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मोदी के सपनों की तरफ योगी, देश के सबसे बड़े सूबे को एक बार फिर जीतने की तैयारी


🗒 शनिवार, फरवरी 17 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

एक फरवरी 2018 को केंद्र सरकार द्वारा बजट पेश किए जाने से पहले समाज के हर तबके को कुछ न कुछ मिलने की उम्मीद थी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश करते हुए जब कहा कि इस सरकार का एजेंडा किसानों की सेहत के साथ साथ आम लोगों की सेहत से जुड़ी है तो तस्वीर करीब करीब साफ हो चुकी थी कि बजट में अगले आम चुनावों की छाप दिखाई देगी। केंद्र सरकार ने उन योजनाओं को ज्यादा तवज्जो दी जो आम लोगों से सीधे जुड़ी हुई थी।

मोदी के सपनों की तरफ योगी, देश के सबसे बड़े सूबे को एक बार फिर जीतने की तैयारी

मसलन देश के करीब 10 करोड़ परिवारों या यूं कहे कि 40 फीसद आबादी को सुरक्षित स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लाने का ऐलान किया गया। करीब 15 दिन बाद जब यूपी सरकार ने 16 फरवरी को जब बजट पेश किया तो एक बात साफ हो गई कि मोदी के सपनों की तरफ योगी ने कदम बढ़ाया है। खैर उसके पीछे वजह भी है। 2014 के आम चुनाव में भाजपा को सूबे की जनता ने प्रचंड बहुमत दिया जो राजनीतिक विश्लेषकों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं था। देश की गद्दी पर 1984 के बाद कोई एक अकेली पार्टी अपने बलबूते पर सरकार बनाने में कामयाब हो गई। 2019 के चुनाव में भाजपा उस प्रदर्शन से आगे बढ़ना चाहती है जो 2014 में हासिल हुयी थी। ऐसे में सवाल ये है कि क्या यूपी सरकार ने भी लोकलुभावन बजट पेश किया है या वास्तव में ये बजट उत्तर प्रदेश को खुशियों के प्रदेश में बदल देगा जिसकी झलक दिल्ली से यूपी में दाखिल होते वक्त प्रचार प्रसार करते हुए होर्डिंग पर नजर आती है। 

यूपी में इन्वेस्टर्स समिट के जरिए प्रदेश में निवेश आकर्षित करने में जुटी योगी सरकार ने शुक्रवार को 2018-19 के लिए 4,28,384.52 करोड़ रुपये का बजट पेश करते हुए इसकी बुनियाद रख दी है।

यूपी बजट के खास अंश

- सात हजार 485 करोड़ 6 लाख का अनुमानित घाटा

- सर्व शिक्षा अभियान के लिए 18,167 करोड़ रुपये

- मिड डे मील के लिए 2,048 करोड़ रुपये

- कुंभ मेला के लिए 1,500 करोड़ का बजट

- स्मार्ट सिटी के लिए 1,650 करोड़

- स्वच्छ भारत मिशन को 1,100 करोड़

- फल वितरण के लिए 167 करोड़ रुपये

- राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान को 167 करोड़ रुपये

- माध्यमिक शिक्षा अभियान के लिए 480 करोड़ रुपये

- महिला एवं बाल कल्याण के लिए 8,815 करोड़ रुपये

- सबला योजना के लिए 315 करोड़ रुपये।

- वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट के लिए 250 करोड़ रुपये

- सरयू नहर परियोजना के लिए 1,614 करोड़ रुपये

- एनसीआर मेट्रो के लिए 500 करोड़

- बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे के लिए 650 करोड़ रुपये

- गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए 550 करोड़

युवाओं के लिए लैपटॉप से पहले स्वरोजगार

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर योगी सरकार ने युवा शक्ति को भी साधनेकी कोशिश की है। सरकार ने युवाओं को लैपटॉप देने से पहले स्वरोजगार देने की दिशा में पहलकी है। इन्क्यूबेटर की स्थापना और नये उद्यमियों को बढ़ावा देने के मकसद से स्टार्ट-अप फंड केलिए 250 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं। वहीं 100 करोड़ रुपये के आवंटन से मुख्यमंत्री युवास्वरोजगार नाम से नई योजना शुरू की गई है। परंपरागत उद्योगों और हस्तशिल्पों को बढ़ावा देने केलिए ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना पर भी बजट का फोकस है। माना जा रहा है, इस योजना का लाभ भी सबसे ज्यादा युवा वर्ग को ही मिलेगा।

निवेशकों में विश्वास जगाने की कोशिश

बुनियादी ढांचे पर विकास के साथ योगीसरकार ने निवेशकों में विश्वास जगाने केलिए विभिन्न निवेश प्रोत्साहन नीतियों केक्रियान्वयन के लिए 1400 करोड़ रुपये काइंतजाम किया है। इसके तहत उप्र औद्योगिक नीति 2012 को अमली जामा पहनाने केलिए 600 करोड़ रुपये और उप्र औद्योगिकनिवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति, 2017 के तहत रियायतें देने के लिए 500 करोड़ रुपये का इंतजाम किया गया है।

सड़क विकास पर खास जोर

खास बात यह कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से गोरखपुर को जोड़ने पर पांच सौ करोड़ खर्च किए जाएंगे। बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे पर भी सरकार 650करोड़ खर्च करने जा रही है। योगी सरकार का पहला बजट किसानों की ऋण माफी का वादा पूरा करने के दबाव में आया था, लिहाजा बड़ी योजनाओं के लिएपैसा निकालने में तब सरकार के हाथ बंध गए थे।इस बार ऐसा नहीं है। बजट खेती, पशुपालन, उद्योग,युवाओं और ढांचागत सुविधाओं पर बहुत जोर दे रहाहै। वित्त मंत्री जानते हैं कि पेट किसान भरता है और रोजगार उद्योगों से आता है तो उन्होंने दोनों ही क्षेत्रोंका भरपूर ध्यान रखा है। हाल ही में नीति आयोग नेस्वास्थ्य सेवाओं के मामले में उत्तर प्रदेश को देश के सभी राज्यों में इक्कीसवें नंबर पर रखा था। शायद इसीलिए स्वास्थ्य और शिक्षा पर सरकार ने बहुत ध्यान दिया है।

इन्वेस्टर्स समिट से पहले जिस तरह से उद्योग धंधों की स्थापना के लिए योजनाएं बनायी गई हैं उससे ये संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि ये सरकार उद्योगपतियों, नवउद्यमियों को बाधारहित, भयरहित माहौल देना चाहती है। इसके साथ ही शिक्षा के मद में ज्यादा धनराशि उपलब्ध कराकर यूपी को तरक्की की राह पर आगे बढ़ने का सपना देखा गया है। 

जहां तक 2019 के चुनाव की बात है तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि भाजपा अपने पिछले प्रदर्शन से और बेहतर प्रदर्शन दोहराना चाहेगी। किसी  भी पार्टी के बेहतर प्रदर्शन के लिए बनाई जा रही रणनीतियों पर विपक्षी भी सवाल नहीं उठा सकते हैं। यूपी में 73 सीटों का मिलना बेंचमार्क है और ये सरकार उस बेंचमार्क से आगे ही बढ़ना चाहेगी।

नौनिहालों का भी रखा ख्याल

शिक्षा के लिए 68 हजार करोड़ रुपये और स्वास्थ्य के लिए 21 हजार करोड़ रुपये सरकारने का प्रावधान किया है। सड़कों के लिए भी करीब29 हजार करोड़ खर्च किये जाएंगे। मदरसों के लिभी चार सौ करोड़ निकाल कर सरकार ने सबको साथलेने की अपनी मंशा पर मुहर लगाई है। बजट पर प्रधानमंत्री मोदी की स्पष्ट छाप है और इसीलिए, इसमें केंद्रीय योजनाओं को बहुत महत्व दिया गया है। देखा जाए तो यूपी का बजट केंद्र सरकार के हालिया बजट का विस्तार है। यह केंद्रीय योजनाओं को जनता तक ले जाने की चिंता करता है। मार्च 2019 तक राज्य सरकार ने डेढ़ करोड़ परिवारों को बिजली कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा है। कृषि में तकनीक का दखल बढ़ाने, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदनायोजना और स्वास्थ्य सुरक्षा योजना फेज-3 को भीइसी श्रेणी में रखा जा सकता है।2019 समूची भाजपा के लिए बड़ी परीक्षासाबित होने वाला है। राष्ट्रीय राजनीति के कई बड़े सवाल भाजपा की जीत-हार से तय होने हैं। भावी दंगल में 2014 की 73 सीटों की चुनौती योगी सरकार के सामने है।

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