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फसलों की तबाही देख किसानों की उड़ गयी नींद,किसान और जानवरों कि मुसीबत बढ़ी


🗒 मंगलवार, फरवरी 13 2018
🖋 रमाशंकर कुशवाहा, तहसील रिपोर्टर महोबा

फसलों की तबाही देख किसानों की उड़ गयी नींद। जिस फसल की रात दिन रखवाली कर गुजार दिये किसानों ने अपनी राते उसी ने ही रुला दिया। मौसम के बदलते रुख ने किसान व जानवरों की मुसीबत बढ़ा दी। आसमान में काले बादलों ने एसा कहर ढाया कि एक ही बार में सब तहस-नहस कर दिया इतना ही आसमान से बरसी आफत ने लोगों के जीवन में भी प्रभाव डाला है किसी के घर तो किसी के घर सहित घर की सारी सामाग्री तथा जानवरों आदि का नुकसान हुआ है। एक साथ कई जानवरो की जांन भी गयी है इस तुफानी बारिस के साथ सफेद नमक ने लोगों को हलाकान कर दिया। गृहस्थी का सारा सामान भी स्वाहा हो चुका है लोगों के पास खाने में लिये कुछ भी नहीं बचा है। आस-पास के लोगों में हाहाकार मचा हुआ है इस देवकीय आपदा ने किसानों के चेहरे से चमक छीन ली है खाना पीना दुसवार हो गया। सुभाष नगर निवासी युवक के ओलावृष्टि के कारण पांच बकरियों की एक साथ मौत होने से घर में शोक का माहौल छाया हुआ है। जवाहर नगर में भी बारिश व ओलो के कारण गिरी आफत साफ दिखाई दे रही है लेकिन पीड़ितो को शासन व प्रशासन से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है सिर्फ तसल्ली के अलावा। एसी ही घटना से आपको अवगत कराता हूँ कि प्रकृति के बदलाव ने एसी मुसीबत डाली है की देखकर दिल दहल जायेगा। कबरई कस्बा के कई गांव भी इस ओला वृष्टि से प्रभावित हैं हालाकि आप कबरई से ही बाकी के हाल का अन्दाजा लगाया जा सकता है कल हुई बारिश ने कस्बा कबरई के सुभाष नगर निवासी छोटे लाल कुशवाहा पुत्र स्वर्गीय शारदा प्रसाद के घर ओले व पानी के कारण कमरे मे बंधी पांच बकरियों की देविक आपदा से मृत्यु हो गयी। पीडित के मुताबिक़ बताया गया हैं की रात में सभी रोजाना की भांति घर के सभी सदस्य अपने यथा स्थान जाकर सो गये कि रात्रि में भयानक भारिश व ओला वृष्टि से कमरे में ओले व पानी भर जाने के कारण एक साथ पांचों बकरियों की दम घुटकर मौत हो गयी। जब सुबह पीड़ित के नजर पड़ी तो सबके होश उड़ गये। तो वहीं दूसरी तरफ विवेक नगर निवासी धन्नू ठेकेदार के घर में ओले व बारिश ने एसी तबाही मचाई की सारी सामाग्री टी.वी. कूलर,रजाई,गद्दे,खाने का सारा सामान आटा,दाल आदि तहस-नहस कर दिया बस कमरों के अन्दर करीब 2 फुट नीचे से भरे सफेद चादर ढकी दिखाई दे रही है। घर वालों को अब खाने पीने की चिन्ता सता रही है। हर तरफ ओला वृष्टि की तबाही की ही चर्चाएं हो रही है। लोगों व किसानो को अब सरकार पर ही भरोषा है की उन तक कितनी मदद पहुंचाई जा सकती है।

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