आपके मोबाइल में होगा ये 'मंडीमैन' तो चिंता होगी दूर, मिलेगा चैन

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आपके मोबाइल में होगा ये 'मंडीमैन' तो चिंता होगी दूर, मिलेगा चैन


🗒 शनिवार, फरवरी 03 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

दुनिया तेजी से डिजिटल होती जा रही है। दुनियाभर के सामान आप घर बैठे अपने मोबाइल के जरिए ऑर्डर कर सकते हैं। खासकर स्मार्ट फोन के आने से लगता है जैसे दुनिया सिमटती जा रही है और तमाम चीजें छोटे से मोबाइल के एप्स में समा गई है। यह ट्रेंड सिर्फ बड़े शहरों में ही नहीं बल्कि टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में भी देखने को मिल रहा है। ऐसा ही कुछ कोलसिटी धनबाद में भी हो रहा है...

आपके मोबाइल में होगा ये 'मंडीमैन' तो चिंता होगी दूर, मिलेगा चैन

घर में मेहमान आ गए हैं और आप बाजार नहीं जाना चाहते हैं। मुश्किल यह है कि घर में न हरी सब्जियां हैं और न ही राशन। बड़े शहर में होते तो बस एक कॉल करते और सारी चीजें हाजिर हो जातीं। धनबाद जैसे शहर में यह थोड़ा मुश्किल सा लगता है। लेकिन अब यहां भी नो टेंशन, क्योंकि यहां मंडीमैन ने दस्तक दे दी है।

क्या है मंडीमैन

यह मंडीमैन एक स्टार्ट अप है, जिसकी शुरुआत शहर के पीके राय कॉलेज के 12वीं के छात्र विशाल ने की है। आपको बस उसके ऑनलाइन ग्रॉसरी एप में ऑर्डर करना है। उसके बाद आप जब चाहेंगे सामान उतनी जल्दी आपके घर हाजिर होगा। धनबाद कार्मिक नगर में रहने वाले इंटर के इस छात्र ने अब तक तीन सौ घरों को अपने साथ जोड़ लिया है।मंडीमैन एप से बुकिंग करने पर 10 किलोमीटर की दूरी वाले घरों तक सामान पहुंचेगा। यह दूरी विशाल के कार्मिक नगर स्थित आवास से तय होगी। बुकिंग के लिए स्मार्ट फोन पर गूगल के प्ले स्टोर में जाकर मंडीमैन एप डाउनलोड करना होगा। एप से कनेक्ट होते ही अन्य सूचनाएं भी आपको मिल जाएंगी।

घर तक सामान पहुंचाने के लिए आपको न्यूनतम 10 रुपये चुकाने होंगे। 1500 रुपये की खरीदारी पर फ्री डिलीवरी की सुविधा मिलेगी। बुकिंग के बाद अधिकतम तीन घंटे में आपका सामान घर पहुंचेगा। अगर जल्दबाजी है तो उसके लिए क्विक डिलीवरी का विकल्प चुनना होगा। जितना समय आप चुनेंगे, उतनी देर में सामान घर पहुंचेगा।

पीके राय कॉलेज के 12वीं के कला संकाय के छात्र विशाल के अनुसार उसके पिता विजय कुमार महतो किसान हैं जो गांव में खेती कर किसी तरह रोटी का जुगाड़ करते हैं। पिता को संबल बनाने के लिए ही उसने स्टार्ट अप शुरू करने का निर्णय लिया। स्टार्ट अप के लिए सरकार फंड देती है यह सोचकर उसने बैंकों का चक्कर लगाना शुरू किया। कई बैंकों की खाक छानने के बाद भी उसे मदद नहीं मिली। आखिरकार पिता की जमा पूंजी से ही उसने ऑनलाइन ग्रॉसरी एप विकसित की। फिर धनबाद जैसे छोटे शहर में स्टार्ट अप शुरू किया। बकौल विशाल उसके स्टार्ट अप का रिस्पांस काफी अच्छा है। खास तौर पर शहर के रिहाइशी इलाकों से ऑर्डर मिल रहे हैं। रोज कई लोग उसके एप से जुड़ रहे हैं।

सब्जी-भाजी व राशन के बाद अब जल्द ही डॉगी और अन्य पालतू जानवरों की होम डिलीवरी सेवा लांच करने की तैयारी है। जर्मन शेफर्ड सहित अन्य ब्रीड के डॉगी के लिए संबंधित लोगों से बातचीत हो चुकी है। अगले एक-दो माह में इनको भी स्टार्ट अप के कारोबार से जोड़ा जाएगा।

धनबाद में मिली सफलता के बाद अपने इस कारोबार को दूसरे शहरों तक विस्तार देने की भी प्लानिंग विशाल कर रहे हैं। कारोबार का दायरा बढ़ाकर वह अपनी आर्थिक संपन्नता के साथ-साथ अपने बेरोजगार साथियों को भी रोजगार के अवसर देने का ख्वाब देख रहा है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि इसी वर्ष रांची और पटना जैसे शहरों में उसका ऑनलाइन बाजार काम करने लगेगा।

विशाल कहते हैं, कोल सिटी के युवा अपने मन से यह निकाल दें कि छोटे शहरों में स्टार्ट अप सफल नहीं हो सकेंगे। अगर आप अपने ग्राहकों को संतोषजनक वस्तुएं होम डिलीवरी की सुविधा के साथ देंगे तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। 

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