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चंद्रग्रहण के समय मंगला आरती के बाद यूपी के तमाम मंदिरों के पट बंद


🗒 बुधवार, जनवरी 31 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

चंद्रग्रहण के कारण बुधवार को मंगला आरती के बाद मंदिरों के पट बंद हो गए। अयोध्या, मथुरा समेत उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख मंदिरों के परिसर में भजन कीर्तन शुरू है। ग्रहण का समय सायं 5:35 से रात्रि 8:42 बजे के बीच का है लेकिन सूतक ग्रहण काल शुरू होने से नौ घंटा पूर्व ही शुरू हो गया है। सूतक लगने के पूर्व ही पूजन-अर्चन के साथ मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। मंदिरों के पट भले ही बंद हों लेकिन भजन कीर्तन चल रहे हैं। हालांकि पुष्टिमार्गी मंदिरों में पट खुले हैं। आज खग्रास चंद्र ग्रहण होने से मथुरा-वृंदावन समेत समूचे ब्रज के अधिकांश मंदिरों के पट मंगला आरती के बाद बंद हैं। अब इन मंदिरों में दर्शन कल होंगे। दाऊजी का मंदिर ग्रहण खत्म होने के बाद खोल दिया जाएगा। फिलहाल रात्रि 8:42 बजे ग्रहण मोक्ष के साथ मंदिरों के पट खोले जा सकेंगा। अयोध्या में रामलला और मथुरा में राधाकृष्ण दर्शन की लालसा रखने वाले भक्तों के संकट है। यही हाल बाबा विश्वनाथ के दर्शन की इच्छा रखने वालों का होगा। यही हाल यूपी के अन्य मंदिरों का होगा।

चंद्रग्रहण के समय मंगला आरती के बाद यूपी के तमाम मंदिरों के पट बंद

अयोध्या में महंत रामचंद्रदास के अनुसार ग्रहण के संक्रमण से बचाने के लिए खाद्यान्न में तुलसी का पत्र अथवा कुश डालकर रखें। बच्चों, वृद्धों एवं रोगियों को छोड़कर बाकी लोग ग्रहण काल में खाने-पीने से बचें। इस बीच गुरुमंत्र एवं ईष्ट मंत्र का जाप कर उसे मलिनता से बचाने का संकल्प भी पूरा करें। आज वृंदावन में मंदिर भोर में ही पूजा पाठ के बाद बंद कर दिए है। इससे भक्तों को ठाकुर जी के दर्शन नहीं मिल सकेंगे। ठा. बांकेबिहारी मंदिर में भी सुबह पांच बजे ठाकुरजी के पट खुले और सेवा के बाद सुबह आठ बजे बंद कर दिए गए। मथुरा में बांकेबिहारी मंदिर प्रबंधक मुनीश कुमार शर्मा ने बताया कि 31 जनवरी सुबह पांच बजे मंदिर के पट खुलेंगे। 5.10 बजे श्रृंगार आरती और 5.15 बजे पर्दा डालने के बाद राजभोग सेवा और राजभोग आरती 5.55 बजे होने के बाद और 6 बजे पट बंद कर दिए गए। चंद्रग्रहण के दौरान और सूतककाल के दौरान सभी मंदिर, आश्रम और मठों में दर्शन भले बंद हो लेकिन श्रद्धालु भजन-कीर्तन में लीन हैं।

सामान्य तौर पर अयोध्या में मंदिरों का कपाट मध्याह्न 12 से अपराह्न चार बजे तक बंद होता है और इस बीच भगवान को शयन कराया जाता है पर ग्रहण के सूतक की वजह से अलस्सुबह ही मंदिरों में पूजन-अर्चन शुरू हुआ और सूतक लगते-लगते भोग लगाकर भगवान को शयन करा दिया गया। इसके बाद कनकभवन, हनुमानगढ़ी जैसे वे मंदिर भी सन्नाटे में डूबे नजर आए, जहां सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं का तांता लगता है। ग्रहण की मर्यादा के अनुरूप साधकों ने पूरे दिन मौन साधना जारी रखी। इससे पूर्व सूतक लगने के साथ सरयू स्नान के लिए भी श्रद्धालु उमड़े। यद्यपि अधिसंख्य श्रद्धालुओं ने आचमन-मत्थवान के साथ सरयू पूजन-गोपूजन किया और दान कर ग्रहण का पुण्य अर्जित किया। ग्रहण मोक्ष के साथ ही मंदिरों के कपाट खुले, घंटियां बजीं और भगवान का पूजन-अर्चन शुरू किया गया। 

नाका हनुमानगढ़ी पर ग्रहण का विशेष अनुष्ठान संचालित हुआ। परंपरा के अनुरूप मंदिर का कपाट प्रात: सूतक लगते ही बंद हो गया पर पीठाधिपति महंत रामदास के संयोजन में मौन साधना का क्रम संचालित होता रहा। सायं 5.35 बजे ग्रहण लगने के साथ ही महंत की अगुवाई में श्रद्धालुओं का जत्था भजन-कीर्तन करता हुआ गुप्तारघाट पहुंचा, जहां स्नान के बाद पूजन-दान का क्रम चला। ग्रहण मोक्ष के साथ एक ओर गर्भगृह में पूजन-अर्चन  का क्रम शुरू हुआ। दूसरी ओर संपूर्ण मंदिर परिसर की सफाई-धुलाई का अभियान छिड़ा।

 

 

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