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अब 'काला धन' होने लगी गुलाबी करेंसी, चलन में सिर्फ 14 फीसद 2000 के नोट


🗒 सोमवार, अप्रैल 16 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

गुलाबी नोट अब 'काला धन' होने लगा है। तमाम बैंक शाखाओं और करेंसी चेस्ट में आने वाली रकम में  2000 रुपये के नोटों की लगातार गिरती संख्या इसका प्रमाण है।

अब 'काला धन' होने लगी गुलाबी करेंसी, चलन में सिर्फ 14 फीसद 2000 के नोट

मार्च 2018 में बैंकों की करेंसी चेस्ट की बैलेंस शीट की रिपोर्ट के अनुसार बैंकों में दो हजार रुपये के नोटों की संख्या कुल रकम का औसतन दस फीसद ही है। यह स्थिति तब है जब भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार कुल जारी करेंसी में 2000 रुपये के नोटों का हिस्सा 50 फीसद से अधिक है। 

गुलाबी नोट के 'काला धन' होने से जुड़े तथ्य

  • 2000 रुपये के नोट में करीब सात लाख करोड़ रुपये जारी कर चुकी आरबीआइ
  • 500 रुपये के नोट में अब तक जारी हो चुके पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक 
  • 200 रुपये के नोट में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक जारी करने का वर्ष लक्ष्य 
  • कारोबारी क्षेत्रों से कम आ रहे दो हजार के नोट, चलन में करीब 14 फीसद नोट

 मुद्रा चलन की हकीकत बताने वाले हालात

  • स्थिति एक : एक बड़े बैंक के मुख्य करेंसी चेस्ट, जिसका औसतन बैलेंस नोटबंदी के पहले 300 करोड़ रुपये था। वहीं अब करीब 100 करोड़ रुपये है। बैंकों से उसकी रिसीट रोज की करीब 14 करोड़ की थी, अब औसतन चार करोड़ रुपये है। इसमें 2000 रुपये के नोट करीब 50 लाख रुपये हैं। 
  • स्थिति दो : सरकारी खातों की अधिकता वाले एक बैंक के करेंसी चेस्ट का औसतन बैलेंस नोटबंदी के पहले करीब 900 करोड़ था। अब वह करीब 250 करोड़ है। रोज की रिसीट 80 करोड़ रुपये से घट कर 40 करोड़ रुपये पर आ गई है। इसमें 2000 रुपये के नोट चार करोड़ रुपये से भी कम रहते हैं। 
  • स्थिति तीन : बड़े खाताधारकों वाली नयागंज स्थित एक बैंक की शाखा, जिसमें रोजाना करीब दो करोड़ कैश आता है। नवंबर 2017 तक जमा होने वाली रकम में 60 लाख रुपये 2000 रुपये के नोट में होते थे, अब घटकर 20-22 लाख रह गया है। इसमें दो हजार रुपये के नोट करीब डेढ़ लाख रुपये के ही होते हैं। 

नोटों की आवक 14 फीसद तक सीमित

आरबीआइ ने नोटबंदी के बाद कुल करीब सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के दो हजार रुपये के नोट जारी किये थे। जुलाई तक बैंकों में कैश की आवक में दो हजार रुपये के नोटों की संख्या करीब 35 फीसद रहती थी। नवंबर 2017 तक घटकर यह करीब 25 फीसद रह गई। कानपुर के कुछ बड़े बैंकों की बड़ी करेंसी चेस्ट की रिपोर्ट और भी भयावह स्थिति पेश कर रही है। भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जैसे बैंकों के करेंसी चेस्ट के आंकड़ों में 2000 रुपये के नोट की संख्या 9 से 14 फीसद तक ही है।

आरबीआइ से जुलाई 2017 के बाद दो हजार रुपये की करेंसी नहीं मिली। बैंक में जमा के रूप में आ रही रकम में भी दो हजार रुपये के नोट कम आ रहे हैं। इसका अर्थ यही है कि लोग नोट दबा रहे हैं। नकदी संकट जैसी कोई बात नहीं है। 500 रुपये के नोट ठीक संख्या में मिल रहे हैं। 200 रुपये और 50 रुपये के नोट भी नियमित आने लगे हैं

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