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बेटे की चाह की कीमत चुका रहीं हैं बेटियां, शादी के लिए 34 हजार अपहरण


🗒 सोमवार, जनवरी 29 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

महिलाओं के प्रति लगातार बढ़ते अपराध की वजह से कहें या पुत्र मोह, देश में लिंग अनुपात चिंताजनक स्थिति में है। साल 2011 में हुई पिछली जनगणना की ही बात करें तो प्रति 1000 पुरुषों सिर्फ 943 महिलाएं हैं। कई राज्यों में तो यह आंकड़ा 900 से भी नीचे पहुंच चुका है। सरकार लगातार लड़कियों के महत्व को बताते हुए उनके लिए कई तरह की योजनाएं भी बना रही है। लेकिन इसके बावजूद लगता है पुत्र मोह की मानसिकता में बदलाव आने में अभी और वक्त लगेगा।

बेटे की चाह की कीमत चुका रहीं हैं बेटियां, शादी के लिए 34 हजार अपहरण

इस घटते लिंगानुपात का साइड इफेक्ट अब बेटियों के अपहरण के रूप में सामने आ रहा है। एनसीआरबी-2016 की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल देश में कुल 66,225 लड़कियों का अपहरण किया गया, इनमें से आधी से ज्यादा यानी 33,855 लड़कियों का अपहरण सिर्फ शादी के लिए किया गया। दरअसल घटते लिंगानुपात के चलते देश के कई इलाकों में लड़कों की शादी के लिए लड़कियां नहीं मिल रही हैं, ऐसे में शादी के लिए लड़कियों को अगवा करने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक नवजात से लेकर 6 साल की उम्र तक की 139 बच्चियों का एवं 6 साल से 12 वर्ष की 666 बच्चियों का अपहरण शादी के लिए किया गया। उल्लेखनीय है कि 2014 से एनसीआरबी ने अपहरण के कारणों को सूचीबद्ध करना शुरू किया था। जिसके चलते ही शादी के लिए हो रहे अपहरण के आंकड़े सामने आए हैं।

2016 में शादी के लिए 59 लड़कों का भी अपहरण किया गया। नाबालिग सहित 18 से 30 साल की उम्र तक के 57 लड़के एवं 30 से 60 साल के बीच के एक पुरुषों का अपहरण शादी के लिए किया गया। इस साल कुल 23,350 पुरुषों का अपहरण किया गया।

अगर महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़े देखें तो 2016 में देशभर में 3,38,954 अपराध दर्ज किए गए, जिनमें पीड़ित महिलाएं थी। दर्ज अपराधों में 66,525 मामले यानी 19.62 फीसदी केवल अपहरण के हैं। वहीं कुल अपहरण 89,875 में से महिलाओं को अगवा करने का ये आंकड़ा 74 फीसद है।

अगर अपहरण के कारण की बात करें तो 37.7 फीसद शादी के अलावा अवैध संबंध के लिए 2.1, हत्या के लिए 1.3, गैर कानूनी गतिविधि 1.2, गोद लेने 0.8, फिरौती 0.8, बदला 0.6, वेश्यावृति 0.1, भिखारी बनाने 0.1, अन्य कारण 55.4 फीसदी अपहरण किए गए।

महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में कई सालों से मध्य प्रदेश पहले पायदान पर है। वहीं 2016 में अपहरण के मामले में भी मध्य प्रदेश 7237 (8.1 फीसदी) अपहरणों के साथ चौथे स्थान पर है। इनमें 69.00 फीसदी यानी 4994 लड़कियों का अपहरण हुआ है। वहीं इस मामले में मध्यप्रदेश 2014 में 7833 अपहरणों के साथ दूसरे एवं 2015 में 6778 अपहरणों के साथ पांचवें स्थान पर रह चुका है।

अपहरण के मामले में टॉप 4 में मध्य प्रदेश

राज्य             मामले

उत्तर प्रदेश           15,898 (18.1)

महाराष्ट्र                9,333 (10.6)

बिहार                  7324 (8.3)

मध्यप्रदेश             7237 (8.1)

समाजशास्त्री प्रो. महेश शुक्ला ने दैनिक जागरण से बात करते हुए कहा, लिंगानुपात में सुधार नहीं हुआ तो इस प्रकार की घटनाएं और तेजी से बढ़ेंगी। इस प्रकार की घटनाएं उत्तर भारत के राज्यों में ज्यादा और दक्षिण में कम होते हैं। यह सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश पर भी निर्भर करता है। भले इस मामले में यूपी टॉप पर है, लेकिन जनसंख्या औसत के मामले में हरियाणा की स्थिति बहुत खराब है।

मध्य प्रदेश के पूर्व डीजीपी एससी त्रिपाठी बताते हैं कि रिपोर्ट में नवजात से लेकर 6 साल की उम्र तक की बच्चियों के अपहरण के मामले जो दर्ज हैं, वह आदिवासियों के कमिटमेंट के मामले हो सकते हैं। क्योंकि देश के कई राज्यों में बच्ची पैदा होने से पहले ही यह लोग शादी का कमिटमेंट कर लेते हैं, लेकिन बाद में मुकरने की स्थिति में दूसरी पार्टी बच्चियों का अपहरण कर लेती है।

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