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नहीं होगा सरकारी बैंकों का निजीकरण, अरुण जेटली ने खारिज की मांग


🗒 शनिवार, फरवरी 24 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की मांगों को खारिज कर दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान जेटली ने शनिवार को कहा कि यह काम ना तो इतना आसान है और ना ही राजनीतिक दल इसके लिए तैयार होंगे। जेटली ने पीएनबी घोटाला मामले में बैंकिंग क्षेत्र के नियामक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) समेत पीएनबी के ऑडिटर्स और बैंक के आंतरिक सुरक्षा तंत्र की जमकर आलोचना की है।

नहीं होगा सरकारी बैंकों का निजीकरण, अरुण जेटली ने खारिज की मांग

जेटली ने कहा, 'सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण के किसी भी प्रस्ताव को राजनीतिक दलों की सहमति की जरूरत होगी। इसके लिए बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट में संशोधन की भी दरकार होगी। मुझे नहीं लगता कि देश का राजनीतिक जगत सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण प्रस्ताव के पक्ष में खड़ा होगा। यह बेहद चुनौतीपूर्ण निर्णय है।' उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में पिछले दिनों सामने आए घोटाले के बाद सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण की चर्चा जोर पकड़ने लगी है।

गौरतलब है कि पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद फिक्की, एसोचैम, सीआइआइ समेत उद्योग जगत की कई अन्य शीर्ष संस्थाओं ने सार्वजनिक बैंकों में सरकार को अपनी हिस्सेदारी घटाने की मांग की थी। शुक्रवार को फिक्की के प्रेसीडेंट रशेष शाह ने कहा था कि वित्त मंत्री से उनकी मुलाकात हुई थी। शाह के मुताबिक, उन्होंने जेटली से आग्रह किया था कि सार्वजनिक बैंकों का चरणबद्ध तरीके से निजीकरण किया जाए और आखिर में सिर्फ दो या तीन सरकारी बैंक बच जाएं।

एसोचैम ने भी पीएनबी में पिछले दिनों अरबपति ज्वेलरी कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि जेम्स के मालिक मेहुल चोकसी द्वारा 11,400 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला कर लेने के बाद सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण की मांग एकदम से जोर पकड़ने लगी। उद्योग जगत की एक अन्य अग्रणी संस्था एसोचैम ने भी सरकार को सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी घटाकर 50 फीसद से नीचे लाने का आग्रह किया था। संस्था के मुताबिक, इससे वे निवेशकों और जमाकर्ताओं के हितों का जिम्मेदारीपूर्वक ध्यान रख सकेंगे।

जेटली ने नियामक, ऑडिटर्स को सुनाई खरी-खोटी
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पीएनबी घोटाला मामले में बैंकिंग क्षेत्र के नियामक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) समेत पीएनबी के ऑडिटर्स और बैंक के आंतरिक सुरक्षा तंत्र की जमकर आलोचना की है। जेटली ने कहा कि नियामक और ऑडिटर्स की अनेदखी और कामचलाऊ रवैये की वजह से ही पीएनबी को यह दिन देखना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि धोखेबाजों को सजा देने के लिए कानून में सख्ती की जरूरत पड़ेगी, तो की जाएगी। नीरव मोदी या मेहुल चोकसी का नाम लिए बिना जेटली ने स्पष्ट तौर पर कहा कि कई चरणों का ऑडिटिंग तंत्र होने के बावजूद अगर ऐसी घटना हुई तो इसका मतलब यह है कि या तो किसी न किसी स्तर पर इनकी जान-बूझकर अनदेखी की गई, या ऑडिटर्स के कामचलाऊ रवैये की वजह से यह अब तक पकड़ में ही नहीं आ सका। जेटली ने कहा कि कानून का पालन करवाना नियामक का ही काम है। उनके पास तीसरी आंख होनी चाहिए और वह हमेशा खुली होनी चाहिए। उन्होंने देश के कारोबार जगत को भी आत्ममंथन करने की सलाह देते हुए कहा कि उन्हें कारोबारी नैतिकता के बारे में भी सोचना चाहिए और हर वक्त यही नहीं देखना चाहिए कि सरकार उनके लिए क्या कर रही है।

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