राजधानी स्थित बलरामपुर अस्पताल में 25 दिन तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद युवक को मिली नई जिंदगी

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राजधानी स्थित बलरामपुर अस्पताल में 25 दिन तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद युवक को मिली नई जिंदगी


🗒 गुरुवार, जुलाई 19 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

राजधानी स्थित बलरामपुर अस्पताल में एक 30 वर्षीय युवक को नई जिंदगी दी गई। दुर्घटना का शिकार हुए युवक की टूटी छह पसलिया, सिर में चोट व कोहनी की हड्डी में दस टुकड़े हो गए थे। केजीएमयू में समय से इलाज न मिलने पर उसे बलरामपुर लाया गया। डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन कर मरीज की जान बचा ली।

 राजधानी स्थित बलरामपुर अस्पताल में 25 दिन तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद युवक को मिली नई जिंदगी

ये है पूरा मामला: निदेशक डॉ. राजीव लोचन के मुताबिक, सचिवालय में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर विमल सिंह (30) एक जून को हादसे का शिकार हो गए थे। इस दौरान उनकी छह पसलिया टूट गईं। साथ ही सिर में चोट व कोहनी की हड्डी में दस टुकड़े हो गए थे। परिजनों ने मरीज को केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया। जहा पर पाच दिन भर्ती रहा। मगर इलाज से संतुष्ट न होने पर परिजनों ने बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया। यहा डॉक्टरों ने मरीज की जाच की। इसमें पसली टूटने से अंदरूनी चोट की भी पुष्टि हुई। इससे फेफड़े में कुछ जगह रक्त का थक्का भी जमा पाया गया। ऐसे में डॉक्टरों ने जमे रक्त को बाहर निकाला। साथ ही हाईग्रेड फीवर को कंट्रोल करने के लिए एंटीबॉयोटिक दवाओं की डोज दी। डॉक्टरों ने छह दिन तक दवाओं का कोर्स चलाया। इसके बाद डॉ.ऋषि सक्सेना व अन्य डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन कर मरीज को जिंदगी दी। अस्पताल में करीब 25 दिन तक मरीज का इलाज चला। ये है पूरा मामला: निदेशक डॉ. राजीव लोचन के मुताबिक, सचिवालय में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर विमल सिंह (30) एक जून को हादसे का शिकार हो गए थे। इस दौरान उनकी छह पसलिया टूट गईं। साथ ही सिर में चोट व कोहनी की हड्डी में दस टुकड़े हो गए थे। परिजनों ने मरीज को केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया। जहा पर पाच दिन भर्ती रहा। मगर इलाज से संतुष्ट न होने पर परिजनों ने बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया। यहा डॉक्टरों ने मरीज की जाच की। इसमें पसली टूटने से अंदरूनी चोट की भी पुष्टि हुई। इससे फेफड़े में कुछ जगह रक्त का थक्का भी जमा पाया गया। ऐसे में डॉक्टरों ने जमे रक्त को बाहर निकाला। साथ ही हाईग्रेड फीवर को कंट्रोल करने के लिए एंटीबॉयोटिक दवाओं की डोज दी। डॉक्टरों ने छह दिन तक दवाओं का कोर्स चलाया। इसके बाद डॉ.ऋषि सक्सेना व अन्य डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन कर मरीज को जिंदगी दी। अस्पताल में करीब 25 दिन तक मरीज का इलाज चला।

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