स्ट्रोक के बाद काम करना मस्तिष्क के लिए अच्छा

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स्ट्रोक के बाद काम करना मस्तिष्क के लिए अच्छा


🗒 शनिवार, जनवरी 27 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

स्ट्रोक पीड़ितों को लेकर एक नया अध्ययन किया गया है। इसमें पाया गया कि स्ट्रोक से पहले और इससे उबरने के बाद भी काम करने से पीड़ितों के मस्तिष्क की सेहत अच्छी हो सकती है। शोधकर्ताओं ने कामकाज करने की उम्र में स्ट्रोक से उबरे 252 वयस्कों का अध्ययन किया। उन्होंने स्ट्रोक के एक और दो साल बाद इनके मस्तिष्क और स्मृति संबधी बदलावों का विश्लेषण किया।

स्ट्रोक के बाद काम करना मस्तिष्क के लिए अच्छा

इजरायल के तेल अवीव सोरास्की मेडिकल सेंटर के शोधकर्ता ईनर बेन असायग ने कहा, ‘अध्ययन से जाहिर हुआ कि स्ट्रोक के चलते डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है और व्यावसायिक स्थिति स्ट्रोक से उबरे लोगों पर प्रभाव डाल सकती है।’ अध्ययन में पाया गया कि कामकाजी लोगों की अपेक्षा स्ट्रोक से उबरने वाले बेरोजगारों में दो साल के अंदर स्मृति में गिरावट का खतरा तीन गुना ज्यादा हो सकता है।वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक ईजाद की है जिससे मस्तिष्क के अंदर फैली तंत्रिका कोशिकाओं के जाल का नक्शा तैयार किया जा सकता है। इसकी मदद से अंगों के काम करने के तरीके को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, मानव मस्तिष्क में अरबों न्यूरॉन्स का एक जटिल जाल फैला है। ये विद्युत कंपन और रासायनिक संकेतों के जरिये सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। हालांकि न्यूरो वैज्ञानिक नींद, यादों को संजोने और निर्णय लेने जैसी मस्तिष्क की कार्य क्षमताओं को समझने में प्रगति कर चुके हैं, लेकिन मौजूदा विधियों से पूरे मस्तिष्क के न्यूरल कनेक्शनों को देख पाना संभव नहीं है।अमेरिका के कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने फलों पर मंडराने वाली मक्खी ड्रोसोफिला के उपयोग से नई विधि विकसित की है। इससे इन न्यूरल कनेक्शनों को आसानी से देखा जा सकेगा। 

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