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अब जिंदगी से प्यार करना सिखाएगा 'इमोशनल मैनेजमेंट'


🗒 शुक्रवार, जुलाई 20 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

खुद को खत्म करने का विचार कोई बीमारी नहीं बल्कि आवेश है। यह वो भाव है जो स्वस्थ व्यक्ति के मन में भी आ सकता है। केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग की रिसर्च में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। रिसर्च में पता चला कि आत्महत्या का प्रयास करने वालों में लगभग 60 से 70 फीसद लोग मानसिक रूप से स्वस्थ थे। परिस्थितियों को न संभाल पाने, क्षणिक आवेश में आकर या चीजों को सही तरीके से नहीं समझने की वजह से उन्होंने यह कदम उठाए। जिसके बाद आत्महत्या का प्रयास करने वाले लोगों को केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग में काउंसिलिंग और इमोशनल और एंगर मैनेजमेंट के जरिये जीवन का नया तरीका सिखाया जा रहा है। 

अब जिंदगी से प्यार करना सिखाएगा 'इमोशनल मैनेजमेंट'

केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर आदर्श त्रिपाठी और प्रो.अनिल निश्चल की ओर से ट्रामा सेंटर में आने वाले आत्महत्या के केसों पर स्टडी की गई। सेंटर में वर्ष 2017 में करीब 60 सुसाइड अटेंप्ट के मामलों पर रिसर्च की गई। इन मरीजों को डिस्चार्ज के बाद मानसिक रोग विभाग में काउंसिलिंग के लिए भेजा गया तो पता चला कि आत्महत्या करने वाले या प्रयास करने वाले 60 से 70 फीसद लोग मानसिक रूप से स्वस्थ थे।

आत्महत्या जैसे विचार आने पर कभी भी यह नहीं सोचना चाहिए कि वो उसे किस तरह से अपने दोस्त या नजदीकी को बताएं। आत्महत्या के विचार आना काफी क्षणिक होता है, इसे बात करके या माइंड डायवर्ट करके बदला जा सकता है। नजदीकी लोगों की बनाएं फेहरिस्त:

ज्यादा गुस्सा या इमोशनली कमजोर लोगों को अपने नजदीकी और समझने वाले लोगों की एक लिस्ट तैयार करनी चाहिए, जिससे वो आत्महत्या जैसे विचार आने पर बात कर सकें। महिलाओं में आत्महत्या के मामले ज्यादा :

डॉ.आदर्श ने बताया कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में आत्महत्या के विचार और प्रयास ज्यादा होते हैं। इसका प्रमुख कारण है कि वे पुरुषों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होती हैं। वे गुस्सा व्यक्त नहीं कर पाती हैं। इसके विपरीत पुरुष गुस्सा, मारपीट करके या सिगरेट और अन्य चीजों का सहारा लेकर अपना तनाव कम कर लेते हैं। कैसे किया जाता है इमोशनल मैनेजमेंट:

हर पल दिमाग में किसी भी परिस्थिति के लिए 50 से ज्यादा विचार आते हैं। किसी भी परिस्थिति के एक्सट्रीम लेवल तक जाने पर ही आत्महत्या के विचार आते हैं इसलिए हमें हर सोच पर ज्यादा ध्यान नहीं लगाना चाहिए। एंगर मैनेजमेंट करें:

इसमें ज्यादा गुस्सा करने वाले लोगों से एक डायरी बनवाई जाती है। जिसमें ए, बी और सी कैटेगरी बनाई जाती है। पहली कैटेगरी में उस घटना पर विचार किया जाता है जिसमें उसे गुस्सा आता है। उस दौरान उसका बर्ताव क्या रहता है, गुस्सा करने या उस बर्ताव से उस परिस्थिति का हल निकला या नहीं, इन पर विचार करने के बाद आगे आने वाली परिस्थितियों के लिए तैयार होना चाहिए। मां की पाबंदी पर किया आत्महत्या का प्रयास : केस-1

22 वर्षीय इंजीनियरिंग की छात्र ने आत्महत्या का प्रयास किया। ट्रामा सेंटर में इलाज के बाद मानसिक रोग विभाग में काउंसिलिंग में पता चला कि लड़की दूसरे जिले से लखनऊ पढ़ने आई थी। परिवार में मा ज्यादा सख्त थी वो लेट नाइट पार्टी और ज्यादा देर तक बाहर रहने पर गुस्सा करती थी। इसी बात को लेकर एक दिन मा से फोन पर ज्यादा झगड़ा हुआ। रूम मेट के घर पर नहीं होने पर उसने आत्महत्या का प्रयास किया। बाद में लड़की और खास तौर पर मा की काउंसिलिंग की गई।

केस-2

लखनऊ के एक पॉश इलाके में रहने वाली एक 35 वर्षीय महिला ने आत्महत्या का प्रयास किया। पति काम के सिलसिले में अक्सर बाहर रहता था। इसी दौरान पड़ोस में एक तलाकशुदा आदमी रहने आया। महिला का उस पुरुष से अफेयर हो गया। इसकी भनक उसके 12 साल के बच्चे को लग गई। एक दिन उसने महिला से इस बारे में बोल दिया। इसे लेकर महिला को बहुत ज्यादा ग्लानि हुई और उसने खुद को कमरे में बंद करके सुसाइड की कोशिश की। हालाकि बच्चे की समझदारी की वजह से उसे बचाया जा सका। वहीं महिला की काउंसिलिंग की गई, महिला के पति ने भी उसका सपोर्ट किया। उसे इमोशनल मैनेजमेंट के जरिये महिला एक बेहतर जीवन जी रही है।

केस-3

एक 32 वर्षीय महिला ने आत्महत्या का प्रयास किया। महिला के पति को शराब पीने की आदत थी जिसकी वजह से वो मारपीट करता था। बाद में पति की नौकरी भी छूट गई और ज्यादा मारपीट से तंग आकर महिला ने सुसाइड की कोशिश की। बाद में महिला और उसके पति की काउंसिलिंग की गई। परिस्थिति को न समझकर की खुदकशी की कोशिश :

केस-4

एक 25 वर्षीय युवक ने आत्महत्या का प्रयास किया। युवक की एक गर्लफ्रेंड थी जिसके साथ वो इमोशनली अटैच था। एक दिन झगड़े के बाद लड़की ने आत्महत्या की धमकी दी और अपना फोन स्विच ऑफ कर दिया। युवक ने सोचा कि उसने वाकई आत्महत्या कर ली है, यह सोचकर उसने भी आत्महत्या का प्रयास किया। जिसकी वजह से वो आइसीयू और वेंटीलेटर तक पहुंच गया। आठ दिन के इलाज के बाद जाकर वो सामान्य हुआ। मानसिक रोग विभाग में इलाज के दौरान उसकी काउंसिलिंग और एंगर एंड इमोशनल मैनेजमेंट पर वर्क करवाया। वहीं यह भी समझाया गया कि इसके बजाय उसे अपनी गर्लफ्रेंड को बचाने का प्रयास करना चाहिए था न कि खुद सुसाइड करना चाहिए।

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