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राजधानी लखनऊ में पुरानी पेंशन योजना बहाली लेकर डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा व कर्मचारियों के बीच वार्ता विफल


🗒 सोमवार, अक्टूबर 08 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज हजारों कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर बड़ी रैली का आयोजन किया। इसी बीच उनको डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा से वार्ता करने का समय मिला। करीब आधा घंटा के बाद भी कोई ठोस आश्वासन न मिलने पर कर्मचारी अपने आंदोलन को बड़ा स्वरूप प्रदान करने पर अड़ गए हैं। अब राज्य कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने को लेकर 23 से 27 अक्टूबर तक हड़ताल पर रहेंगे।

राजधानी लखनऊ में पुरानी पेंशन योजना बहाली लेकर डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा व कर्मचारियों के बीच वार्ता विफल

पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर आयोजित रैली के बीच उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के साथ वार्ता के लिए राज्य कर्मचारी उनके कार्यालय पहुंचे। वहां पर करीब आधा घंटा तक वार्ता के बाद भी उनको कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। राज्य कर्मचारियों के साथ ही शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल को ठोस आश्वासन न मिलने पर पुरानी पेंशन बहाली मंच ने 25 से 27 अक्टूबर की हड़ताल का निर्णय लिया है। मंच संयोजक हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लखनऊ वापसी पर मामला उनके सामने रखकर निर्णय कराने की बात तो कही लेकिन कोई समयबद्ध आश्वासन नहीं दिया है।पुरानी पेंशन बहाली की मांग उठाने वाले संगठनों का कहना है नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) पूरी तरह से फेल है। लागू होने के 14 वर्ष बाद भी यह व्यवस्था अभी तक पटरी पर नहीं आ सकी है। पुरानी पेंशन बहाली को लेकर लखनऊ के ईको गार्डन में प्रदेश भर के लाखों शिक्षक, इंजीनियर्स, अधिकारी व कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि एक अप्रैल 2005 से लागू नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) की जगह पुरानी व्यवस्था को लागू किया जाए, ताकि रिटायरमेंट के बाद राज्य कर्मचारी के परिवार का भविष्य सुनिश्चित हो सके। रिटायर हो चुके या रिटायर होने वाले कर्मचारियों को मिलने वाला जीपीएफ का पैसा भी फंसा है।

अटेवा-पुरानी पेंशन बचाओ मंच यूपी के मीडिया प्रभारी राजेश यादव कहते हैं कि न्यू पेंशन स्कीम एक म्यूचुअल फंड की तरह है जिससे कर्मचारियों को कोई फायदा नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, एनपीएस जो है, वह शेयर मार्केट पर आधारित व्यवस्था है। पुरानी पेंशन में हर साल डीए जोड़ा जाता था, जो कि एनपीएस में नहीं है। एनपीएस के तहत जो टोटल अमाउंट है, उसका 40 प्रतिशत शेयर मार्केट में लगाया जाता है। पुरानी व्यवस्था में ऐसा कुछ भी नहीं था।इसके साथ ही यह गारंटी भी थी कि कर्मचारी या अधिकारी की आखिरी सैलरी का लगभग आधा उसे पेंशन के तौर पर मिलता था। इस नई व्यवस्था में इसकी कोई गारंटी भी नहीं है। यह तो शेयर मार्केट पर आधारित है। कर्मचारी जिस दिन रिटायर हो रहा है, उस दिन जैसा शेयर मार्केट होगा, उस हिसाब से उसे 60 प्रतिशत मिल जाएगा और बाकी के 40 प्रतिशत के लिए उसे पेंशन प्लान लेना होगा। उस पेंशन प्लान के आधार पर उसकी पेंशन निर्धारित होगी।ऐसे में मान लीजिए अगर किसी की पेंशन 2000 निर्धारित हो गई तो वह पेंशन उसे आजीवन मिलेगी। उसमें कोई उतार-चढ़ाव नहीं होगा. पुरानी व्यवस्था के तहत मान लीजिए अगर किसी की आखिरी सैलरी 50 हजार है तो उसे 25 हजार पेंशन मिलती थी। इसके अलावा हर साल मिलने वाला डीए और वेतन आयोग के तहत वृद्धि की सुविधा थी।लड़ाई इसी बात की है कि नई पेंशन व्यवस्था शेयर मार्केट आधारित व्यवस्था है। मान लीजिए कि कर्मचारी एक लाख रुपए जमा करता है। जिस दिन वह रिटायर होता है उस दिन शेयर मार्केट में उसके एक लाख का मूल्य 10 हजार है तो उसे 6 हजार रुपए मिलेंगे और बाकी 4 हजार में उसे किसी भी बीमा कंपनी से पेंशन स्कीम लेनी होगी। इसमें कोई गारंटी नहीं है। यही विरोध का मुख्य वजह है।

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