच्छा तालमेल होता है। वहीं नॉर्मल डिलीवरी में जब दर्द उठता है तो ऐसे में घर का कोई रिश्तेदार अगर महिला को हिम्मत दे तो उसे काफी सहारा मिलता है।

डब्ल्यूएचओ ने की 2002 में शुरुआत

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 2002 में ही बर्थ कम्पेनियन को मातृ एवं शिशु के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए बहुत जरूरी माना था।

क्वीन मेरी अस्पताल में है सुविधा

राजधानी के लास्ट रेफरल सेंटर क्वीन मेरी अस्पताल में बर्थ कम्पेनियन की सुविधा वीआइपी लेबर रूम थ्री में है।

जारी की गई सूचना

एसीएमओ डॉ. अजय राजा ने बताया कि बर्थ कम्पेनियन का शासनादेश सारे जिला अस्पताल और सीएचसी और बाल महिला चिकित्सालयों में जारी कर दिया गया है। 

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