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रिपोर्ट ने किया इशारा, कांग्रेस की आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया


🗒 गुरुवार, अप्रैल 12 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

चुनाव सुधार की दिशा में काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने मंगलवार को सभी सात राष्ट्रीय दलों की आय और खर्च का विवरण जारी किया। इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि भाजपा ने कमाई के मामले में बाकी सभी पार्टियों को मीलों पीछे छोड़ दिया है। यही नहीं इस रिपोर्ट से जो दूसरी बात स्पष्ट होती है वह यह कि कांग्रेस आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया वाली स्थिति में है। चलिए जानते हैं क्या खास है इस रिपोर्ट में...

रिपोर्ट ने किया इशारा, कांग्रेस की आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा की आय 2015-16 से 2016-17 के बीच 81.18 फीसद बढ़कर 1,034 करोड़ रुपये हो गई। इसमें से पार्टी ने 70 फीसद राशि खर्च की। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की आय में 14 फीसद गिरावट दर्ज की गई है। वहीं मायावती की बसपा की बात करें तो इस पार्टी ने अपनी 173 करोड़ रुपये की आय में से सिर्फ 30 फीसद खर्च किया। सभी राजनीतिक दलों की कुल कमाई में से भाजपा की हिस्सेदारी 66 फीसद रही।

इस बार सालाना ऑडिट अकाउंट जमा कराने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2017 थी। 7 में से चार राष्ट्रीय स्तर की पार्टियां (भाजपा, कांग्रेस, एनसीपी और सीपीआई) पिछले पांच साल से लगातार ऑडिट रिपोर्ट भेजने में देरी कर रही हैं। इस बार भी सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अपनी यह रिपोर्ट 8 फरवरी 2018 यानी 99 दिन की देरी से चुनाव आयोग में जमा की। जबकि कांग्रेस ने 19 मार्च यानी 138 दिन देरी से रिपोर्ट जमा करवाई। एनसीपी ने 2 महीने 19 दिन बाद 19 जनवरी 2018 को ऑडिट रिपोर्ट जमा की, जबकि सीपीआई ने 22 दिन देरी से 23 नवंबर 2017 को ऑडिट रिपोर्ट चुनाव आयोग में जमी करवाई। एआईटीसी, सीपीएम और बसपा ने ही निर्धारित समय-सीमा से पहले ऑडिट रिपोर्ट जमा की।

इन स्रोतों से कमाती हैं राजनीतिक पार्टियां
साल 2016-17 में सभी राष्ट्रीय दलों (भाजपा, कांग्रेस, बसपा, एनसीपी, सीपीएम, सीपीआई और एआईटीसी) ने अपनी जो आय घोषित की वह कुल मिलाकर 1559.17 करोड़ रुपये थी। इन सातों पार्टियों ने 1228.26 करोड़ रुपये का खर्च भी दिखाया। साल 2015-16 से 2016-17 के बीच सात दलों की कुल आय में 525.99 करोड़ (51 फीसद) की बढ़ोतरी हुई। खास बात यह है कि पार्टियों की कमाई में 74.98 फीसद (1169.07 करोड़ रुपये) हिस्सेदारी स्वैच्छिक अनुदान की है। इसी दौरान सभी पार्टियों को कुल 128.60 करोड़ रुपये की कमाई बैंकों और फिक्स डिपॉजिट के ब्याज के रूप में हुई।

भाजपा को साल 2016-17 में 1034.27 करोड़ की आमदनी हुई, जिसमें से पार्टी ने 710.057 करोड़ खर्च किया, जबकि कांग्रेस ने इसी दौरान 225.36 करोड़ की आमदनी की और इससे 96.30 करोड़ रुपये ज्यादा यानी 321.66 करोड़ खर्च किए। मायावती की बसपा ने 173.58 करोड़ की कमाई में से सिर्फ सिर्फ 51.83 करोड़ रुपये ही खर्च किए। सीपीएम को 100.256 करोड़ की कमाई हुई और उसने 94.056 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि सीपीआई ने 2.079 करोड रुपये कमाए और 1.426 करोड़ रुपये खर्च किए। कांग्रेस की ही तरह एनसीपी भी घाटे में रही। एनसीपी ने इस दौरान 17.235 करोड़ की कमाई की और उसे 24.967 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) का हाल तो और भी खराब रहा, पार्टी को 6.39 रुपये की आदमनी हुई और उसने 24.26 करोड़ रुपये खर्च डाले।

कांग्रेस को ब्याज के रूप में हुई ज्यादा आमदनी
2016-17 में सत्तारूढ़ भाजपा की कुल आय में स्वैच्छिक अनुदान की हिस्सेदारी 997.12 करोड़ यानी 96.41 फीसद रही। 31.18 करोड़ तो भाजपा को ब्याज के रूप में ही कमाई हुई है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने 115.644 करोड़ (51.32 फीसद) की कमाई रेवेन्यू और कूपन जारी करके की। ग्रांट, डोनेशन और स्वैच्छिक अनुदान के जरिए कांग्रेस को 50.626 करोड़ (22.46 फीसद) की कमाई हुई। बैंकों में फिक्स डिपॉजिट पर मिले ब्याज के जरिए भी कांग्रेस ने 43.89 करोड़ की कमाई की।

भाजपा का 85 फीसद खर्च चुनाव और प्रचार पर
जहां तक खर्चे की बात है तो भाजपा ने साल 2016-17 में 606.64 करोड़ रुपये (85.44 फीसद) चुनाव और आम प्रचार पर खर्च किए। 69.78 एडमिनिस्ट्रेशन कॉस्ट और 20.41 करोड़ रुपये सैलरी के रूप में भाजपा ने खर्च किए। दूसरी तरफ कांग्रेस की बात करें तो देश की सबसे पुरानी पार्टी ने 149.65 करोड़ रुपये (46.52 फीसद) चुनाव पर खर्च किए। 115.65 करोड़ रुपये (35.96 फीसद) कांग्रेस ने एडमिनिस्ट्रेशन और अन्य के रूप में खर्च किए।

संस्था के सुझाव
- चुनाव आयोग ने नियम बनाया कि कोई भी पार्टी 20 हजार रुपये से अधिक के चंदे का विवरण देने के लिए जमा करने वाले फॉर्म 2ए का कोई हिस्सा खाली न छोड़ें।
- जो पार्टी तय समय पर आयकर रिटर्न नहीं भरती है, उसकी आय पर कर लगाने का प्रावधान किया जाए। लगातार गलती करने वाली पार्टी की मान्यता रद की जाए।
- सभी दाताओं की पूरी जानकारी आरटीआइ के तहत सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध होनी चाहिए।
- ऑडिटिंग के लिए आइसीएआइ के दिशानिर्देशों का पालन न करने वाले दलों की जांच आयकर विभाग से कराई जानी चाहिए।

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