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SC ने पूछा, कोर्ट आदेश देता है तो उसे मानने में चुनाव आयोग को क्या दिक्कत है?


🗒 सोमवार, मार्च 25 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम और वीवीपीएटी मामले को लेकर चुनाव आयोग से पूछा कि अगर अगर कोर्ट इसे बढ़ाने का आदेश देता है तो आयोग को उसमें क्या दिक्कत है। कोर्ट ने आयोग से गुरुवार तक जवाब माँगा है। 1 अप्रैल को फिर सुनवाई होगी। बता दें कि विपक्षी दलों ने ईवीएम मशीनों से वीवीपीएटी मिलान का प्रतिशत बढ़ाकर 50 फ़ीसद करने की मांग की है। इससे पहले आयोग ने मांग का विरोध करते हुए कहा कि इसे बढ़ाने की ज़रूरत नहीं है। अभी प्रति विधानसभा दर से वीवीपैट मिलान होता है और उसमें कभी अंतर नहीं पाया गया। आयोग ने कहा कि वह स्वयं प्रक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए समय समय पर क़दम उठाता रहता है।  सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह वर्तमान में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक से ज्यादा वीवीपीएटी सैंपल सर्वे को क्या बढ़ा सकता है। इसके लिए 28 मार्च तक जवाब देने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा है कि वह वर्तमान में एक विधानसभा क्षेत्र से एक वीवीपीएटी सैंपल सर्वे लेने की व्यवस्था पर उसकी संतुष्टि का कारण बता सकता है। चुनावों में वीवीपीएटी के इस्तेमाल पर आंध्र प्रदेश के सीएम एन चंद्रबाबू नायडू सहित 21 विपक्षी नेताओं की याचिका पर 1 अप्रैल को सुनवाई करेगा।  

SC ने पूछा, कोर्ट आदेश देता है तो उसे मानने में चुनाव आयोग को क्या दिक्कत है?

आयोग की दलील पर कोर्ट ने कहा कि ऐसा ही था तो कोर्ट को वीवीपैट का आदेश देने मे क्यों दख़ल देना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि किसी भी संस्था को सुझावों से परहेज़ नहीं करना चाहिए, यहां तक की न्यायपालिका को भी नहीं, सुझाव बेहतरी के लिए होते हैं।बता दें कि विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू, अखिलेश यादव, के सी वेणुगोपाल, शरद पवार, अरविंद केजरीवाल, सतीश चंद्र मिश्र समेत विपक्ष के 21 नेताओं ने याचिका दायर की है। दरअसल, इस याचिका में EVM द्वारा होने वाले चुनाव में गड़बड़ी की बात कही थी और मांग की थी की 50 फीसदी तक VVPAT पर्चियों के EVM से मिलान किए जाएं।मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग को कोर्ट की सहायता के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति करने के लिए कहा था। गौरतलब है  इस याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत ने इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण के 1975 के फैसले में कहा था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संविधान की मूल संरचना का एक हिस्सा थे।याचिकाकर्ताओं में एनसीपी के वरिष्ठ नेता शरद पवार, कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, तृणमूल के डेरेक ओ. ब्रायन, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव, बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, डीएमके नेता एमके स्टालिन, सीपीएम के टीके रंगराजन, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूख अब्दुल्ला, सीपीआई के एसएस रेड्डी, जेडीएस के दानिश अली, राष्ट्रीय लोक दल के अजीत सिंह, एआईडीयूएफ के मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल, ‘हम’ के जीतन राम मांझी, प्रो. अशोक कुमार सिंह, टीडीपी और 'आप' आदि शामिल हैं।इसके अलावा एक्टिविस्ट सुनील अहिया और रामबिलास द्वारा भी एक याचिका दायर की गई है। एक्टिविस्ट सुनील अहिया और रामबिलास द्वारा भी एक याचिका दायर की गई है। जिसमें ईवीएमएस के सोर्स कोड में बदलाव की बात कही गई, जिससे इन्हें टैम्पर प्रूफ बनाया जा सके।सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह द्वारा दायर याचिका विक्रम सिंह की उस याचिका का खारिज कर दिया है जिसमें चुनाव प्रचार के दौरान बाइक रैलियों और रोड शो पर प्रतिबंध लगाई जाने की मांग की थी। याचिका में लोगों को होने वाली असुविधा और पर्यावरण को नुकसान की बात को आधार बनाया गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसा करने से पर्यावरण का नुकसान होता ही है साथ ही आयोग द्वारा जारी दिशा निर्देशों का भी उल्लंघन होता है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमें नही लगता, इस पर सुनवाई की ज़रूरत है।

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