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शराब ठेकों की लाइसेंस फीस पर केंद्र व राज्यों में रार, जीएसटी काउंसिल पहुंचा मामला


🗒 रविवार, मार्च 11 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

जीएसटी काउंसिल में अब तक सभी फैसले भले ही आम राय से हुए हों लेकिन शराब पर लाइसेंस फीस जीएसटी के दायरे में आती है या नहीं, इसे लेकर केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद सामने आ गए हैं।

शराब ठेकों की लाइसेंस फीस पर केंद्र व राज्यों में रार, जीएसटी काउंसिल पहुंचा मामला

केंद्र का कहना है कि शराब पर लाइसेंस फीस पर जीएसटी बनता है जबकि राज्यों की दलील है कि यह राशि एक्साइज ड्यूटी का हिस्सा है, इसलिए इस पर जीएसटी नहीं लगाया जा सकता। अब यह मामला जीएसटी काउंसिल पहुंच गया है। काउंसिल ही यह करेगी कि राज्य सरकारें शराब के ठेके देने के लिए जो लाइसेंस फीस लेती हैं उन पर जीएसटी लगे या नहीं।

सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में शनिवार को हुई जीएसटी काउंसिल की 26वीं बैठक में अतिरिक्त एजेंडा के रूप में इस मुद्दे पर चर्चा होनी थी लेकिन आखिरी समय पर इसे टाल दिया गया। अब इस पर अगली बैठक में चर्चा होने के आसार हैं। दरअसल इस मामले की शुरुआत उस समय हुई जब जीएसटी अधिकारियों ने कुछ राज्यों में शराब पर लाइसेंस फीस पर जीएसटी का भुगतान करने का नोटिस शराब ठेके वालों को भेज दिया। राज्यों ने इसका विरोध किया।

जो राज्य शराब पर लाइसेंस फीस पर जीएसटी का विरोध कर रहे हैं उनमें हरियाणा, पंजाब, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। वित्त सचिव हसमुख अढिया भी इन राज्यों के अधिकारियों के साथ बैठक कर चुके हैं लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। यही वजह है कि केंद्र इस मामले को लेकर जीएसटी काउंसिल पहुंचा है।

राज्यों की मांग से सहमत नहीं है जीएसटी काउंसिल

सूत्रों के मुताबिक राज्यों की दलील है कि शराब के ठेकों की लाइसेंस फीस पर जीएसटी नहीं लगना चाहिए क्योंकि यह टैक्स की तरह होती है और टैक्स पर टैक्स नहीं लगाया जा सकता। राज्यों का यह भी कहना है कि शराब जीएसटी के दायरे से बाहर है, इसलिए लाइसेंस फीस पर जीएसटी नहीं लग सकता। कुछ राज्यों की मांग है कि शराब पर लाइसेंस फीस का नाम बदलकर 'रजिस्ट्रेशन वेंड चार्ज' कर उसे जीएसटी से छूट प्राप्त सरकारी पंजीकरण सेवाओं की सूची में डाल दिया जाए ताकि इस पर जीएसटी नहीं लगे। हालांकि जीएसटी काउंसिल की फिटमेंट समिति इससे सहमत नहीं है। समिति का विचार है कि लाइसेंस फीस का महज नाम बदलने से यह जीएसटी के दायरे से बाहर नहीं मानी जा सकती, इसके लिए कानून में जरूरी बदलाव भी करने की जरूरत पड़ सकती है। वैसे तेलंगाना ने एक अध्यादेश जारी कर शराब पर लाइसेंस फीस का नाम बदलकर उत्पाद शुल्क कर भी दिया है। राज्य की दलील है कि अब उस पर जीएसटी नहीं लगाया जा सकता।

सूत्रों के मुताबिक पंजाब की दलील है कि शराब पर लाइसेंस फीस एक दंडात्मक शुल्क की तरह है और यह राज्य के राजस्व का हिस्सा है, इसलिए इस पर जीएसटी नहीं लगाया जा सकता। वहीं हरियाणा और हिमाचल प्रदेश ने भी शराब पर लाइसेंस फीस पर जीएसटी लगाने संबंधी विचार का विरोध किया है।

शराब पर लाइसेंस फीस कितनी अहम इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि इससे उत्तर प्रदेश को लगभग 1500 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश को 380 करोड़ रुपये से अधिक राशि मिलती है। सूत्रों का कहना है कि काउंसिल अगर शराब पर लाइसेंस फीस पर जीएसटी लगाने का फैसला करती है तो इसका असर जीएसटी लागू होने से पूर्व अप्रैल 2016 से जून 2017 की अवधि के दौरान इस पर सेवा कर लागू होने के रूप में भी पड़ेगा।

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