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सहयोगी दल डाल-डाल और भाजपा पात-पात, विकल्पों की तलाश


🗒 सोमवार, दिसंबर 31 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

लोकसभा चुनाव 2019 के नजदीक आते ही राजनीतिक दलों ने गठबंधन के नये समीकरणों की तलाश शुरू कर दी है। राजग गठबंधन में शामिल अपना दल (एस) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के बदले सुर ने भाजपा को भी अन्य विकल्पों के लिए प्रेरित किया है। इस वजह से इन दोनों के समानांतर चल रहे उत्तर प्रदेश के दूसरे दल भी भाजपा की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखने लगे हैं।

सहयोगी दल डाल-डाल और भाजपा पात-पात, विकल्पों की तलाश

भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना दल के बाद उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में अपना दल (एस) तथा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ गठबंधन कर रिकार्ड जीत हासिल की। विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद ही सुभासपा और हाल ही में अपना दल (एस) से भाजपा की तल्खी बढ़ी है। हालांकि दोनों दल अभी भी पुराने गठबंधन से ही 2019 का चुनाव लडऩे की बात कर रहे हैं लेकिन, दबाव को देखते हुए भाजपा दूसरे पहलुओं का भी अवलोकन करने लगी है।ध्यान रहे कि 2014 में अपना दल को भाजपा ने दो सीटें दी थीं जिनमें मीरजापुर से अनुप्रिया पटेल और प्रतापगढ़ लोकसभा क्षेत्र से कुंवर हरिवंश सिंह चुनाव जीते लेकिन, कुछ ही समय बाद इस दल में दो फाड़ हो गई। अपना दल और अपना दल (एस) अस्तित्व में आ गये। अपना दल के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल की पत्नी कृष्णा पटेल ने दल की कमान संभाली जबकि, मोदी सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल अपना दल (एस) की संयोजक बन गईं और उनके पति आशीष सिंह पटेल को नेतृत्व सौंप दिया गया।इस बीच, अनुप्रिया और कुंवर हरिवंश के बीच खटास बढ़ गई। हरिवंश सिंह ने मोदी के नेतृत्व में आस्था व्यक्त की है। सूत्रों का कहना है कि हरिवंश अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल और पल्लवी पटेल को राजग गठबंधन की ओर प्रेरित कर रहे हैं।दूसरी ओर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के संस्थापक सदस्य मदन राजभर ने भारतीय संघर्ष समाज पार्टी का गठन कर बिगुल बजा दिया है। पिछले दिनों मऊ में मदन ने राजभरों को जुटाकर शक्ति प्रदर्शन भी किया। मदन भी भाजपा के एक बड़े नेता के संपर्क में हैं।

राष्ट्रीय लोकदल से अभी तक सपा-बसपा गठबंधन की उम्मीद है लेकिन, भाजपा में पश्चिमी उत्तर प्रदेश एक लॉबी चौधरी अजित सिंह से समझौते की हिमायत करने लगी है। फैसला नेतृत्व को करना है इसलिए किसी संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। उधर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रभाव जमा रही निषाद पार्टी पर भी नजर टिकी है।हालांकि निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के पुत्र प्रवीण निषाद समाजवादी पार्टी के टिकट पर गोरखपुर लोकसभा उप चुनाव में भाजपा को पराजित कर चुके हैं। भाजपा के संपर्क में चौहान, प्रजापति, बिंद समेत जातीय स्तर पर राजनीतिक दल चलाने वाले कई नेता बने हुए हैं। चूंकि गठबंधन का फैसला भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के स्तर पर होना है, इसलिए प्रदेश में कोई भी नेता इस मुद्दे पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना दल को भाजपा ने दो सीटें दी थीं जिनमें मीरजापुर से अनुप्रिया पटेल और प्रतापगढ़ लोकसभा क्षेत्र से कुंवर हरिवंश सिंह चुनाव जीते थे।लोकसभा चुनाव के बाद अपना दल में दो फाड़ हो गई। अपना दल और अपना दल (एस) अस्तित्व में आ गए। अपना दल के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल की पत्नी कृष्णा पटेल ने दल की कमान संभाली जबकि, मोदी सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल अपना दल (एस) की संयोजक बन गईं और उनके पति आशीष सिंह पटेल को नेतृत्व सौंप दिया गया। इस बीच, अनुप्रिया और कुंवर हरिवंश के बीच खटास बढ़ गई। हरिवंश सिंह ने मोदी में आस्था व्यक्त की है। सूत्रों का कहना है कि हरिवंश अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल और पल्लवी पटेल को राजग गठबंधन की ओर प्रेरित कर रहे हैं।सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के संस्थापक सदस्य मदन राजभर ने भारतीय संघर्ष समाज पार्टी का गठन कर बिगुल बजा दिया है। पिछले दिनों मऊ में मदन ने शक्ति प्रदर्शन भी किया। मदन भी भाजपा के एक बड़े नेता के संपर्क में हैं।

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