यूनाइट फॉर ह्यूमैनिटी हिंदी समाचार पत्र

RNI - UPHIN/2013/55191 (साप्ताहिक)
RNI - UPHIN/2014/57987 (दैनिक)
RNI - UPBIL/2015/65021 (मासिक)

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए छठवें चरण में मैदान में 174 प्रत्याशी, मतदान कल


🗒 शनिवार, मई 11 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

लोकसभा चुनाव 2019 यानी 17वीं लोकसभा के लिए छठवें चरण में कल 14 संसदीय क्षेत्रों में मतदान होगा। इस चरण में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी व मुकुट बिहारी वर्मा, जगदम्बिका पाल, रमाकांत यादव और डॉ. संजय सिंह जैसे दिग्गजों के राजनीतिक भविष्य का फैसला होगा। आजमगढ़ को छोड़ कर वर्ष 2014 में अन्य क्षेत्रों में भाजपा या उसके सहयोगी दल (अपना दल) का कब्जा था।लोकसभा चुनाव में इस बार गणित बदल गया है। सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के अलावा प्रदेश में कांग्रेस की मजबूत उपस्थिति ने मुकाबलों को रोचक बना दिया है। मतदान कल सुबह सात बजे से शुरू होकर शाम छह बजे तक चलेगा।

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए छठवें चरण में मैदान में 174 प्रत्याशी, मतदान कल

आजमगढ़

आजमगढ़ से 2014 में समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव सांसद निर्वाचित हुए थे। इस बार उनके बेटे अखिलेश यादव इस सीट से मैदान में उतरे हैं। पिछले चुनाव में सपा की जीत का अंतर बड़ा नहीं था लेकिन, इस बार बसपा से गठबंधन होने और कांग्रेस का समर्थन मिलने के कारण अखिलेश यादव समर्थकों में आत्मविश्वास अधिक दिखता है। यहां पर समाजवादी पार्टी से सीट छीनने के लिए भाजपा ने भोजपुरी फिल्मों के कलाकार दिनेश लाल यादव निरहुआ को मैदान में उतारा है।

सुलतानपुर

सुलतानपुर लोकसभा सीट से वरुण गांधी सांसद हैं लेकिन, उन्होंने अपनी मां मेनका गांधी से सीटों की अदला बदली की है। वरुण पीलीभीत से और मेनका सुलतानपुर से चुनाव लड़ रही हैं। बसपा ने चंद्रभद्र सिंह सोनू को गठबंधन प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने पूर्व सांसद डॉ. संजय सिंह को उतार कर यहां मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।

इलाहाबाद

इलाहाबाद सीट से सांसद श्यामाचरण शुक्ल भाजपा से बगावत कर चुके हैं। उनके स्थान पर भाजपा ने योगी सरकार में मंत्री रीता बहुगुणा जोशी को मैदान में उतारा है। कभी कांग्रेस का गढ़ रहे इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया गया है। कुंभ के दौरान हुए विकास का श्रेय भी भाजपा लेेने की कोशिश करेगी। इस सीट पर गठबंधन ने पिछड़ा कार्ड चलते हुए सपा के राजेेंद्र सिंह पटेल को टिकट दिया है। कांग्रेस के योगेश शुक्ला मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में है।कभी कांग्रेस का गढ़ रही इलाहाबाद संसदीय सीट अब भाजपा के लिए नाक का सवाल बनी हुई है। यहां भाजपा ने कभी कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रही रीता बहुगुणा जोशी को मैदान में उतारा है तो वहीं कभी भाजपा का झंडा थामकर चुनाव लडऩे वाले योगेश शुक्ला को कांग्रेस ने टिकट दिया है। गठबंधन की तरफ इस बार राजेंद्र पटेल दोनों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

फूलपुर

प्रयागराज की फूलपुर सीट पर सभी की निगाहें हैं। 2014 में यहां केशव प्रसाद मौर्य ने भाजपा का परचम फहराया था लेकिन, उप मुख्यमंत्री बनने के बाद उपचुनाव में सीट न बचा सके। इस बार भाजपा ने केसरी देवी पटेल को उतारा है तो गठबंधन की ओर से पंधारी यादव मैदान में हैं। कांग्रेस ने पंकज निरंजन को टिकट दिया है। स्व. सोनेलाल पटेल के दामाद पंकज की मौजूदगी ने चुनावी संघर्ष का बढ़ा दिया है।

अंबेडकरनगर

बसपा के दबदबे वाली अंबेडकर नगर सीट मोदी लहर के चलते 2014 में भाजपा के कब्जे में आ गई थी। इस क्षेत्र में कांग्रेस के बाद बसपा ही अधिक सफल रही है। पिछले चुनाव में भाजपा के हरिओम पांडेय सांसद चुने गये थे। उन्होंने बसपा के राकेश पांडेय को हराया था लेकिन, भाजपा ने सांसद हरिओम पांडेय के स्थान पर सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा को टिकट दिया है। गठबंधन से बसपा विधायक रितेश पांडेय उम्मीदवार हैं। यहां कांग्रेस की किरकिरी प्रत्याशी उम्मेद सिंह निषाद का पर्चा खारिज होने से हो चुकी है। ऐसे में यहां पर भाजपा व गठबंधन के बीच सीधी टक्कर है। अंबेडकर नगर संसदीय सीट को मायावती का गढ़ माना जाता है। बसपा मुखिया मायावती ने अंबेडकर नगर संसदीय सीट से ही अपने सियासी सफर की शुरुआत की थी। यहीं 1989 में चुनाव जीतकर संसद पहुंची थीं। अंबेडकर नगर से मायावती जीत की हैट्रिक 1998, 99 और 2004 में लगा चुकी हैं। मायावती के बाद इस क्षेत्र से बसपा के राकेश पांडेय दो बार सांसद रहे। 2014 में मोदी लहर में उनको भाजपा के हरिओम पांडेय ने हरा दिया था। इस बार भाजपा ने मौजूदा सांसद का टिकट काटकर यूपी सरकार में मंत्री मुकुट बिहार वर्मा पर दांव खेला है। इस फैसले के पीछे कुर्मी वोटरों का गणित है। यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और गठबंधन में ही है क्योंकि कांग्रेस प्रत्याशी उम्मेद सिंह का नामांकन खारिज हो चुका है।

प्रतापगढ़

प्रतापगढ़ में मुकाबला दिलचस्प दिख रहा है। अपना दल (एस) के सांसद हरिवंश सिंह का टिकट काटकर भाजपा ने संगम लाल गुप्ता को मैदान में उतारा है। गुप्ता अपना दल के टिकट पर वर्ष 2017 में विधायक निर्वाचित हुए थे। कांग्रेस की ओर से तीन बार सांसद रहीं रत्ना सिंह इस बार प्रत्याशी हैं।वहीं गठबंधन ने बसपा के अशोक त्रिपाठी को टिकट दिया है। स्थानीय समीकरण में उलट फेर करने वाले रघुराज प्रताप सिंह की पार्टी जनसत्ता दल से प्रत्याशी अक्षय प्रताप गोपालजी के आने से मुकाबला चतुष्कोणीय बन गया है।

श्रावस्ती

श्रावस्ती सीट 2009 से अस्तित्व में आई और पहली बार कांग्रेस के विनय पांडेय को यहां से सांसद बनने का मौका मिला। 2014 में मोदी लहर के चलते दद्दन मिश्र सांसद बने। भाजपा ने दद्दन मिश्र को फिर से मौका दिया है। वहीं कांग्रेस से धीरेंद्र प्रताप सिंह और गठबंधन से बसपा के राम शिरोमणि वर्मा मैदान में हैं। मुकाबला बहुकोणीय होने के कारण चुनाव में कांटे की टक्कर दिख रही है। श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र में मतदाताओं का रुझान जानना कठिन नहीं है, पर कांग्रेस अंतिम परिणाम के लिहाज से गुणा-भाग को थोड़ा मुश्किल बना रही है। यहां आमने-सामने की लड़ाई में भाजपा और सपा-बसपा गठबंधन है। दोनों जहां अपने-अपने आधार वोट में मजबूती से लड़ रहे हैं, वहीं कुछ हद तक एक-दूसरे के आधार वोट में सेंध लगाने की कोशिश में भी हैं। भाजपा से मौजूदा सांसद दद्दन मिश्रा फिर से मैदान में है। गठबंधन से यह सीट बसपा के खाते में है। राम शिरोमणि वर्मा गठबंधन के प्रत्याशी हैं। कांग्रेस ने बलरामपुर सदर से विधायक रहे धीरेंद्र प्रताप सिंह पर दांव लगाया है।

डुमरियागंज

डुमरियागंज क्षेत्र में भाजपा के सांसद जगदम्बिका पाल को इस बार अपनी सीट कायम रखने के लिए गठबंधन की ओर से बसपा के आफताब आलम से कड़ी चुनौती मिल रही है। डुमरियागंज लोकसभा से कांग्रेस उम्मीदवार के डॉ चंद्रेश उपाध्याय के आ जाने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। गठबंधन के प्रत्याशी आफताब आलम हैं। भाजपा के जगदम्बिका पाल तीसरी बार संसद पहुंचने के लिए मैदान में हैं। कांग्रेस की वजह से इस सीट पर ध्रुवीकरण की परिस्थितियां नहीं बन पा रही हैं।

बस्ती

बस्ती लोकसभा सीट पर भाजपा ने मोदी लहर में जीतकर संसद पहुंचे हरीश द्विवेदी पर फिर से भरोसा जताया है। यह सीट सपा-बसपा गठबंधन में बसपा के खाते में है। पिछले चुनाव में बसपा के कैंडिडेट राम प्रसाद चौधरी तीसरे स्थान पर थे। राम प्रसाद को सीट जीतने का मौका दिया गया है। कांग्रेस सपा के बागी राजकिशोर सिंह को मैदान में उतारा है। यहां त्रिकोणीय मुकाबला है।

भदोही

भदोही में भाजपा ने सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के स्थान पर रमेश बिंद को उतार कर नया प्रयोग किया है। यहां गठबंधन ने पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र को टिकट देकर ब्राह्मण कार्ड चला है, जबकि कांग्रेस ने बाहुबली रमाकांत यादव को मैदान में उतार कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। भाजपा ने यहां से रमेश बिंद को खड़ा किया है। बिंद बसपा के टिकट पर तीन बार मझवां से विधायक रहे हैं। भाजपा ने ने एक तरह से पिछड़ा कार्ड खेला है।

संतकबीर नगर

संतकबीरनगर में भी मुकाबला रोचक है। गठबंधन से पूर्व सांसद बसपा के भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी मैदान में हैं। भाजपा ने अपने सांसद शरद त्रिपाठी का टिकट काटकर सपा के बागी सांसद प्रवीण निषाद को आजमाया है। इसी तरह कांग्रेस ने भी सपा के बागी भाल चंद्र यादव पर दांव खेला है। पूर्वांचल की महत्वपूर्ण सीटों में से एक संत कबीरनगर में मुकाबला त्रिकोणीय कहा जा सकता है। यहां किसी पार्टी के लिए मुकाबला सीधा नहीं रह गया है। जूतम-पैजार के बाद भाजपा ने ने मौजूदा सांसद शरद त्रिपाठी का टिकट काट दिया और डैमेज कण्ट्रोल करते हुए प्रवीण निषाद को मैदान में उतारा। गठबंधन की तरफ से ब्राम्हण प्रत्याशी मैदान में है। कांग्रेस ने पूर्व सपाई भालचंद्र यादव को टिकट दिया है।

लालगंज

आजमगढ़ जिले की लोकसभा सीट लालगंज में 1962 से 2014 तक हुए 14 लोकसभा चुनाव में यहां से 10 बार ऐसे प्रत्याशी जीते जिनके नाम में राम लगा हुआ था। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में भाजपा की नीलम सोनकर यहां से चुनाव जीतकर संसद पहुंची थीं। एक बार फिर नीलम सोनकर मैदान में हैं और उनका मुकाबला बसपा की सीमा आजाद से है।

जौनपुर

जौनपुर लोकसभा सीट देश के राजनीतिक मिजाज के साथ यहां जाति का गणित ज्यादा महत्वपूर्ण रहता है. जातीय गणित में कई बार यहां स्थानीय मुद्दे भी गायब हो जाते हैं। इस बार यहां से भाजपा ने सांसद केपी सिंह पर फिर से भरोसा जताया है। कांग्रेस से देवव्रत मिश्र व सपा-बसपा गठबंधन से श्याम सिंह यादव ने ताल ठोंकी है। सीट गठबंधन में बसपा के खाते में है।

मछलीशहर

जौनपुर जिले की मछलीशहर संसदीय सीट पर इस बार दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद है। इस सीट से बहुजन समाज पार्टी ने इंजीनियर टी राम को अपना प्रत्याशी बनाया है। उनका मुख्य मुकाबला भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे बीपी सरोज से है। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों के आधार पर विश्लेषण करें, तो मछलीशहर सीट पर भाजपा का पलड़ा भारी लगता है। गठबंधन के बाद माहौल बदला है और गठबंधन प्रत्याशी कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

इन सीटों पर होगा चुनाव

सुलतानपुर, प्रतापगढ़, फूलपुर, इलाहाबाद, अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती, संतकबीर नगर, लालगंज (सुरक्षित), आजमगढ़, जौनपुर, मछलीशहर (सुरक्षित), भदोही।

कुल 174 उम्मीदवार और 2.53 करोड़ मतदाता

छठवें चरण में 14 सीटों के लिए 174 प्रत्याशी हैं। सर्वाधिक 20 प्रत्याशी जौनपुर में हैं और सबसे कम सात-सात डुमरियागंज व संत कबीर नगर में हैं। सुलतानपुर में 15, प्रतापगढ़ में आठ, फूलपुर में 14, इलाहाबाद में 14, अम्बेडकरनगर में 11, श्रावस्ती में 10, बस्ती में 11, लालगंज में 15, आजमगढ़ में 15, मछलीशहर में 15 भदोही में 12 प्रत्याशी हैं। कुल 2.53 करोड़ मतदाता है और मतदान के लिए 16998 पोलिंग सेंटर और 29076 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। 

 

लखनऊ से अन्य समाचार व लेख

» सीतापुर रोड स्थित मंडी में भीषण आग, दम घुटने से पल्लेदार की मौत

» सीतापुर रोड खदरा में युवक की जलकर मौत, प्रेमिका और उसकी मां पर हत्‍या का आरोप

» मायावती ने फिर बोला कांग्रेस पर हमला, कहा-राजस्थान में पीडि़ता को नहीं दिला सकी इंसाफ

» कृष्णा नगर थाना क्षेत्र अंतगर्त संदिग्ध परिस्थितीयों में वृद्वा की जलकर मौत,मचा हड़कम्प

» व्यापार मण्डल के पदाधिकारीयों ने थाना प्रभारी संग की बैठक समस्याओं को लेकर कराया अवगत,

 

नवीन समाचार व लेख

» बाँदा मे चाची-भतीजे का प्यार, कमरे के अंदर सास ने देखा तो खा लिया जहर

» मेरठ मे ऑनलाइन ठगी करके कंपनी के खाते से 1.17 करोड़ उड़ाने वाले तीन गिरफ्तार

» मेरठ मे मोबाइल पर एप डाउनलोड करते समय खाते से उड़ाए 26 हजार

» सीतापुर रोड स्थित मंडी में भीषण आग, दम घुटने से पल्लेदार की मौत

» सीतापुर रोड खदरा में युवक की जलकर मौत, प्रेमिका और उसकी मां पर हत्‍या का आरोप