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पुलिसकर्मियों की 'अवकाश योजना'पाच साल से छुट्टी पर है


🗒 रविवार, जून 10 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

 एक जून 2013 को राजधानी के गोमतीनगर थाने में पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने की एक पहल शुरू की गई थी। बड़े-बड़े वादे हुए, तैयारिया शुरू की गईं। यहा तक की इस पहल को अमली जामा पहनाने के लिए शोध तक किए गए, लेकिन आज तक कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकल सका। पाच साल पहले पुलिसकर्मियों के लिए बनी साप्ताहिक अवकाश योजना छुट्टी पर है और पुलिस वेलफेयर की बात करने वाले आलाधिकारी सन्नाटे में हैं।

पुलिसकर्मियों की 'अवकाश योजना'पाच साल से छुट्टी पर है

ऐसे शुरू हुई थी तैयारी

वर्ष 2013 में तत्कालिन डीआइजी नवनीत सिकेरा ने पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश दिलाने के लिए पहल शुरू की थी। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गोमतीनगर थाने के पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देकर शुरूआत की गई। इसका नतीजा भी सफल और सकारात्मक रहा, लेकिन विभाग के जिम्मेदार इस पहल को अमली जामा पहनाने में नाकाम रहे। आपको यह बता दें कि जब इस योजना की शुरूआत की गई थी तब छुट्टी लेने वाले पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य का परीक्षण कराया जाता था। जाच में पुलिसकर्मियों का ब्लड प्रेशर व एक्टिव मशीन से उनके नींद, थकान एवं तनाव के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती थी। शोध में अवकाश देने की योजना सार्थक साबित हुई थी और पुलिसकर्मी भी मानसिक व शारीरिक तौर पर स्वस्थ पाए गए थे। यही नहीं छुट्टी हासिल करने वाले पुलिसकर्मियों ने प्रतिक्रिया में इस पहल को लाभकारी बताया था। तनाव में यूपी 100 के पुलिसकर्मी

दारोगा रामरतन के घरवालों ने छुट्टी नहीं मिलने के कारण आत्महत्या करने का आरोप लगाकर एक बार फिर पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यूपी 100 में तैनात पुलिसकर्मी तनाव महसूस कर रहे हैं। दरअसल, पीआरवी पर तैनात इन पुलिसकर्मियों को 12 घटे तक ड्यूटी करनी पड़ रही है। पहले इनकी तैनाती थानावार की गई थी, जिसमें वह संबंधित थाने की सूचना पर ही पहुंचते थे। हालाकि अब यह सीमा बढ़ा दी गई है और इन पुलिसकर्मियों को 10 किलोमीटर तक की सीमा तक सूचनाएं प्राप्त होने पर जाना पड़ता है।

घटनाओं से नहीं ले रहे सबक

मेरठ में तैनात दारोगा अजीत सिंह (2011 बैच) ने हाल में ही तत्कालिन एसएसपी मंजिल सैनी को छुट्टी नहीं मिलने के कारण इस्तीफा भेजा था। इस प्रकरण से विभाग में हो-हल्ला मचा था, लेकिन थोड़े दिन बाद ही सबकुछ शात हो गया। यही नहीं राजधानी में तैनात एक सिपाही धर्मेद्र ने भी छुट्टी नहीं मिलने पर पत्‍‌नी से तलाक होने की बात लिखी थी। इसके बाद धर्मेद्र को छुट्टी दी गई थी। यही नहीं एएसपी राजेश साहनी की मौत का कारण भले ही स्पष्ट नहीं हो सका है, लेकिन छुट्टी के दिन उनके कार्यालय में मौजूद होने की स्थिति से आकलन लगाया जा सकता है कि पुलिस पर काम के दबाव की स्थिति क्या है? बावजूद इसके ऊपर बैठे अधिकारी पूर्व में किए गए आदेशों का पालन सुनिश्चित नहीं करा पा रहे हैं। साल में महज 60 छुट्टी:

पुलिसकर्मियों को अन्य सरकारी कर्मचारियों की अपेक्षा वर्ष में महज 60 छुट्टिया ही दी जाती हैं। इनमें 30 सीएल और 30 ईएल शामिल हैं। वहीं पूर्व में दिए गए आदेश में 10 दिन में एक छुट्टी देने की बात छलावा साबित हो रही है। इससे पुलिस वालों के परिवारीजन आहत हैं।

सिपाहियों से विवाद की भी सामने आई बात

भदोखर थाना क्षेत्र के मुलिहामऊ गाव निवासी दारोगा रामरतन ने शुक्रवार देर रात रेलवे कालोनी ऐशबाग लखनऊ में अपनी ही लाइसेंसी बंदूक से खुद को गोली मारी थी। कालोनी में रहने वाले सिपाहियों से उसकी अनबन भी चल रही थी। छुट्टी न मिल पाने के साथ सिपाहियों से विवाद रामरतन का तनाव बढ़ाता गया। मुलिहामऊ निवासी रामरतन वर्मा (57) पुत्र देवनाथ हरदोई के कछौना थानाअंतर्गत यूपी-100 की पीआरवी पर तैनात थे। करीब 15 वर्षो से रामरतन रेलवे कालोनी में किराये के कमरे में रहते थे। जब भी लखनऊ आते यहीं रुकते। यहा आसपास के कमरों में भी सिपाही ही रहते थे। उनके भाई लक्ष्मीकात ने बताया कि राम रतन का सिपाहियों से किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था, लेकिन वह कौन सी बात थी इसका उन्हें नहीं पता। शुक्रवार सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक उन्होंने ड्यूटी की। रात नौ बजे वे थाने से लखनऊ के लिए निकले। यहा देर रात उनके आत्महत्या करने की बात पता चली। सम्मान के साथ अंतिम संस्कार: शनिवार दोपहर दो बजे सिपाही का शव पैतृक गाव लाया गया। यहा सिटी मजिस्ट्रेट आलोक कुमार, सीओ सिटी शेषमणि उपाध्याय और इंस्पेक्टर भदोखर अशोक कुमार तिवारी मौजूद थे। रामरतन का अंतिम संस्कार गाव में ही किया गया।

साथ रखते थे लाइसेंसी बंदूक:

सिपाही रामरतन के कोई बेटा नहीं है, इसलिए उनकी पत्‍‌नी शिवरती की देखभाल के लिए छोटी बेटी साधना गाव में ही रहती थी। राम रतन ने बीस साल पहले बंदूक का लाइसेंस लिया था। वह बंदूक हमेशा अपने साथ ही रखते थे।

2021 में होना था रिटायरमेंट :

अमीनाबाद कोतवाली में तैनात दारोगा देव प्रकाश यादव देर रात ड्यूटी करके लौटे तो उन्होंने खून से लथपथ रामरतन का शव तखत पर पड़ा देखा। तखत के पास ही नीचे रामरतन की बंदूक भी पड़ी थी। उनकी सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस रामरतन को ट्रॉमा सेंटर ले गई, जहा डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रामरतन वर्ष 1981 में सिपाही पद पर भर्ती हुए थे। 2021 में उनका रिटायरमेंट था।

इस्तीफा देना चाहते थे, विभाग पर प्रताड़ना का आरोप: भाई लक्ष्मीकात ने बताया कि 22 मई को रामरतन ड्यूटी करके बिना छुट्टी के शाम पाच बजे के करीब मुलीहामऊ गाव आए थे। उनकी पत्‍‌नी शिवरती ने रामायण पाठ कराया था। इसमें शामिल होकर अगले ही दिन तड़के सुबह तीन बजे ही रामरतन ड्यूटी के लिए निकल गए। लक्ष्मीकात के मुताबिक छुट्टी न मिलने से परेशान होकर रामरतन ने इस्तीफा देने की भी बात कही थी। वहीं, पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे रामरतन के दामाद रामअचल ने विभाग पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है।

वादों संग तैयारिया भी हुईं, नहीं निकला सकारात्मक परिणाम। पुलिसकर्मियों पर 12 से 16 घटे तक काम का दबाव।

क्या कहना है पुलिस का?

सीओ सिटी शेषमणि उपाध्याय का कहना है कि राम रतन का सम्मान के साथ गाव में ही अंतिम संस्कार कराया गया। उन्होंने खुदकुशी क्यों की, इस संबंध में जानकारी नहीं है। लखनऊ पुलिस ही इस संबंध में जानकारी उपलब्ध करा सकती है।

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