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सैलजा की राजस्थान में एंट्री से हरियाणा में अध्यक्ष पद के लिए बढ़ी खींचतान


🗒 रविवार, जून 24 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बदले तेवरों का असर हरियाणा में भी नजर आने लगा है। सोनिया गांधी की बेहद करीबी राज्यसभा सदस्य कुमारी सैलजा को राजस्थान कांग्रेस की चुनाव स्क्रीनिंग कमेटी की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद अब हाईकमान का पूरा फोकस हरियाणा पर है। यहां प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में जबरदस्त खींचतान चल रही है। राहुल गांधी जिस तेजी के साथ राज्यों में संगठन का चेहरा-मोहरा बदलने में लगे हुए हैं, उसे देखकर लग रहा कि हरियाणा में भी जल्द बदलाव की संभावना है।

सैलजा की राजस्थान में एंट्री से हरियाणा में अध्यक्ष पद के लिए बढ़ी खींचतान

हरियाणा कांग्रेस में बदलाव की मांग लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन यहां कुर्सी के तलबगार इतने अधिक हैं कि सबको खुश करने में पार्टी हाईकमान के पसीने छूट रहे हैं। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर को हटाकर किसी सर्वमान्य नए चेहरे की ताजपोशी के लिए हाईकमान पर जबरदस्त दबाव है। इसके लिए समस्त दावेदार अपने-अपने ढंग से दावेदारी और लाबिंग करने में जुटे हुए हैं।

हरियाणा चूंकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटा प्रदेश है, इसलिए यहां की राजनीतिक गतिविधियों का दिल्ली पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में कांग्रेस हाईकमान नए अध्यक्ष की ताजपोशी में किसी तरह की जल्दबाजी कर कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं। हरियाणा में कभी कुमारी सैलजा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की जबरदस्त राजनीतिक जोड़ी हुआ करती थी। हुड्डा के मुख्यमंत्री बनने के बाद दोनों के रिश्तों में दरार आ गई। तंवर को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग जब अधिक जोर पकड़ने लगी तो नए चेहरे के रूप में कुमारी सैलजा का नाम उछाला गया, लेकिन उन्हें राजस्थान भेज दिए जाने के बाद अब लाबिंग कर रहे नेताओं की आधी बाधा खुद-ब-खुद दूर हो गई है।सैलजा की राजस्थान में एंट्री का सबसे बड़ा फायदा हुड्डा खेमे को होगा। सैलजा और तंवर दोनों दलित हैं। तंवर समर्थकों की सोच है कि सैलजा के राजस्थान जाने से उनके नेता को अधिक राजनीतिक फायदा है, लेकिन उनका गणित यहां फिट नहीं बैठता। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पास 17 में से 13 विधायक हैं। उनकी रैलियों में भीड़ भी उम्मीद से कहीं अधिक जुट रही है।

ऐसे में हुड्डा समर्थकों ने अध्यक्ष पद की बागडोर अपने नेता को सौंपने का दबाव कांग्रेस हाईकमान पर बढ़ा दिया है। इसके लिए हुड्डा समर्थक आधा दर्जन से बार राष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। सैलजा की राजस्थान में एंट्री हुड्डा समर्थकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।कांग्रेस अध्यक्ष पद के दूसरे बड़े दावेदार गैर जाट नेता कुलदीप बिश्नोई हैं। उनकी राहुल गांधी से कई बार मुलाकात हो चुकी है। शुरू में यह गणित पेश किया गया कि हुड्डा को अध्यक्ष और कुलदीप बिश्नोई को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाया जाए, लेकिन कुलदीप समर्थक चाहते हैं कि उनके नेता को अध्यक्ष पद की बागडोर सौंपी जाए। कुमारी सैलजा के राजस्थान जाने के बाद कुलदीप बिश्नोई ने भी दिल्ली दरबार में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। उन्हें हुड्डा के साथ राजनीतिक गलबहियों का लाभ भी मिल सकता है।

अशोक तंवर अपनी कुर्सी को बरकरार रखने के लिए दिल्ली दरबार में डेरा डाले हुए हैं, जबकि कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय हो चुके रणदीप सिंह सुरजेवाला को भी हरियाणा की राजनीति में भाव दिया जा सकता है। कांग्रेस हाईकमान ने हालांकि गुटबाजी खत्म करने को तीन कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का फार्मूला भी दिया था, जिसे हुड्डा समर्थक खारिज कर चुके हैं।पूर्व सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय यादव और उनके बेटे चिरंजीव की राजनीतिक सक्रियता भी विरोधियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है, जबकि कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी अपनी धुन में हाईकमान और राजनीतिक कार्यक्रमों में सामंजस्य बैठाने का कोई मौका नहीं छोड़ रही हैं।

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