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मिशेल ने स्वीकारी दलाली की बात, यहां तय होता था सौदा


🗒 रविवार, जनवरी 06 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

संप्रग सरकार के दौरान रक्षा सौदों में दलाली का नया पिटारा खुल सकता है। अलग-अलग सौदों को लेकर सीबीआइ कई एफआइआर भी दर्ज कर सकती है। अगस्तावेस्टलैंड हेलीकाप्टर खरीद घोटाले में मुख्य दलाल क्रिश्चियन मिशेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कई सौदों में दलाली लेने व देने की बात कबूल की है। ईडी ने इस बारे में शनिवार को अदालत को भी अवगत करा दिया था।

मिशेल ने स्वीकारी दलाली की बात, यहां तय होता था सौदा

ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि क्रिश्चियन मिशेल सिर्फ अगस्तावेस्टलैंड के लिए ही बिचौलिये का काम नहीं करता था, बल्कि सरकार में अपनी ऊंची पहुंच के दम पर रक्षा उपकरण बनाने वाली कई कंपनियों के लिए भी दलाली करने लगा था। उनके अनुसार क्रिश्चियन मिशेल ने खुद पूछताछ में यह बात स्वीकार की है, लेकिन उन्होंने उन सौदों के बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया। उनके अनुसार फिलहाल मिशेल के दावे की पुष्टि की जा रही है। इस संबंध में सीबीआइ को भी जानकारी दे दी गई है। ईडी के पहले सीबीआइ मिशेल से 14 दिन की पूछताछ कर चुकी है।ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मिशेल के ईमेल में जिस तरह से सरकार के भीतर के क्रियाकलापों और राजनीतिक खींचतान की अंदरूनी बातों का उल्लेख है, उससे उसके सत्ता तंत्र में गहरे घुसपैठ की आशंका पहले से थी। इसीलिए उससे अगस्तावेस्टलैंड हेलीकाप्टर खरीद मामले से इतर मामलों के बारे में पूछताछ की गई। मिशेल ने स्वीकार किया कि उसने अपने संपर्को का इस्तेमाल अन्य रक्षा सौदों को अंतिम रूप देने में भी किया था। अगस्तावेस्टलैंड की तरह इन सौदों में करोड़ों रुपये की दलाली दी गई थी।

वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मिशेल ने रक्षा सौदों में दलाली के लिए दुबई को केंद्र बनाया था। वहीं रक्षा उत्पाद बनाने वाली संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों से बातचीत होती थी और वहीं से भारत आकर वह सरकार में अपने उच्च पदस्थ सूत्रों से बात करता था। दलाली की रकम की लेन-देन मूल रूप से दुबई में होती थी। इसके लिए मिशेल ने बाकायदा दुबई में कई कंपनियां बना रखी थी।हवाला कारोबारियों की मदद से वह आसानी से दुबई से भारत स्थित अपने संपर्को को पैसे भेज देता था। मिशेल ने बताया कि कई मामले में सरकार में बैठे उसके अधिकारी दुबई में ही रिश्वत की रकम लेना पसंद करते थे। ईडी के अधिकारी ने कहा कि मिशेल ने अगस्तावेस्टलैंड घोटाले में भी कुछ अधिकारियों व नेताओं को हवाला के मार्फत से दलाली की रकम दी थी। इसकी जांच की जा रही है और कुछ हवाला आपरेटर ईडी के रडार पर भी हैं।वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि तकनीकी रूप से ईडी रक्षा सौदों में दलाली का नया केस नहीं दर्ज कर सकता है। इसके लिए पहले सीबीआइ को एफआइआर दर्ज करनी होगी। उनके अनुसार सीबीआइ जल्द ही इन मामलों में पहले प्रारंभिक जांच का केस दर्ज कर रक्षा मंत्रालय से संबंधित सौदों की फाइल तलब करेगी और गड़बड़ी के संकेत मिलने के बाद एफआइआर दर्ज करेगी। जाहिर है इन मामलों में मिशेल को भी आरोपी बनाया जाएगा और नए सिरे से उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जाएगी। मिशेल को 22 दिसंबर को दुबई से प्रत्यर्पण कराकर भारत लाया गया था।

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