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मथुरा के नंदग्राम में मयूरी नृत्य कर सहे बरसाने के हुरियारों ने लाठियों के वार


🗒 रविवार, मार्च 17 2019
🖋 विजय सिंघल, Danik ब्यूरो चीफ मथुरा

 

मथुरा के नंदग्राम में मयूरी नृत्य कर सहे बरसाने के हुरियारों ने लाठियों के वार

ब्यूरो चीफ विजय सिंघल मथुरा कान्हा के गांव नंदगांव में शनिवार को द्वापर जैसा नजारा दिखा। सोलह श्रृंगारों से सजी धजी नंदगांव की हुरियारिनें बरसाना के हुरियारों पर तडातड लाठियां बरसा रहीं थी। हुरियारिनों के लाठियों के वारों को बरसाना के हुरियारे ढालों पर सहकर अपना बचाव कर रहे थे। लाठियों के वार जितने तेज हो रहे थे नंदगांव बरसाना के लोगों के प्रेम सम्बंधों में इतनी ही प्रगाढता बढ रही थी। वैश्विक मंच पर दोनों गांवों की साझा संस्कृति के हजारों लोग गवाह बन रहे थे। नंदगांव में भोर से ही गोप गोपियां तैयारियों में जुट गए। कृष्णकाल की लीला जो जीवंत करनी है। घर घर रंग भिगोए गए। दशकों पूर्व तांबा, पीतल आदि धातूओं से ड्राम नुमा तामिनियों में टेसू के फूलों को सुखाकर प्राकूतिक रंग बनाया जाता था लेकिन अब तो सब घरों के आगे प्लास्टिक की बडी बडी टकीयां मिश्रित रंगों से भरे हैं।

दोपहर करीब ढाई बजे बरसाना के हुरियारे राधारानी स्वरूप पताका के साथ कुछ लोग पैदल तो कुछ वाहनों से यशोदा कुंड पहुंचे। इस दौरान पहले तो हुरियारों ने चक भांग ठंडाई छानी। इसके बाद हुरियारिनों के प्रहारों से बचने के लिए प्राथमिक उपचार सिर पर पगडी बांधकर किया। बरसाना में हुरियारों से मिली करारी हार का बदला जो लेना है। इसीलिए हुरियारों ने लाठियां बरसने से पूर्व पूरी तैयारी कुंड पर की। इसके बाद हुरियारे भूरे का थोक होते हुए नंदबाबा के पहाड़ी स्थित भवन (नंदभवन) पर झुंडों में हंसी ठिठोली करते पहुंचे। नंदगांव के गोप ग्वाले यहां पहुंचने वालों हुरियारों का टेसू के फूलों के रंग से सराबोर कर स्वागत कर रहे थे। नंदभवन में होली के पदों के साथ अबीर गुलाल हवाओं में तैरने लगा। माहौल में फिर से रंगत आ जाती है। भंग की तरंग और प्रेमभरे रसियाओं से हुरियारे मदमस्त होने लगे। रंग के गुबार किस रंग के हैं यह बताना किसी के बस का नहीं। इंद्रधनुष के सातों रंग छाए थे और हवाओं में प्रेम का मीठा रस घुलने लगा था। सभी समाजीयों के एकत्रित होने के बाद पारम्परिक वेशभूषा से सुसज्जित नंदगांव, बरसाना के ग्वालबालों के मध्य अष्टछाप के कवियों के पदों का संयुक्त समाजगायन किया जा रहा था । समाज गायन में ठाकुरजी को अनुराग युक्त गालियॉ सुनाई जा रही थीं। आवौ री सखी आवौ, बृजराज कूॅ गारी सुनावौ।

इधर दूसरी ओर रंगीली गली और लठामार होली चैक में हुरियारिन सोलहों श्रृंगारों से सज धज कर हाथ में लाठी हुरियारों के आने का इंतजार करने लगीं। इधर नंदभवन में लगभग एक घंटे तक रंगों से सराबोर होने के बाद बरसाने के हुरियारे नंदगांव की गोपियों से हंसी मजाक करते हुए रंगीली गली से निकले। गोपियों के साथ होली के रसियों का गायन कर नृत्य किया। इत आईं ब्रजबाल,मृगनैनी गज गामिनी, टके हैं मदन गुपाल,घन घेरयौ जनौं दामिनी। गोपियों को उकसाने के लिए हुरियारे उनको भी प्रेम पगी गालियॉ सुनाते हुए होली चैक पर एकत्र होने लगे। समाज का इशारा मिलते ही हुरियारिनों ने जमकर लाठियां बरसाईं और प्रेम में मगन हुरियारे उनको फूलों की टहनियां मान, मार खाखाकर निहाल हो रहे थे। सांझ ढलने लगी थी। समाज का आदेश हुआ कि सूर्यदेव छिप गए हैं,लठामार बंद की जाए। बरसाना के हुरियारे गोपियों के चरणस्पर्श कर बरसाने को कूच कर गए।

 

फागुवा लेने आते हैं बरसाना के हुरियारे

द्वापर में नंदगांव के कृष्ण जब गोपियों को बिना फगुवा यानि होली का उपहार दिए वगैर वापस लौट आए तो गोपियां थोडी सीं नाराज हुईं। इस पर राधारानी ने सखियों को बुलाया और नंदगांव जाकर फगुवा मांगने की बात कही। इसी बहाने उन्होंने सोचा की बरसाना में जो कृष्ण और उनके सखाओं पर जो लाठियां बरसीं इसके बाद उनका क्या हाल-चाल है ये भी पता लग जाएगा। दसमीं के दिन बरसाना से राधा के साथ गोपियों के टोल नंदभवन पहुंचे और फगुवा की मांग की। फगवा के बहाने एक बार फिर से नंदभवन में कान्हा और उनके सखाओं का राधा और उनकी सखियों के बीच केसर, कुमकुम आदि की होली हुई।

 

बरसाने की गोरी फगुवा मांगन आईं

नंदभवन में पहुंच कैं गोपिन नैं खूब होरी मचाई।

सुबल सुबाहू श्री दामा सुनत अचानक आए,

केसर मांट भरे दधि लै गोपन सिर नाए,

दूध लियौ भीतर तें छिरकीं सब ब्रजनारी,

बाल गुपाल सखा सब हॅंसत दै दै कर तारीं।

रंगों की बौछार से रंग विरंगी हुई रंगीली गली

नंदगांव। विश्व प्रसिद्ध लठामार होली के लिए प्रातः से ही हजारों भक्तों एवं श्रद्धालुओं ने रंग,गुलाल,अबीर लगा , होली के रसिया गाकर कान्हा के दर्शन किए। चारों ओर रंग और गुलाल से मले हुए गुलाबी,हरे और पीले चेहरे थे तो हर तरफ राधे राधे की धुन सुनाई दी। गलियों में गुलाल और रंग की कीच जमा हे गई। श्रद्धालुओं ने इस गुलाल और रंग के मिश्रण से भी आनंद लिया।

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