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विवेक तिवारी की गाड़ी से नहीं टकराई थी सिपाहियों की बाइक


🗒 मंगलवार, अक्टूबर 09 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

उत्तर प्रदेश पुलिस को कठघरे में खड़े करने वाले लखनऊ के विवेक तिवारी की हत्या में नया मामला सामने आया है। हत्या की जांच कर रही एसआइटी की टेक्निकल सपोर्ट टीम के मुताबिक, विवेक तिवारी की कार उस रात सिपाहियों की बाइक से टकराई ही नहीं थी।

विवेक तिवारी की गाड़ी से नहीं टकराई थी सिपाहियों की बाइक

विवेक तिवारी को गोली मारने के आरोप में जेल में बंद सिपाही प्रशांत चौधरी तथा संदीप कुमार ने बताया कि विवेक तिवारी उन पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश कर रहा था। इस दौरान गाड़ी ने उनकी बाइक में कई बार टक्कर मारी थी, इसलिए बचाव में उन्होंने गोली चलाई थी। ऐसे में अब जांच कर रही टीम के मामले सामने लाने के बाद सवाल उठ रहा है कि अगर विवेक तिवारी ने गाड़ी चढ़ाने की कोशिश नहीं की गई थी, तो किन परिस्थितियों में सिपाही ने गोली चलाई। विवेक तिवारी की हत्या के मामले में दोनों वाहनों की जांच कर रही यूपीएसआरटीसी की तकनीकी टीम ने दोनों गाडिय़ों की जांच करने के बाद एसआइटी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।घटना के बाद जब आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी से सवाल पूछे गए तो उसने कहा था कि रात 2 बजे (28 सितंबर) मुझे एक संदिग्ध कार दिखी जिसकी लाइट बंद थी, जब मैंने कार की तलाशी लेनी चाही तो विवेक ने तीन बार मुझे गाड़ी से मारने की कोशिश की, जिसके बाद अपने बचाव में मुझे फायरिंग करनी पड़ी।लखनऊ में 28 सितंबर की देर रात विवेक तिवारी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में सिपाही प्रशांत चौधरी तथा संदीप कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इन दोनों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।

एपल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। विवेक की गाड़ी के तकनीकी निरीक्षण में पता चला कि उनकी कार 60 किमी प्रति घंटा से ज्यादा की रफ्तार में थी। गोली लगने के बाद विवेक अपनी और सना की जान बचाने के लिए तेजी से कार लेकर भागे थे। वह इलाज कराने के लिए अस्पताल जा रहे थे। तेज रफ्तार गाड़ी शहीद पथ के अंडरपास में मोड़ते वक्त अनियंत्रित होकर खंभे से टकरा गई थी। इसकी वजह से गाड़ी का एयर बैग खुल गया था।फॉरेंसिक सूत्रों के मुताबिक घटना के वक्त विवेक और सना ने सीट बेल्ट लगा रखी थी। घटना के रीक्रिएशन के दौरान फॉरेंसिक विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने भी सीट बेल्ट के बारे में जानकारी जुटाई थी। खास बात यह है कि चश्मदीद सना खान ने पुलिस को दिए बयान में कहा था विवेक सर जान बचाने के लिए तेजी से गाड़ी लेकर भागे थे।विवेक की मौत गोली लगने के करीब आधे घंटे से भी ज्यादा देर बाद हुई थी। लोहिया अस्पताल के रजिस्टर में विवेक को शुक्रवार देर रात 02:05 बजे भर्ती किए जाने की पुष्टि है। वहीं मौत का समय 20 मिनट बाद 02:25 बजे हुई थी, जिसका जिक्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी किया गया है।करीब 20 मिनट तक अस्पताल में डॉक्टरों ने विवेक का इलाज किया था। यह वह समय है, जो अस्पताल में दर्ज है, जबकि गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद विवेक को अस्पताल ले जाने में ही काफी वक्त लगा था। 

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