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बारूद के ढेर पर नियम-कानून, फुटकर पटाखा दुकानों पर मानकों का उल्लंघन


🗒 मंगलवार, नवंबर 06 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

राजधानी में आतिशबाजी की दुकानें तो सजा दी गई हैं लेकिन मुनाफा कमाने के चक्कर में नियम-कानून बारूद के ढेर पर रख दिए गए हैं। अग्निसुरक्षा के मानकों का उल्लंघन किया जा रहा है। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। राजधानी में प्रशासन ने करीब चालीस स्थानों पर पटाखा बेचने की अनुमति दी है। प्रशासन की अनुमति फुटकर कारोबारियों के लिए है जो तीन दिन पटाखा की बिक्री करेंगे। अस्थायी लाइसेंस जारी करते समय प्रशासन बाकादा दुकानों से बांड भराता है कि वह नियम-कानून का पालन करेंगे। दुकानों के बीच तीन मीटर का गैप रहेगा।

बारूद के ढेर पर नियम-कानून, फुटकर पटाखा दुकानों पर मानकों का उल्लंघन

बिजली के तार कतई खुले नहीं होंगे। दुकानें टिन की बनी होंगी और लोहे के एंगल का इस्तेमाल होगा। दुकानों पर पानी, बालू के अलावा अग्निसुरक्षा के उपकरण मौजूद रहेंगे। सोमवार को पटाखा बाजारों की पड़ताल में सामने आया है कि कहीं पर भी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। अधिकतर बाजार घनी आबादी या बाजारों के करीब हैं। जरा सी चिंगारी दर्जनों लोगों की जिंदगियों का खतरा बन सकती है। निशातगंज के जीआइसी मैदान में लगे पटाखा बाजार में खामियां ही खामियां मिलीं। ये बाजार धनतेरस की शाम लग गया। यहां न तो दुकानदारों ने देर शाम तक पानी का कोई इंतजाम किया था। न ही दमकल की गाड़ी खड़ी की गई। खुले तार दुकानों के ऊपर खिंचे थे। पेट्रोल गाडिय़ां आराम से बाजार के अंदर लाई जा सकती हैं। पुलिस बल का कोई भी इंतजाम नहीं किया गया है। बाजार में कुल दो दर्जन स्टॉल लगाए गए हैं। यहां किसी भी दुकान में अग्निशमन यंत्र तो दूर की बात है पानी की भरी बाल्टियों तक का टोटा है।यूं तो तेज धमाकों वाले पटाखे इस बार बाजार में कम हैं। लेकिन, प्रतिबंध के बावजूद पांच हजारा और दस हजारा चटाई दुकानों पर बिक रही है। पुलिस टीम की मौजूदगी के बावजूद बिक्री जारी थी। दुकानदार कह रहे थे कि पहले से बुक किया माल है उसका क्या करेंगे। अब तो चटाई निकल चुकी हैं। चलन में होने के कारण लोग इस मांगते हैं। हालांकि हादसों से सबक लेते पुलिस, प्रशासन और फायर टीम की तैयारियां चुस्त-दुरुस्त दिखीं। बड़े क्षेत्र में होने के कारण पार्किंग गेट के पास यानी बाजार से दूर रखी गई है। कॉलेज का मैदान रिहायशी कालोनियों से घिरा हुआ है। एक तरफ नेहरू रोड से सटे मुहल्ले हैं तो दूसरी ओर अटल रोड से सूर्या कमांड कैंटीन की तरफ जाने वाली रोड पर स्थित सैन्य अधिकारियों के बंगले। यहां करीब 25 से 30 दुकानें लगती हैं। सुरक्षा के नाम पर कुछ ही दुकानदारों ने प्लास्टिक के ड्रम और बोरी में बालू रखी है। वहीं तोपखाना में भी सुरक्षा मानकों को  नहीं अपनाया जा रहा है। पटाखा बाजार में आग से बचाव के उपाय जरूरत के अनुसार नाकाफी हैं। मानकों को ताक पर रखकर पटाखा बाजार में पटाखे बेचे जा रहे हैं। ऐसे में अगर आग लगती है तो उसे बुझाना बेहद मुश्किल होगा। रामाधीन सिंह लॉन में लगे पटाखा बाजार व अलीगंज सेंट्रल स्कूल के पास ग्राउंड पर लगे पटाखा बाजार बारूद के ढेर पर हैं। यहां पटाखा व्यवसायियों ने अपने-अपने स्टाल के सामने एक ड्रम, एक बोरी बालू और फायर हाइड्रेंट की व्यवस्था तो की है लेकिन जरूरत के अनुसार यह बेहद कम है और आग लगी तो बचाना मुश्किल होगा।

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