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27 को पूर्ण चंद्र ग्रहण, 12 में से सात राशि वालों को कष्ट


🗒 सोमवार, जुलाई 23 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

गुरु पूर्णिमा पर इस बार 27 जुलाई को खग्रास चंद्रग्रहण लग रहा है। इसका स्पर्श रात 11.54 बजे, सम्मिलन 12.59, मध्य 1.52, उन्मिलन 2.43 और मोक्ष रात 3.49 बजे होगा। संपूर्ण ग्रहण काल तीन घंटा 55 मिनट का होगा। धर्म शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण में 12 घंटे व चंद्रग्रहण में नौ घंटे पूर्व सूतक लग जाता है। इस लिहाज से दिन में 2.54 बजे से सूतक लग जाएगा।

27 को पूर्ण चंद्र ग्रहण, 12 में से सात राशि वालों को कष्ट

सूतक काल में बाल, वृद्ध, रोगी को छोड़कर सभी के लिए भोजन निषिद्ध बताया गया है। ग्रहण स्पर्श से मोक्ष काल तक देवालयों में दर्शन आदि वर्जित होता है। ग्रहण में गंगा स्नान के साथ दान आदि का विशेष महत्व होता है। ग्रहण काल में जपा गया मंत्र सिद्ध होता है। इस समय में मंत्रादि जपना चाहिए। 
देश भर में देखा जाएगा ग्रहण 
ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार संवत 2075 (वर्ष 2018-19) में विश्व पटल पर कुल पांच ग्रहण यानी तीन सूर्य ग्रहण व दो चंद्रग्रहण हैं। भारत में सिर्फ आषाढ़ी पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा 27 जुलाई शुक्रवार को मकर राशि, उत्तरा साढ़ा नक्षत्र पर लगने वाला ग्रहण चंद्रग्रहण संपूर्ण भारत में दृश्य होगा। यह ग्रहण ङ्क्षहद महासागर में भारतीय समयानुसार 11.54 बजे आस्ट्रेलिया के सुदूर पूर्वी क्षेत्र से चंद्रदोय के समय होगा। यह खंड चंद्रग्रहण के रूप में न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, यूरोप के अधिकांश भाग, चीन, जापान, रूस अफ्रीका में भी दृश्य होगा। संपूर्ण भारत में चंद्रग्रहण का स्पर्श, सम्मिलन, उन्मिलन, मध्य, मोक्ष सभी देखा जा सकेगा।
गुरु पर्व पर दर्शन को अपनी मान्यता
आषाढ़ी पूर्णिमा को गुरु पर्व यानी गुरु पूर्णिमा मनाया जाता है। शास्त्रों में गुरु की महिमा का बखान भगवान से भी उपर बताया गया है। इस दिन महर्षि वेद व्यास की स्मृति में उनके पूजन के साथ ही सभी सनातनी अपनी दीक्षित गुरु का विधिवत पूजन कर आशीष लेते हैं। गुरु पूर्णिमा पर्व 27 जुलाई को मनाया जाएगा।गुरु पूर्णिमा तिथि 26 जुलाई की रात 10.32 बजे लग रही है जो 27-28 जुलाई की रात 12.33 बजे तक रहेगी। अन्नपूर्णा मठ मंदिर महंत रामेश्वर पुरी व सतुआबाबा पीठाधीश्वर संतोष दास व अनुसार गुरु दर्शन सूतक लगने से पहले दोपहर 2.53 बजे तक होंगे। अघोरपीठ सर्वेश्वरी समूह पड़ाव में हर वर्ष दोपहर तक ही दर्शन होते हैं लेकिन संत मत अनुयायी आश्रम में शाम तक गुरु दर्शन चलता रहेगा।

राशि और प्रभाव

मेष-सुख, वृष- हानि, मिथुन -कष्ट, कर्क- स्त्री कष्ट ,सिंह- सुख, कन्या- चिंता, तुला-व्यथा, वृश्चिक- लक्ष्मी प्राप्ति, धनु- क्षति, मकर- घातक, कुंभ- हानि और मीन- लाभ।

इनका रखें ध्यान

ग्रहण का सूतक लग जाने से लेकर ग्रहण समाप्ति तक मंदिर में प्रवेश नहीं करना चाहिए।

-ग्रहण के दौरान न तो भोजन करना चाहिए और न ही बनान चाहिए।

ग्रहण के दौरान बच्चे, बुजुर्ग, रोगी फलाहार कर सकते हैं।

-ग्रहण से पहले भोजन सामग्री जैसे दूध, दही व घी सहित अन्य खाद्य सामग्रियों पर कुश रखने से ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता।

-गर्भवती पेट अथवा नाभि पर गाय के गोबर या गेरू का पतला लेप लगाएं

-ग्रहण अवधि में श्राद्ध, दान व जप करने से लाभ मिलता है।

-देश में नहीं दिखेगा, न ही होगा इसका कोई प्रभाव। 

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