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टीबी का दो साल पहले ही पता लगा लेगी नई जांच


🗒 शनिवार, अप्रैल 07 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

वैज्ञानिकों ने एक नई रक्त जांच विकसित की है। इससे रोगियों में टीबी के लक्षण दिखाई पड़ने से दो साल पहले ही इस रोग के बढ़ते खतरे का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है।

टीबी का दो साल पहले ही पता लगा लेगी नई जांच

शोधकर्ताओं के अनुसार, विकसित की गई नई रक्त जांच चार प्रकार के जीन के स्तर को माप सकती है। इससे ज्यादा सटीकता के साथ रोगी में टीबी के उच्च खतरे का ज्यादा सटीकता के साथ अनुमान लगाया जा सकता है।

दक्षिण अफ्रीका की स्टेलेनबोस्च यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता गेर्हाड वाज्ल ने कहा, हमने पाया कि रक्त में चार प्रकार के जीन के संयोजन ‘रिस्क4’ के स्तर को मापने से दो साल पहले ही इस रोग का अनुमान लगाना संभव हो सकेगा। हमें उम्मीद है कि इस प्रकार की जांच प्राइमरी हेल्थ क्लीनिक के लिए उपयोगी होगी।

इससे टीबी की सटीक पहचान हो सकेगी। हर साल दुनिया में टीबी के एक करोड़ से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं। जबकि इस बीमारी से हर साल 20 लाख लोगों की मौत हो जाती है।

टीबी यानी ट्यूबरकुलासिस को कई नामों से जाना जाता है जैसे इस क्षय रोग, तपेदिक, राजयक्ष्मा, दण्डाणु इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। टीबी एक संक्रामक बीमारी है और इससे ग्रसित व्यक्ति में शारीरिक कमजोरी आ जाती है और इसके साथ ही उसे कई गंभीर बीमारियां होने का भी खतरा रहता है। टीबी सिर्फ फेफड़ों का ही रोग नहीं है, बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों को भी यह प्रभावित करता है।

टीबी के प्रकार

आमतौर पर टीबी तीन तरह का होता है। यह पूरे शरीर को संक्रमित करता है। टी.बी के तीन प्रकार हैं- फुफ्सीय टीबी, पेट का टीबी और हड्डी का टीबी। तीनों ही प्रकार के टीबी के कारण, पहचान और लक्षण भिन्न होते हैं। यही नहीं, तीनों प्रकार के टीबी का इलाज भी अलग-अलग तरह से किया जाता है।

बचाव ही इलाज है...

टीबी से बचने के लिए अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़िया रखें। न्यूट्रिशन से भरपूर खाना खासकर प्रोटीन डाइट (सोयाबीन, दालें, मछली, अंडा, पनीर आदि) भरपूर मात्रा में लें। अगर आपकी इम्युनिटी कमजोर है तो टीबी के बैक्टीरिया के एक्टिव होने की आशंका ज्यादा रहती है। असल में कई बार टीबी का बैक्टीरिया शरीर में तो होता है, लेकिन अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण यह एक्टिव नहीं हो पाता और टीबी नहीं होती। 

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