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पीलीभीत में सर्पदंश से परिवार के तीन सदस्यों की मौत


🗒 बुधवार, जुलाई 05 2017
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

बीसलपुर के एक घर में बेटे का जन्म होने पर नामकरण संस्कार में मनाई जा रही खुशियों को उस समय ग्रहण लग गया जब सर्पदंश से शिशु की मां सहित परिवार के तीन लोगों को डस लिया। तीनों मौत के मुंह में समा गए। मौत के मुंह में समाई मां का दूध पीने से नवजात शिशु की हालत भी गंभीर है। हादसे से परिवार में कोहराम मचा है। उल्लेखनीय है कि गंगा, सई और लोन नदियों के इर्दगिर्द जहरीले सांपों में करेंट और कोबरा सांप बहुतायत से पाए जाते हैं। 

पीलीभीत में सर्पदंश से परिवार के तीन सदस्यों की मौत

बीसलपुर के मुहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी हेमराज की पत्नी दुरूपा देवी (75) अपनी पुत्रवधू आशादेवी (50) पत्नी रामभरोसे लाल के साथ बरेली जनपद के भुता थाना क्षेत्र के ग्राम अहिरोला में अपनी पौत्री वेबी के घर नामकरण संस्कार में शामिल होने मंगलवार को गई थीं। बेवी को पुत्र का जन्म होने पर पूरे परिवार में खुशी छाई थी। नामकरण संस्कार हंसी खुशी से मनाया गया। रात में परिजन भोजन के बाद सो गए। बेबी कमरे में बेड पर लेटकर शिशु को दूध पिला रही थी। कमरे में जमीन पर बिछे विस्तर पर दुरूपा देवी व उनकी पुत्र वधू आशा लेटी थीं। इसी दौरान सर्प वहां आया उसने दुरूपा व आशा को डस लिया और फइर विस्तर पर पहुंचकर बेबी को भी निशाना बनाया। एक साथ परिवार के तीन लोगों को सर्प डसने से घर में कोहराम मच गया। झाड़ फूंक करने वाले से कोई लाभ नहीं हुआ और तीनों लोगों की सांसे थम गई। बच्चे का एक निजी चिकित्सालय में उपचार हो रहा है। 

जहरीला सांप जब डंसता है तो उस स्थान पर ऊपर-नीचे दांत के निशान बन जाते हैं। जहां घाव होता है वहां रेल की पटरियों की तरह दो समानांतर रेखाएं बन जाती हैं। मरीज की आंखे बंद होने लगती हैं। उसकी आवाज मुंह से कम नाक से ज्यादा आने लगती है। साथ ही पेट में दर्द और मुंह से लार भी आती  है। शरीर का रंग नीला पडऩे लगता है। ये लक्षण होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र मरीज को ले जाना चाहिए। दावा, सभी स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध एएसवीएंटी स्नेक विनम इंजेक्शन सर्प दंश पर मरीज को लगाया जाता है। स्वास्थ्य महकमे का दावा है कि सभी 18 सीएचसी व 49 पीएचसी में पांच-पांच इंजेक्शन उपलब्ध हैं। जिला अस्पताल में 300 से ज्यादा इंजेक्शन स्टाक में हैं। वहीं रिकार्ड बताते हैं कि सीएचसी व पीएचसी पर न के बराबर ही इन इंजेक्शनों का इस्तेमाल किया जाता है, बल्कि मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। 

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