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स्कूली पाठ्यक्रम में होनी चाहिए प्राथमिक चिकित्सा की पढ़ाईः योगी


🗒 शुक्रवार, अक्टूबर 05 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल के हेल्थ कॉन्क्लेव का उद्घाटन करते हुए कहा कि स्कूली पाठ्यक्रम में भी प्राथमिक चिकित्सा की पढ़ाई शामिल की जानी चाहिए। संपूर्ण आरोग्य के लिए स्वास्थ्य की परंपरागत देसी उपचार को भी शामिल किए जाने का आह्वान डॉक्टरों से किया है। शुक्रवार को इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल के हेल्थ कॉन्क्लेव का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि पहले लोग जड़ी-बूटी से ठीक हो जाते थे लेकिन, 20-25 वर्षों में इसमें खासी कमी आई है।

स्कूली पाठ्यक्रम में होनी चाहिए प्राथमिक चिकित्सा की पढ़ाईः योगी

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ.हर्षवर्धन की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने स्कूली पढ़ाई में प्राथमिक चिकित्सा शामिल किए जाने की जरूरत जताते हुए इसे अस्पतालों की भीड़ कम करने का मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि इलाज के साथ बीमारी न होने देने के लिए जन जागरूकता भी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हेल्थ कॉनक्लेव में भी मलेरिया से बचाव और ओआरएस तैयार करने जैसे बिंदुओं को शामिल कर जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैैं। उन्होंने कहा कि पहले बसों में फस्र्ट एड बॉक्स होते थे लेकिन, अब नहीं दिखते। इंसेफ्लाइटिस पर नियंत्रण के लिए भी उन्होंने बचाव के प्रयासों को श्रेय दिया।मुख्यमंत्री ने कहा कि 40 वर्षों से गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में अगस्त में इंसेफ्लाइटिस के 400 से 700 मरीज आते थे, जिसमें 100 से 150 तक की मौत हो जाती थी लेकिन, उपचार की सुविधा और स्वच्छता के लिए जागरूकता बढ़ाने के साथ गांवों में पाइप से पेयजल पहुंचा कर और स्कूलों में आरओ लगाने का नतीजा है कि इस बार अगस्त में जहां केवल 80 मरीज आए, वहीं मौतों की संख्या भी घटकर छह रह गई। उन्होंने बताया कि केजीएमयू कुलपति के नेतृत्व में एक गांव में भारतीय पद्धति के प्रयोग के सकारात्मक परिणाम आए हैैं। जड़ी-बूटी के प्रयोग को लेकर उन्होंने बचपन का किस्सा भी सुनाया कि पैर का जो घाव दवा और सर्जरी से नहीं भर रहा था, वह जड़ी-बूटी से ऐसा ठीक हुआ कि फिर दोबारा नहीं हुआ।केंद्रीय मंत्री डॉ.हर्षवर्धन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वास्थ्य, स्वच्छता और जागरूकता संबंधी योजनाएं गिनाते हुए कहा कि उनके जैसा विजनरी कोई नहीं है। बचाव और स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को उन्होंने चिकित्सा का 90 फीसद हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि 45 फीसद बीमारियां शारीरिक निष्क्रियता से हो रही हैैं, इसीलिए दिल्ली के पार्कों में ओपेन जिम बनाए गए हैैं। हेल्थ कॉन्क्लेव में प्रदर्शनी के साथ 20 अक्टूबर तक स्वास्थ्य शिविर लगाये जाने को उन्होंने बेहतर शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि अच्छा डॉक्टर वही है, जिसकी मौजूदगी से बीमारियां कम होने लगें। पुरानी प्रतिष्ठा और विश्वास हासिल करने को उन्होंने डॉक्टरों की सबसे बड़ी चुनौती बताया। कॉन्क्लेव की संयोजिका डॉ.आशा लता राधाकृष्णन ने बताया कि यह आयोजन खास तौर पर महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर है।

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