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एएमयू की बैठक का अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन ने किया बहिष्कार


🗒 रविवार, अगस्त 05 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन तनवीर हैदर उस्मानी ने शनिवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हुई कार्यकारी परिषद (ईसी) की विशेष बैठक का बहिष्कार कर दिया। वह राज्यपाल की तरफ से विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के नामित सदस्य हैं। उनका आरोप है कि बीते छह माह में कई बार मांगने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन संपत्तियों और उस पर हुए कब्जों का ब्योरा नहीं दे रहा है। कार्यकारी परिषद को दरकिनार कर मनमाने तरीके से नियुक्तियां की जा रही हैं। इसकी शिकायत केंद्रीय विवि के विजिटर यानी राष्ट्रपति, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मानव संसाधन विकास मंत्री से की जा रही है।

एएमयू की बैठक का अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन ने किया बहिष्कार

तनवीर हैदर का कहना है कि चार अगस्त को विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की विशेष बैठक बुलाई गई थी। मैंने  ई-मेल भेजकर उसका बहिष्कार कर दिया है। विशेष बैठक में किसी एक बिंदु पर बात होती है, जबकि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इसमें सात मुद्दे रखे थे। यह नियम विरुद्ध है। उनका आरोप है कि कुलपति मनमाने तरीके से विश्वविद्यालय चला रहे हैं। वह मेडिकल कॉलेज से हैं और नियुक्तियों में उन्हें ही मौका दे रहे हैं। प्रति कुलपति के तौर पर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की ही नियुक्ति की जा रही है। नियुक्तियों के लिए कार्यकारी परिषद की सहमति नहीं ली गई। विवि ने चयन समिति बनाए बिना संविदा पर रखना शुरू कर दिया। नियम है कि कार्यकारी परिषद की बैठक बुलाकर उसमें आवेदकों का पैनल रखा जाता है। परिषद सदस्य पैनल से एक नाम चुनते हैं। इन्हीं कार्यों के लिए हर महीने बैठक का प्रावधान है, लेकिन विवि प्रबंधन चार महीने में बैठक कर रहा है।

आयोग चेयरमैन का कहना है कि विश्वविद्यालय की पूरे देश में अरबों की संपत्ति है। इसकी कई संपत्तियों पर अवैध कब्जा हो चुका है लेकिन, विवि प्रशासन मौन है। इसकी जानकारी मांगी गई लेकिन विश्वविद्यालय छह माह में जानकारी नहीं दे सका। मेंबर इंचार्ज जनसंपर्क कार्यालय एएमयू  प्रो. साफे किदवई ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन तनवीर हैदर उस्मानी के सारे आरोप बेबुनियाद हैं। ईसी की बैठक से लेकर अन्य सारे काम नियमानुसार ही हो रहे हैं। नियुक्तियों में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। यूनिवर्सिटी की जमीन पर भी कब्जे नहीं हो रहे। 

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