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बड़ा बदलाव ला सकता है पुलिस सुधार आयोग


🗒 सोमवार, अक्टूबर 29 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

शामली के शहीद अंकित कुमार तोमर के गांव के संपर्क मार्ग का नाम अब उनके नाम पर होगा। पिछले सप्ताह पुलिस स्मृति दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस का मनोबल बढ़ाने वाली यह अकेली घोषणा नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि जल्दी ही सवा लाख सिपाहियों की भर्ती की जाएगी जिससे पुलिस वालों को साप्ताहिक अवकाश न मिलने की समस्या दूर हो जाएगी।

बड़ा बदलाव ला सकता है पुलिस सुधार आयोग

लखनऊ के विवेक तिवारी हत्याकांड के बाद पुलिस में जैसी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी, उसके आलोक में यह घोषणा अपेक्षित थी और यह मरहम भी साबित हुई। यूं तो योगी ने और भी घोषणाएं कीं पर सबसे अहम है, पुलिस आधुनिकीकरण के लिए तीन सदस्यीय आयोग बनाने का निर्णय। यूपी पुलिस को आदिम बताने वाली तो कई कहानियां हैं लेकिन, वह जिन विषम स्थितियों और दबावों में काम करती है, वे सामने नहीं आ पाते। दारोगा और सिपाही वर्षों बिना छुट्टी ड्यूटी करते रहते हैं। इससे वे हमेशा तनाव में रहते हैं और इसीलिए कई बार आत्महत्या तक कर बैठते हैं। खराब कानून व्यवस्था के कारण ही यूपी आने में उद्यमियों के हौसले पस्त हो जाते हैं। इसलिए यदि योगी सरकार वास्तव में पुलिस का आधुनिकीकरण कर सकी तो यह उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था बेहतर करने की दिशा में बड़ा और स्थायी कदम होगा।कुछ महीनों पहले जब राज्य सरकार ने लखनऊ में बड़ी इन्वेस्टर्स मीट की तो उसी समय कुछ स्वर उठे कि इससे भला किसानों का क्या हित सधेगा। इस हफ्ते लखनऊ में तीन दिन का कृषि कुंभ आयोजित करके सरकार ने आलोचकों को जवाब दे दिया। कुंभ में लगी प्रदर्शनी में जिस तरह प्रदेश भर के किसानों की बड़ी भागीदारी रही, उससे आयोजन की उपयोगिता साबित हो रही थी।

दूसरे दिन कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने घोषणा की कि तीन कृषि यंत्र एक साथ खरीदने वाले किसान को सरकार 80 और एक यंत्र खरीदने पर 50 प्रतिशत अनुदान देगी। कुंभ में हुई गोष्ठी में कृषि उत्पादन आयुक्त का एक सुझाव यदि लागू हुआ तो बड़ा बदलाव ला सकता है। उनका कहना था कि किसानों से हर माह उनका अनाज खरीदना चाहिए। इससे गोदामों का खर्च बचेगा और तब इस पैसे का उपयोग किसानों को उनकी उपज का अधिक मूल्य देने में होगा।क्या यह संभव है कि किसी भाजपा सरकार का कोई मंत्री यह कहे कि मंदिर जरूरी नहीं। शनिवार को यह डंके की चोट पर कहा गया। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर ने लखनऊ में बड़ी रैली की और भाजपा अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री तक को सीधे ललकारा। उन्होंने हर वह बात कही जो भाजपा के खिलाफ जाती है।राजभर मंदिर के विरोध में बोले। कहा, भाजपा लोगों को बांट रही है। कहा, उन्हें विधानसभा में बोलने नहीं दिया जाता। राजभर यह भी कह गए कि वह भाजपा के गुलाम नहीं हैं। उनकी चुनौती पर सरकार और संगठन दोनों चुप हैं। जाहिर है, या तो यह बयानबाजी भाजपा की रणनीति का हिस्सा है या फिर लोकसभा चुनाव के समय वह पूर्वांचल में बड़ी ताकत रखने वाले राजभरों को नाराज नहीं करना चाहती, इसलिए असहाय है। वैसे भी राजभर मंत्री बनने के बाद से ही सरकार के विरोध में मुखर हैं।लोकसभा चुनाव की दृष्टि से लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, योगी सरकार और भाजपा संगठन के बीच हुई समन्वय बैठक गत सप्ताह की महत्वपूर्ण घटना है। इसमें जहां कार्यकर्ताओं ने अपने विधायकों-मंत्रियों पर कई आरोप लगाए, वहीं यह भी साफ हो गया कि अगले लोकसभा चुनाव का बड़ा एजेंडा क्या रहने वाला है। यह साफ-साफ कहा गया कि कार्यकर्ता अपने सभी मतभेद भुला दें क्योंकि हिंदुत्व की रक्षा इस समय का बड़ा प्रश्न है और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वापस लाना आवश्यक है। 

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