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अब दिवालिया कानून में संशोधन को मिली मंजूरी


🗒 शनिवार, अगस्त 11 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) 2016 में संशोधन के एक विधेयक को संसद से मंजूरी मिल गई। लोकसभा से 31 जुलाई को स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को राज्यसभा से भी ध्वनि मत से हरी झंडी दे दी गई। इस संशोधन से मकान खरीदारों को वित्तीय लेनदेन बनाने और छोटे उद्योगों के दिवालिया मामलों के लिए अलग तंत्र बनाने का रास्ता साफ हो गया।

अब दिवालिया कानून में संशोधन को मिली मंजूरी

हालांकि सरकार ने इन संशोधनों को तत्काल लागू करने के लिए छह जून को अध्यादेश जारी किया था। शुक्रवार को पारित विधेयक इस अध्यादेश का स्थान लेगा। कार्यकारी वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने विधेयक पर चर्चा के दौरान जवाब देते हुए कहा कि संशोधन के बाद छोटी दिवालिया हुई कंपनियों का भी समाधान हो सकेगा। उसी समय बड़े दिवालिया कारोबारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकेगी। उन्होंने कहा कि विधेयक का उद्देश्य दिवालिया मामलों का समाधान निकालना है, कंपनियों को समाप्त करना नहीं।गोयल ने कहा कि हम दिवालिया मामलों का तेजी से निपटारा चाहते हैं। कंपनियों को समाप्त नहीं करना चाहते हैं। दिवालिया प्रक्रिया से देश को फायदा मिलेगा और इसमें फंसी हजारों करोड़ की परिसंपत्तियों का उपयोग हो सकेगा। कानून में जरूरी बदलाव के लिए सरकार ने नवंबर 2017 में इंसॉल्वेंसी लॉ कमेटी बनायी। उसने 26 मई को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। उसकी सभी सिफारिशों को स्वीकार करके विधेयक में शामिल गया गया। उन्होंने बताया कि रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी के लिए वित्तीय लेनदारों के न्यूनतम 66 फीसद वोटिंग शेयरों की मंजूरी चाहिए। वैसे सामान्य फैसले किसी भी कंपनी में 51 फीसद फीसद वोटिंग से होते हैं।

वाणिज्यिक विवादों के जल्दी निस्तारण और कॉमर्शियल कोर्ट में मामले ले जाने के लिए विवादित रकम को एक करोड़ से घटाकर तीन लाख रुपये करने के लिए कानून में संशोधनों को संसद से मंजूरी दे दी गई। लोकसभा से यह विधेयक 31 जुलाई को पारित हुआ था। शुक्रवार को राज्यसभा ने भी मंजूरी दे दी। कॉमर्शियल कोर्ट्स, कॉमर्शियल डिवीजन एंड कॉमर्शियल अपीलेट डिवीजन ऑफ हाईकोर्ट (अमेंडमेंट) बिल 2018 पर चर्चा के दौरान जवाब देते हुए विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि छोटे कारोबारों के विवाद उसी तरह दूर होने चाहिए जैसे बड़ी कंपनियों के होते हैं। अदालतों में बुनियादी सुविधाएं सुधारने की विपक्ष की मांग पर उन्होंने कहा कि एक केंद्रीय योजना के तहत अदालतों में बुनियादी विकास के लिए राज्यों को 6302 करोड़ रुपये का 42 फीसद हिस्सा केंद्र ने जारी किया है।

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