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लखनऊ-कानपुर के बीच 140 की स्पीड से दौड़ेंगी ट्रेनें, 40 मिनट का होगा सफर


🗒 बुधवार, फरवरी 28 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

सूबे के दो बड़े शहरों लखनऊ और कानपुर के बीच का रेल सफर आने वाले दिनों में 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। अभी यह सफर डेढ़ घंटे या इससे ज्यादा समय में पूरा होता है। औसतन 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रहीं ट्रेनों को 140 की गति से दौड़ाया जाएगा।

लखनऊ-कानपुर के बीच 140 की स्पीड से दौड़ेंगी ट्रेनें, 40 मिनट का होगा सफर

इसके लिए मौजूदा ट्रैक को 'सेमी हाई स्पीड ट्रैक में तब्दील किया जा रहा है। नए ट्रैक और स्लीपर का वजन पूर्व से आठ किलो ज्यादा है। ट्रैक तैयार करने में करीब ढाई सौ करोड़ रुपये खर्च हो रहा है।

कानपुर-लखनऊ रूट अति व्यस्त मार्गों में शामिल है। मुंबई और बनारस के लिए अहम 70 किमी के सफर में एक्सप्रेस ट्रेनों की अधिकतम चाल है तो 110 किमी प्रति घंटा, लेकिन ट्रैक जर्जर होने से औसतन चाल 70 से 80 किमी प्रति घंटा है। नई दिल्ली-लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस को भी पहुंचने में सवा घंटे से ज्यादा का समय लगता। लोकल और पैसेंजर ट्रेनों का हाल और भी ज्यादा खराब है। वर्ष 2002 के बाद ट्रेनों की संख्या बढ़ी लेकिन पटरियों का वजन नहीं बढ़ सका। इस कमी की वजह से ट्रेनों की चाल भी सुस्त है। रेलवे अब वजनदार स्लीपर व पटरियों को बिछा रहा है। अभी तक जहां पटरी का वजन 52 किलो है उसको हटाकर 60 किलो किया जा रहा है। यही वजन स्लीपर का भी है।

ट्रैक बदले जाने के काम में प्रति किमी का खर्च तीन करोड़ रुपये के करीब है। नए ट्रैक और स्लीपर बिछने के बाद सुपरफास्ट व एक्सप्रेस ट्रेनें जहां 40 मिनट में सफर तय करेंगी तो एलटीटी एसी सुपरफास्ट और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें तो आधा घंटे में पहुंचेंगी। रेलवे फोर लेन के ट्रैक का भी लक्ष्य साथ लेकर चल रहा है। मुख्य ट्रैक इंजीनियर से लेकर संरक्षा आयुक्त की सर्वे रिपोर्ट उत्तर रेलवे मुख्यालय को सौंपी जा चुकी है। लखनऊ रेल मंडल के डीआरएम सतीश कुमार ने बताया कि ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने जाने के लिए कानपुर-लखनऊ के मध्य पुरानी पटरियों को हटाते हुए 60 किलो की पटरी और स्लीपर बिछाए जा रहे हैं। विभिन्न सेक्शनों में कार्य प्रगति पर है।

ट्रेनों की चाल बढ़ाने के साथ रेलवे रन थ्रू ट्रेनों को बिना रोके भी चलाएगा। इसके लिए गंगाघाट, मगरवारा, उन्नाव, सोनिक, अजगैन, जैतीपुर के साथ अन्य सेक्शन में स्मार्ट सिग्नल प्रणाली अपनाई जानी है। इसमें ट्रेन को सिग्नल के इंतजार में आउटर पर नहीं रुकना होगा। यदि कोई आपातकालीन की स्थिति है तो ट्रेन को कॉशन आटोमैटिक बीच के स्टेशनों पर ही मिल जाएगा।

गिट्टी और क्लिपों को भी बदल रहा रेलवे

नई पटरी को बिछाते हुए पुरानी पेंड्रोल क्लिप से लेकर फिश प्लेट, रबड़ पैड को भी नया किया जा रहा है। गिट्टी भी डाली जा रही हैं।

छह माह में पूरा होगा काम

बजट का कुछ हिस्सा बोर्ड से मंजूर हो भी चुका है। गंगाघाट स्टेशन, मगरवारा, सोनिक, अजगैन से जैतीपुर के मध्य 60 किलो की पटरी व स्लीपर बिछाए जा रहे हैं। गंगाघाट रेलवे पुल पर डाउन व अप दोनों हिस्से में पटरी बदलने का कार्य तेजी पर है। मगरवारा में 35 फीसद कार्य हो चुका है। अन्य सेक्शन में 15 फीसद कार्य हुआ है।

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