यूनाइट फॉर ह्यूमैनिटी हिंदी समाचार पत्र

RNI - UPHIN/2013/55191 (साप्ताहिक)
RNI - UPHIN/2014/57987 (दैनिक)
RNI - UPBIL/2015/65021 (मासिक)

जरूरी है आंखों का झपकना, कम पलकें झपकाने से हो सकता है ये रोग


🗒 शनिवार, अगस्त 11 2018
🖋 डा. आदिल अंसारी, ब्यूरो प्रमुख रामपुर रामपुर

हैल्थ डेस्क ।

जरूरी है आंखों का झपकना, कम पलकें झपकाने से हो सकता है ये रोग

स्वास्थ्य चर्चा  आईमित्रा ट्रेनर जीशान सर उर्फ अजहर खान सर के साथ ।

पलकें कम झपकाना आंखों के लिए खतरनाक है।आंखों की पुतलियों पर एक खास तरह का लिक्विड होता है।पलकें कम झपकाने से ल्युब्रिकेंट सही से आंखों में नहीं फैलता।

अक्सर कंप्यूटर पर काम करने वाले या टीवी और मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले लोग पलकें कम झपकाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इन कामों के दौरान व्यक्ति एकाग्रचित्त होकर एक ही काम पर केंद्रित हो जाते हैं, जिससे पलकें अपेक्षाकृत कम झपकती हैं। मगर क्या आपको पता है कि पलकें कम झपकाना भी आंखों के लिए खतरनाक है और इसके कारण आपको आंखों से संबंधित रोग हो सकता है। ड्राई आई सिंड्रोम आंखों की ऐसी ही बीमारी है, जो पलकें कम झपकाने के कारण लोगों को हो जाती है। आइए आपको बताते हैं पलकें झपकाना क्यों जरूरी है और क्या है ड्राई आई सिंड्रोम।

क्यों जरूरी है पलकें झपकाना
आपने देखा होगा कि स्वस्थ आंखों की पुतलियां हमेशा गीली नजर आती हैं। दरअलस आंखों की पुतलियों पर एक खास तरह का लिक्विड होता है, जो ल्युब्रिकेंट की तरह काम करता है। जब आप पलकें झपकाते हैं, तो ये ल्युब्रिकेंट पुतलियों में अच्छी तरह फैलता रहता है और आंखों की पुतलियों पर नमी बरकरार रहती है। इसके उलट जब आप पलकें कम झपकाते हैं, तो ल्युब्रिकेंट सही तरीके से आंखों में फैलता नहीं है। इसी कारण से आंखों में सूखापन आ जाता है, जिसे ड्राई आई सिंड्रोम कहा जाता है।
ड्राई आई सिंड्रोम में या तो आंखों में आंसू बनना कम हो जाता है या फिर उनकी गुणवत्ता अच्छी नहीं रहती। दरअसल आंसू, आंख के कॉर्निया व कन्जंक्टाइवा को नम व गीला रखकर उसे सूखने से बचाते हैं। वहीं हमारी आंखों में एक टियर फिल्म होती है, जिसकी सबसे बाहरी परत को लिपिड या ऑयली लेयर कहा जाता है। यही लिपिड लेयर आंसू के ज्यादा बहने, गर्मी एवं हवा में आंसू के सूखने या उड़ने को कम करती है। लिपिड या फिर यह ऑयली लेयर ही आंखों की पलकों को चिकनाई प्रदान करती है, जिससे पलकों को झपकाने में आसानी रहती है। लेकिन बहुत देर तक कंप्यूटर पर काम करने या बहुत ज्यादा टीवी देखने या फिर लगातार एयरकंडीशन में रहने से आंखों की टीयर फिल्म प्रभावित होती है और आंखें सूखने लगती हैं। इसे ही ड्राई आई सिंड्रोम कहा जाता है।

ड्राई आई सिंड्रोम के लक्षण
आंखों में जलन होना
चुभन महसूस होना
आंखों में सूखापन लगना
खुजली होना,
भारीपन रहना
आंखों में लाली पड़ना आदि आई सिंड्रोम के मुख्य लक्षणों में से होते हैं।
ड्राई आई सिन्ड्रोम से पीड़ित व्यक्ति अपनी पलकों को बार-बार व जोर से झपकाते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ पढ़ने-लिखने में आ रही है परेशानी, तो हो सकती है ये बीमारी
ड्राईआई सिंड्रोम से बचाव
चिकित्सकों से अनुसार आंखों में कोई समस्या हो या न हो लेकिन फिर भी समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहना चाहिए। साथ ही लगातार टीवी देखने या कम्प्यूटर पर काम करने से भी बचना चाहिए। इससे आंखों पर काफी दबाव पड़ता है और आंखें कमजोर होती हैं। इसके अलावा काम के बीच-बीच में पलकों को भी झपकाते रहना चाहिए। पलकों को झपकाने से आंख की पुतली के ऊपर आंसू फैलते हैं, जिससे उनमें नमी बनी रहती है और वे सूखेपन से बच जाती हैं।

 

मेरठ से अन्य समाचार व लेख

» भाजपा का कार्यसमिति में कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान पर जोर

» हमने प्रदेश में विश्वास कायम करने में सफलता हासिल की: CM योगी आदित्यनाथ

» राजनाथ सिंह ने कहा मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मस्तक ऊंचा

» भाजपा मिशन-2019 के लिए पश्चिमी उप्र की सियासी हवा बदलने में जुटी

» मेरठ मे आरएसएस नेता के अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण के विरोध में दलित वकीलों ने गंगा जल से किया शुद्धिकरण

 

नवीन समाचार व लेख

» जरूरी है आंखों का झपकना, कम पलकें झपकाने से हो सकता है ये रोग

» अब दिवालिया कानून में संशोधन को मिली मंजूरी

» भाजपा का कार्यसमिति में कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान पर जोर

» अब सुप्रीम कोर्ट जाएगा ससुर के साथ हलाला प्रकरण

» अखिलेश यादव ने बस्ती में फ्लाइओवर गिरने को लेकर भाजपा पर कशा तंग अपने कामों की जांच के लिए स्थायी आयोग ही बना दे सरकार