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पीलीभीत में वर्षों से जंगल के बाहर असुरक्षित घूम रहा बाघ का पूरा कुनबा, ग्रासलैंड मैनेजमेंट जरूरी


🗒 शनिवार, जनवरी 27 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

ठंड बढऩे के साथ वन्यजीव जंगल से बाहर निकलकर आबादी क्षेत्र में पहुंचते हैं जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। एक बाघ पीलीभीत के पूरनपुर में अपना डेरा जमाए हैं। बाघ की अधिकतर चहलकदमी थाना सेहरामऊ क्षेत्र के गांवों में देखने को मिली। इसके अलावा कलीनगर क्षेत्र के कई गांवों में बाघ घूमता देखा गया है। बाघ की दहशत लगातार बढ़ती जा रही है। जनवरी माह में तीन लोग बाघ का आहार बने। मवेशियों की संख्या इससे अधिक है। घायलों का कुनबा भी बढ़ा है। बीते साल बाघ के हमले में 18 लोग जान से हाथ धो चुके हैं। यही नहीं हिमालय की तलहटी में वन्यजीव मामले में धनी अमरिया क्षेत्र में जंगल के बाहर कई साल से बाघ परिवार विचरण कर रहा है जिसकी सुरक्षा का किसी तरह से खाका नहीं खींचा गया। सिर्फ भगवान भरोसे बाघ परिवार जिंदा है। यह विभाग की तरफ से दोहरी लापरवाही है। गंभीरता से देखा जाय तो बगैर ग्रासलैंड मैनेजमेंट के बाघों को बाहर आने से रोकना मुश्किल होगा। जंगल की सीमा पर गन्ने की खेती में कमी लाने की दिशा में कठोर कदम उठाने होंगे तब जनहानि को रोका जा सकेगा। टाइगर रिजर्व के बाघों को संरक्षण देने के लिए ग्रासलैंड मैनेजमेंट पर काम करना होगा। 

पीलीभीत में वर्षों से जंगल के बाहर असुरक्षित घूम रहा बाघ का पूरा कुनबा, ग्रासलैंड मैनेजमेंट जरूरी

पीलीभीत टाइगर रिजर्व का एरिया 73000 हेक्टेयर में फैला हुआ है, जिसमें शाहजहांपुर की खुटार रेंज का 1700 हेक्टेयर एरिया शामिल हैं। जंगल के अंदर ग्रासलैंड मैनेजमेंट की दिशा में टाइगर रिजर्व प्रशासन को काम करना होगा। जितने अधिक ग्रासलैंड होंगे, तो बाघ को बाहर जाने से रोका जा सकेगा। शाकाहारी वन्यजीव जंगल के बाहर निकलता है, तो शिकार की तलाश में बाघ भी पीछे-पीछे पहुंच जाता है। इस तरह बाघ गन्ने के खेत तक पहुंच जाता है, जहां पर किसान बाघ का निवाला बन जाता है। जंगल के अंदर शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। अगर भरपेट भोजन जंगल के अंदर मिलेगा, तो बाघ बाहर किसी भी दशा में नहीं आएगा। बाघ ने माला रेंज छोड़कर पूरनपुर और बीसलपुर तहसील क्षेत्र में आतंक मचाए हुए हैं। ऐसा कोई नहीं नहीं बीतता है, जहां पर बाघ की चहलकदमी नहीं मिलती हो। जंगल की सीमा के समीप गन्ने की खेती में कमी लाने की दिशा में प्रयास करने चाहिए। जनपद में 25 प्रतिशत गन्ना रकबा बढ़ा है।

सामाजिक वानिकी के प्रभागीय निदेशक ने स्टाफ के साथ अमरिया क्षेत्र के भरा पचपेड़ा गांव के पास निरीक्षण किया, जहां पर संदिग्ध शिकारियों को पकड़ा गया था। प्रभागीय निदेशक ने उस क्षेत्र में बाघ के होने के रास्तों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान किसी तरह की आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली। प्रभागीय निदेशक ने बताया कि जहां पर शिकारी पकड़े गए थे। उस क्षेत्र का निरीक्षा किया गया। कोई चीज नहीं मिली है। फील्ड स्टाफ को सतर्क कर दिया गया है।

सामाजिक वानिकी प्रभाग के अंतर्गत अमरिया ब्लाक क्षेत्र के गांवों मे घूम रहे बाघ परिवार को शिफ्ट करने की योजना सिर्फ घोषणा भर तक साबित हुई। धरातल पर किसी तरह का कोई काम नहीं किया गया। हिमालय की तलहटी में बसा पीलीभीत वन्यजीव मामले में धनी है। यहां 23 प्रतिशत जंगल स्वच्छ हवा प्रदान करता है। इसी वजह से टाइगर रिजर्व में सैर  के लिए हजारों की संख्या में टूरिस्ट आते हैं। जंगल के अंदर नहरों को देखकर टूरिस्ट मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। जंगल के बाहर अमरिया क्षेत्र में कई सालों से बाघ परिवार विचरण कर रहा है जो सिर्फ भगवान भरोसे बाघ परिवार जिंदा है। बाघ परिवार पर पहली बार दूसरे प्रदेश के शिकारियों की नजर पड़ी है। अगर समय से कदम नहीं उठाया गया होता, तो कई बाघ शिकारियों की भेंट चढ़ जाते।

पिछले साल टाइगर प्रोजेक्ट के हेड एके द्विवेदी के आगमन पर अमरिया बाघ परिवार का मुद्दा उठाया गया था, जिस पर केवल आश्वासन मिला और बाघ परिवार की हवा हवाई सुरक्षा हो रही है। बीते साल 20 जनवरी को हरियाणा के सिरसा निवासी 11 संदिग्ध शिकारियों को पकड़ा गया था। एसटीएफ की पूछताछ में शिकारियों ने कई राज उगले। इसके बाद बरेली वृत्त के वन संरक्षक विनोद कृष्ण सिंह ने अमरिया क्षेत्र में विचरण कर रहे बाघ परिवार को शिफ्ट करने की बात कही थी। शिकारियों के पकड़े जाने की घटना के कई दिन बाद तक बाघ शिफ्टिंग पर कार्रवाई नहीं की गई। इस क्षेत्र पर शिकारियों की नजर पड़ गई है। ऐसे में वन विभाग को सतर्क रहना पड़ेगा। वन विभाग को समय रहते कदम बढ़ाना चाहिए। 

प्रभागीय निदेशक आदर्श कुमार ने बताया कि अमरिया क्षेत्र खुला होने की वजह से वन्यजीवों का संरक्षण करना काफी मुश्किल भरा काम है। कई सालों से बाघ परिवार स्व'छंद घूम रहा है। इस बाघ परिवार को शिफ्टिंग करने के लिए काफी समय से पत्र लिखा जा रहा है। अब दुबारा लिखा-पढ़ी शुरू की जाएगी। डब्ल्यूआइआइ से भी राय मशविरा ली जाएगी। बाघ को पकड़कर दूसरे स्थान पर छोडऩे की पूरी रणनीति बनानी होगी। टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश का कहना है कि अमरिया के बाघ शिफ्ट करने की कार्रवाई सामाजिक वानिकी स्तर से होनी है। टाइगर रिजर्व से कुछ लेना देना नहीं है।

पीलीभीत के पूरनपुर में ठंड बढऩे के साथ वन्यजीव जंगल से बाहर निकलकर आबादी क्षेत्र में पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। तहसील क्षेत्र में बाघ अपना डेरा जमाए हुए हैं। बाघ की अधिकतर चहल-कदमी थाना सेहरामऊ क्षेत्र के गांवों में देखने को मिली। इसके अलावा कलीनगर तहसील क्षेत्र के कई गांवों में बाघ की चहलकदमी से लोगों में दहशत है। बाघ की दहशत लगातार बढ़ती जा रही है। जनवरी माह की बात करें तो तीन लोग बाघ का आहार बने। कई मवेशी व बंदरों को बाघ ने निवाला बनाया तो कई मजदूरों पर हमला भी कर दिया।

आठ जनवरी को शाहजहांपुर जनपद की सीमा पर बढ़ईपुर के रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी संतराम को बाघ ने अपना निवाला बना लिया था। 14 जनवरी को गन्ना छीलने के दौरान सेहरामऊ क्षेत्र के गांव चतीपुर निवासी 25 वर्षीय राजेश कुशवाहा को बाघ ने अपना निवाला बना लिया। खेतों पर काम कर रहे मजदूरों ने शोर-शराबा कर बाघ के चंगुल से मजदूर को छुड़ाया था, तब तक उसकी मौत हो गई थी। 15 जनवरी को निजामपुर के मथुरा प्रसाद को बाघ ने अपना निवाला बना लिया था। इन घटनाओं के बाद बाघ ने पूरनपुर तहलील क्षेत्र में अपना ठिकाना जमाने के बाद कुरैया-हरीपुर मार्ग पर चतीपुर के पास, नवदिया झुकना में, सपहा पेट्रोल पंप के पास, सुल्तानपुर सपहा गांव के बीच, शेरपुर रोड कुंडे के निकट, रायपुर गोरा, बांसबोझी, फत्तेपुर गांव के पास, मालिनी कुइयां रोड के निकट, नवदिया-पजावा गांव के बीच, हजारा, हरीपुर किशनपुर, तारकोठी, जाजीपुर, गोरा, जोगराजपुर की तरफ चहलकदमी करता नजर आया। बाघ की दहशत के चलते सेहरामऊ क्षेत्र में लोगों ने अपनी फसलों की रखवाली करना छोड़ दिया है। हरीपुर में रामनाथ मिश्र के खेत पर काम कर रहे दो मजदूरों पर बाघ ने हमला करते हुए एक बंदर मार दिया था। पचपेड़ा में मवेशी मार डाला। जटपुरा में बंदर का शिकार कर खा गया। शाम ढलते ही लोग गांव के आसपास नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं लोग देर-सबेर घर से निकलने से गलत नजर आ रहे हैं। इसके अलावा कलीनगर तहसील क्षेत्र के गांव कीरतपुर, अर्जुनपुर, माधोटांडा, पचपेड़ा, रमनगरा सहित कई गांव में बाघ की चहल कदमी से लोग सकते में आ गए।

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