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राज्य महिला आयोग अध्यक्ष विमला बाथम ने कहा बालिका और महिला संरक्षण गृहों की निगरानी खुद करें जिलाधिकारी


🗒 बुधवार, अगस्त 08 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विमला बाथम ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह अपने-अपने जिलों में संचालित बालिका, महिला व शिशु गृहों पर कड़ी नजर रखें। यदि जिले में कोई गृह बगैर अनुमति के संचालित किए जा रहे हों तो उन्हें तत्काल बंद कराएं। यही नहीं, इन गृहों में पारदर्शिता रखी जाए। यदि कोई अनुमति लेकर व्यवस्था देखना चाहे तो उसे न रोका जाए।

राज्य महिला आयोग अध्यक्ष विमला बाथम ने कहा बालिका और महिला संरक्षण गृहों की निगरानी खुद करें जिलाधिकारी

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विमला बाथम ने देवरिया मामले में जिलाधिकारी व एसएसपी से पूरी घटना की विस्तृत जांच आख्या व अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तत्काल भेजने के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि महिला आयोग की टीम अब नहीं भेजी जा रही है। कारण यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रकरण की जांच सीबीआइ को सौंप दी है।उन्होंने बताया कि आयोग की 25 सदस्यों को जिलों में जनसुनवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक सदस्य तीन जिलों में माह के पहले बुधवार को जनसुनवाई करेगी। इसके लिए स्थानीय स्तर पर डीएम व एसएसपी का सहयोग लिया जाएगा। महिलाएं इसमें आकर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शिकायत करने वाली महिलाओं को जल्द से जल्द न्याय मिले। बाथम ने कहा कि प्रदेश में महिलाएं व बालिकाएं हेल्पलाइन 181 पर भी अपनी शिकायतें दर्ज करा सकती है। इसकी रेगुलर मॉनीटरिंग की जाएगी।

जन कल्याण शिक्षा समिति के बैनर तले संचालित स्वाधार गृह कई जगह बदल चुका है। चार साल पहले यह विकास भवन के सामने स्थित जिला पंचायत के भवन में खोला गया। कुछ समय के बाद वहां से हटाकर पीलीभीत शहर के निकट स्थित गांव गौहनिया में स्थानांतरित कर लिया गया। इसके बाद वहां से भी हटाकर सीएमओ कार्यालय के पीछे एक निजी भवन को किराये पर लेकर संचालित किया जाने लगा। देवरिया में एक संरक्षण गृह में रहने वाली किशोरियों के यौन शोषण का मामला प्रकाश में आने के बाद मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के डीएम को निरीक्षण के निर्देश दिए थे। इसी के बाद डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट से गत दिवस स्वाधार गृह का निरीक्षण कराया तो वहां रजिस्टर में दर्ज संख्या से काफी कम लड़कियां मिलीं। इस पर संचालिका को तलब किया गया था। बुधवार को उसने डीएम को अपना स्पष्टीकरण सौंप दिया। बताया कि लड़कियों की संख्या अभी केवल दस है। निरीक्षण के दौरान तीन मेडिकल परीक्षण के लिए गई थीं।

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